Friday, March 13, 2026
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गढवाल मंडल तैयार हुआ सेब बागानों के लिए! पटेलिया फ़ार्म नर्सरी में जन्म ले चुके हैं 10 हजार से अधिक सेब पौध!

(मनोज इष्टवाल)

एक युग था..! अरे वही पिछली सदी का युग! जब उत्तराखंड के गढ़-कुमाऊं में लोक समाज की खूब सांस्कृतिक परम्पराओं के मध्य किसान मेलों का आयोजन होता था! तब एक मेला होता था खिर्सू का! जिसका गीत हम हुडके, ढोलकी की थाप व बद्दी-बादिण (गन्दर्भ समाज) के नृत्य व गीतों में सुनते थे! “खिर्सू बौडिंग लग्युं च! तिन भी सूणी मूली!”  और जो इस मेले में शिरकत करने जाता था वह वहां के बागानों के खट्टे-मीठे सेब तोड़कर न लायें भला ऐसे कैसे हो सकता था! कहा जाता था कि ये बागान चौबट्टाखाल से लेकर खिर्सू तक फैले हुए थे लेकिन उद्यानिकी विभाग की उदासीनता से वहां वर्तमान तक कुछ सेब के पेड़ जीवित भी हैं कि नहीं ! यह कहना सम्भव नहीं है! क्या वहां दुबारा बागान लगे या किसी उद्यानपत्ति ने इसमें रूचि दिखाई..! प्रश्न आज भी खड़ी अंगुली की तरह खड़ा ही है, किसी का हाथ जबाब में नहीं उठा!

फिर एक ऐसा जिलाधिकारी आता है जो पौड़ी गढवाल में कहाँ कैसे क्या किया जा सकता है उसकी बुनियाद तलाशने का यत्न करता है! वह निरंतर खाली होते गाँवों से भी चिंतित हैं तो बिशाल क्षेत्रफल में फैले ग्रामीणों की बंजर भूमि से भी व्यथित है! आखिर यह पीड़ा सिर्फ इस जिलाधिकारी के मन में ही क्यों? क्या ग्रामीणों ने इस ओर ध्यान देने की जगह सिर्फ २००-300 गज जमीन का टुकडा शहर में खरीद वहां बस जाना विकल्प समझा व जिस थाती-माटी में जन्में वह सब अपने पुरखों के नाम रजिस्ट्री करवाकर वैसे ही अंतर्ध्यान हो गए जैसे उनके पुरखे!

पीड़ा आखिर इस डीएम ने ही क्यों अपने हृदय में पनपाई..! इससे पहले भी तो जाने कितने जिलाधिकारी आये और गए होंगे फिर इस जिलाधिकारी के मन में ही यह पीड़ा क्यों! इसका सीधा सा जबाब पौड़ी के मंडल मुख्यालय के आस-पास मंडराने वाले बुद्धिजीवी स्वयं दे देते हैं! कहते हैं जिलाधिकारी धिराज गर्ब्याल ठेठ पहाड़ी मानसिकता के व्यक्ति हैं जिन्होंने कुमाऊँ मंडल विकास निगम की तस्वीर ही बदल डाली थी अब वही काम वह पौड़ी आकर कर रहे हैं! देखना इस व्यक्ति को पौड़ी कभी नहीं भुला पायेगा!

पौड़ी जनपद का कार्यभार ग्रहण करने के पश्चात जिलाधिकारी ने पाया कि जनपद में कृषि, उद्यान, होम स्टे की संभावनाएं भरपूर हैं। अधिकारियों को इन कार्ययोजनाओं को प्राथमिकता देनी होगी। उन्होंने नैनीडांडा में पटेलिया नर्सरी विकसित कर ड्रीम प्रोजेक्ट के तहत कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने होम स्टे व उद्यान के सन्दर्भ को बतौर प्रयोग अपने इर्द गिर्द जिलायोजना में खिर्सू का बासा होम स्टे व अपने ही आवास में सेब बागान लगाकर उसकी शुरुआत शुरू की! कारगर परिणाम सामने आने पर उन्होंने हिमाचल के कलासन (मंडी) के उद्यानपति व सुप्रसिद्ध सेब उत्पादक विक्रम सिंह रावत से मंत्रणा कर हिमाचल से उद्यान एक्सपर्ट व वैज्ञानिकों को पौड़ी गढवाल की भू-मृदा जांच के लिए आमंत्रित किया व कई जगह सेब बागानों के लिए चिन्हित करवाई! 

जिलाधिकारी पौड़ी के अनुसार पौड़ी जनपद में हॉर्टिकल्चर की गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए तथा यहाँ के किसानों को उन्नत क़िस्म के सेब  पौधे सस्ते दामों में उपलब्ध कराने के लिए नैनिड़ाडा ब्लॉक में कई वर्षों से निष्क्रिय पड़े पटेलिया फार्म में MM सीरीज़ की लगभग 10000 रूट्स्टाक क्षमता के सेव के पौधों की नर्सरी विकसित की जा रही है ! नर्सरी के विकास के लिए आवश्यक मूलभूत सुविधाओं यथा लैंड्स्केपिंग के पश्चात मृदा परीक्षण, पानी की व्यवस्था, फ़ार्मयार्ड मन्यूर/वेरमिकोंपोस्ट, सोलर फ़ेन्सिंग का क़ार्य पूर्ण कर पटेलिया को मदर नर्सरी के रूप में व प्रशिक्षण सेंटर के रूप में विकसित करने की कार्ययोजना के सफल परिणाम सामने आये हैं!

ज्ञात हो कि नैनीडांडा ब्लाक के अंतर्गत धुमाकोट क्षेत्र के ग्राम पटेलिया स्थित उद्यान विभाग के चार हेक्टेयर में फैले उस बाग की, जिसमें कुछ वर्ष पूर्व तक बहार छाई रहती थी। चार हेक्टेयर भूभाग में फैले इस राजकीय प्रजनन उद्यान में 470 विभिन्न प्रजाति के फलदार वृक्ष हुआ करते थे। 1972-73 में अस्तित्व में आए इस बगीचे में सेब के साथ ही नाशपाती, खुबानी, आडू, पूलम, बादाम, अखरोट के पेड़ थे। उद्यान में कर्मियों के लिए कार्यालय के साथ ही आवास की भी व्यवस्था थी। राज्य गठन के उपरांत उत्तराखंड शासन ने इस बाग को लीज पर दिया और यहीं से बाग के दुर्दिन शुरू हो गए। आज हालत यह है कि इस उद्यान में फलदार पेड़ों की जगह चारों ओर झाड़ियों फैली हुई है। आवासीय व अनावासीय भवन पूरी तरह खंडहर में तब्दील हो चुके हैं और उद्यान पूरी तरह बर्बाद हो गया है। वर्तमान में यहाँ 10 हजार वुडस्टॉक सेब के पेड़ लहलहाने लगे हैं!

यह सचमुच पौड़ी गढवाल के नैनीडांडा क्षेत्र के लोगों के लिए ही नहीं बल्कि सम्पूर्ण कुमाऊं व गढवाल मंडल के लिए एक मिशाल के तौर पर देखा जाने वाला कारनामा है! जिलाधिकारी धिराज गर्ब्याल कहते हैं कि हर अधिकारी अपने कार्यकाल में कुछ ऐसा जरुर करने की फिराक में रहता है ताकि जब वह उसके सुखद परिणाम देखे तो उसकी आँखों में ख़ुशी के साथ-साथ सुखद अनुभूति हो! उन्होंने कहा कि यह सब इसलिए सम्भव हो पाया है क्योंकि सिर्फ मैं नहीं बल्कि मेरे उपर बैठे अधिकारी वर्ग व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, कृषि मंत्री सुबोध उनियाल की बिशेष रूचि से यह सब सम्भव हो पाया है वरना जिला योजना की धनराशी उद्यानीकरण पर खर्च करना व उद्यानों को विकसित करना बड़ा मुश्किल कार्य है! हमने पटेलिया के अलावा जनपद के 08 स्थानों पर और सेब नर्सरी या बागान विकसित किये हैं जिनके अच्छे रिजल्ट लगातार हमें मिल रहे हैं!

उद्यानपति व उद्यान एक्सपर्ट विक्रम सिंह रावत भी जिलाधिकारी धिराज गर्ब्याल की प्रशंसा करते हुए कहते हैं कि यह पहली बार हुआ जब किसी जिले के जिलाधिकारी (2019 में) ने व्यक्तिगत रूचि लेकर यह जानने की कोशिश की है कि वे उद्यानिकी के क्षेत्र मेंउनके जनपद में क्या क्या सम्भावनाएं हैं! विक्रम सिंह रावत बताते हैं कि हिमाचल मंदी के कलासन में उनके कलासन नर्सरी फ़ार्म है जहाँ उनके हजारों सेब वृक्ष उनकी लाखो रूपये की आमदनी का जरिया हैं व हर बर्ष इसी नर्सरी से वे लाखों रूपये के सेब प्लांट भी सप्लाई करते हैं! उन्होंने बताया कि वे मूल रूप से पौड़ी गढवाल की खातस्यूं पट्टी के कलुण गाँव के हैं व उनके पिताजी लोग हिमाचल जा बसे थे! उन्होंने कलुण गाँव आकर 2017 में अपनी 5-5 नाली जमीन पर 270 वुड स्टॉक सेब  के पेड़ रोपे! इसके पीछे उनका एक ही मकसद था कि वह ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को बता सकें कि करने पर आयें तो सब कुछ हो सकता है! 2018-19 में उन्हें लगभग पहली फसलवुेड की प्राप्त हुई तो ग्रामीणों के चहरे भी खिल उठे! आज जिलायोजना के तहत वे अपने गाँव कलुण की 20 नाली जमीन पर 1000 सेब वृक्ष लगा चुके हैं! इसके पश्चात जिलाधिकारी धिराज गर्ब्याल द्वारा उनके आवास में पर वुड स्टॉक सेब की प्रजाति लगाईं गयी जिसने इस साल फल दिए हैं!

विक्रम सिंह रावत ने बताया कि पौड़ी जनपद से जिलाधिकारी द्वारा लगभग 85 उद्यानपति प्रशिक्षण हेतु उनकी कलासन फार्म नर्सरी का विजिट कर चुके हैं जबकि वर्तमान में 36 उद्यानपति टिहरी गढवाल से हिमाचल प्रशिक्षण पर गए हुए हैं! उन्होंने कहा कि यह जिलाधिकारी धिराज गर्ब्याल की हठ व वर्कशिप का ही नतीजा है कि मात्र अक्टूबर 2019 से लेकर अब तक वे जिला प्लान में पौड़ी गढ़वाल में पटेलिया फ़ार्म नर्सरी के अलावा आठ और सेब बागान विकसित कर चुके हैं जिनमें खिर्सू, कलुण, सिरोली, जिलाधिकारी आवास, सिल्ली मल्ला (बैजरो), बीणा मल्ला (पोखड़ा) व दो अन्य बागान बैजरो व उसके आस-पास हैं! उन्होंने बताया कि वर्तमान में उनके 36 व्यक्ति पटेलिया फ़ार्म में काम कर रहे हैं जो पौड़ी गढवाल की मदर नर्सरी कहलाएगी व भविष्य में यहीं हम उद्यानिकी का प्रशिक्षण भी देंगे!

वरिष्ठ पत्रकार अनिल बहुगुणा लिखते हैं इस बार की जिला योजना मद से पौड़ी में उन कामों की बुनियाद रखी गई जो आने वाले कई वर्षों तक नज़ीर के रूप में पेश होती रहेगीं।
जिला योजना मद से गुजरे सालों में कितनी योजनायें बनी होंगी..और अब उनका अस्तित्व भी नहीं बचा होगा..
जिला योजना की भारी भरकम राशि को अलग अलग विभागों में तकसीम कर देना ही अभी तक का विकास होना दिखाया जाता रहा था।लेकिन अब जिले में शराब, खनन से राजस्व कमाने के इतर जिले में बाग़वानी और उद्यान को राजस्व कमाने का ज़रिया बनाने के साथ, घर पर ही स्थानीय लोगों को रोजगारी का जरिया देने की प्रबृत्ति के साथ जिला योजना को खर्च किया जा रहा है, जो कि शुभ लक्षण माने जा सकते है..
इस ऐतिहासिक जिले में चाहे खिर्सू का बासा होम स्टे हो चाहे कलक्टर के आवास का नमूने वाला सेव बगान का उदाहरण..चाहे कंडोलिया का पार्क..और पटेलिया नर्सरी जो अब जिले में कई सेब बागानों की जनक होगी और भविष्य में यहाँ के युवाओं के लिये उद्यान के प्रति लगवा पैदा करेगी।
इस इलाक़े में सेब के मामले में फ़िर से रुचि जगाने में Vikram Singh Rawatने भी अपने हिमांचल की कलासन नर्सरी से सहयोग दिया है। श्री रावत जी ने अपने पौड़ी के पैतृक गांव कळून में भी 20 नाली भूमि का बगान विकसित किया है…
जिले के मुखिया Dhiraaj Garbyal और भाई विक्रम का..इस जिले को फिर से सेब के उत्पादन के लिये तैयार करने के प्रयास का बहुत शुक्रिया..!
इन सब के पीछे नेपथ्य में जो दिमाग़ काम कर रहा है,वे है पंतनगर कृषि संस्थान के
कुलपति प्रोफेसर तेजप्रताप सिंह …बिशुद्ध रूप से पहाड़ के लिये समर्पित और ठेठ पहाड़ी…!

पटेलिया फ़ार्म नर्सरी की वानगी देखकर वहां की जिला पंचायत सदस्य व डीपीसी मेम्बर श्रीमती अनिता मधवाल, डीएसपी डी. एन. मधवाल, सुरेन्द्र प्रताप, मनोज मधवाल सहित पटेलिया ग्राम सभा के ग्रामीणों व क्षेत्रीय जनता अभिभूत है! श्रीमती अनिता मधवाल का कहना है कि जिलाधिकारी धिराज गर्ब्याल व क्षेत्रीय विधायक महंत दलीप रावत जी ने इस फ़ार्म को विकसित करने में जो रूचि दिखाई है वह हम सबके लिए किसी नजीर से कम नहीं है! बस हमें यह ध्यान रखना होगा कि हम इस फ़ार्म को यूँहीं जीवंत व सरसब्ज बनाए रखें ताकि सम्पूर्ण उत्तराखंड से लोग इस फ़ार्म को देखने आयें और यहीं प्रशिक्षण भी प्राप्त करें!

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35 बर्षों से पत्रकारिता के प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक व सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक, धार्मिक, पर्यटन, धर्म-संस्कृति सहित तमाम उन मुद्दों को बेबाकी से उठाना जो विश्व भर में लोक समाज, लोक संस्कृति व आम जनमानस के लिए लाभप्रद हो व हर उस सकारात्मक पहलु की बात करना जो सर्व जन सुखाय: सर्व जन हिताय हो.
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