Saturday, May 18, 2024
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आवाज.. सुनो.. पहाड़ों.. की.. का मंच हुआ ग़मगीन। जज ही नहीं दर्शकों के भी बहे आँसू।

आवाज.. सुनो.. पहाड़ों.. की.. का मंच हुआ ग़मगीन। जज ही नहीं दर्शकों के भी बहे आँसू।
(मनोज इष्टवाल )

संगीत सचमुच विधि और विधान के साथ प्रकृति की ऐसी पूँजी है जो जब चाहे जिसे हँसा दे, जिसे चाहे रुला दे। आज ऐसा ही माहौल तब हो गया जब देहरादून दूरदर्शन के लिए बन रहे कार्यक्रम “आवाज़.. सुनो.. पहाड़ों.. की..।” में पौड़ी के सुदूर क्षेत्र बीरोंखाल के कोलरी गाँव
की गायिका सोनिया रावत मंच पर आई और उन्होंने लोकगायक नरेंद्र सिंह नेगी का गीत “कु ढूंगो नि पूजी मिन.. गीत गाया। जज की कुर्सी पर बैठी लोकगायिका मीना राणा की आँखों से आँसू छलकते दिखे। वहीं जब मंचासीन मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री के निजी सचिव को सोनिया रावत का परिचय दिया गया तो वह अपनी अंतस की पीड़ा नहीं रोक पाए और वे मंच में ही बिलख पड़े। उन्होंने अपने दर्द को साझा करते हुए कहा कि “मेरी बेटी भी इस मंच के लिए तैयार थी। बोली थी पापा.. मैं भी भागीदारी निभाऊँगी लेकिन वह अचानक हम सबका साथ छोड़कर दूर गगन में कहीं खो गई।” यह घटनाक्रम इतनी तेजी से घटा कि किसी को भी सम्भलने का मौका नहीं मिला। क्या स्टेज और क्या दर्शक दीर्घा सभी की आँखों में आँसू थे।

इससे पहले कार्यक्रम के उद्घोषक रियान टम्टा ने जानकारी दी थी कि कल रात ही कार्यक्रम के संयोजक नरेंद्र रौथाण के साले साहिब भी एकाएक स्वर्ग सिधार गए। सबने कार्यक्रम को पोस्ट पोंड करने को भी कहा लेकिन नरेंद्र रौथाण बोले कि प्रदेश के सुदूर क्षेत्रों से बच्चे अपनी भागीदारी निभाने आये हैं, इसमें उनका क्या दोष.. इसलिए पहले कार्यक्रम निबटाएंगे फिर ससुराल जाकर इस दुःख में सरीक होंगे।

एक साथ कार्यक्रम में ऐसी भावुकता ने कुछ पल के लिए कार्यक्रम को बेहद ग़मगीन कर दिया। कार्यक्रम में निर्णायक की भूमिका निभा रहे सुप्रसिद्ध संगीतकार वीरेंद्र नेगी ‘राही’, लोककलाकार डॉ नंद लाल भारती, व सुप्रसिद्ध लोकगायक मीना राणा ने सोनिया रावत को सलाह दी कि वह दर्द भरे गीत गाने की जगह अब बीती जिंदगी के साथ भूल जाए व आने वाले वक्त के लिए ख़ुशी के गीत गाने शुरू कर दें ताकि इसके साथ आप जिंदगी के गुजरे दुःखों को भूलकर जिंदगी को नये अंदाज से जीना शुरू करें। हम सबको ख़ुशी होगी।

यकीनन ऐसे भावुकता भरे पलों में संगीत ही जीने की वह कला है जो हम सबको सुख व दुःख में हंसने मुस्कराने का ऐसा नायाब अंदाज देती है।

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35 बर्षों से पत्रकारिता के प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक व सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक, धार्मिक, पर्यटन, धर्म-संस्कृति सहित तमाम उन मुद्दों को बेबाकी से उठाना जो विश्व भर में लोक समाज, लोक संस्कृति व आम जनमानस के लिए लाभप्रद हो व हर उस सकारात्मक पहलु की बात करना जो सर्व जन सुखाय: सर्व जन हिताय हो.
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