(मनोज इष्टवाल)
इसे कहते हैं सौ सुनार की तो एक लोहार की। ये भाजपा का पहला ऐसा टेस्ट कप्तान मुख्यमंत्री दिख रहें हैं जो क्रीज में ओपनर से लेकर अभी तक जमें हुए हैं, कोई इन्हें बाउंसर फैंक रहा तो ये सिक्सर मार देते हैं और कोई नहीं की टीम का खिलाड़ी गलती करता है तो ये नन स्ट्राइक पर रहकर भी स्ट्राइक मिलते ही चौका जड देते हैं।
यहाँ बात हो रही है उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की। पहले गैरसैण को ग्रीष्म कालीन राजधानी घोषित कर कांग्रेस ही नहीं अपनी पार्टी में पनप रहे विरोध को शांत करना। फिर गैरसैण विधान सभा भवन प्रांगण में विधान सभा अध्यक्ष की मौजूदगी में 15 अगस्त का झंडारोहण करना और एक दिन बाद आज यानि 16 अगस्त को गैरसैण में जमीन खरीदकर उसका पूजन कर विधिवत भूमिधर बनकर उस कमी को पूरा करना जो पलायन आयोग के उपाध्यक्ष एसएस नेगी ने पौड़ी का आवास बेचकर शहर की ओर पलायन किया, किसी मास्टर स्ट्रोक से कम नहीं है।
ज्ञात हो कि पौड़ी के वरिष्ठ पत्रकार अनिल बहुगुणा ने सर्वप्रथम इस बात का संज्ञान लेकर ट्वीट किया था, तदोपरान्त हिंदुस्तान अखबार ने चार कॉलम की खबर लगाई थी जिसमें पलायन आयोग के उपाध्यक्ष ने सफाई पेश करते हुए कहा था कि उन्होंने अपना नहीं अपने भाई का हिस्सा बेचा है। उन्होंने कहा था कि उनकी अभी भी पौड़ी में 40 नाली जमीन पौड़ी व कांडई गांव में है जिसे वह नहीं बेचेंगे।
उनकी इस दलील पर कांग्रेसी नेता सूर्यकांत धस्माना ने इसे रिवर्स माइग्रेशन पर सरकार की पहल को सिर्फ जुमलेबाजी क़रार देते हुए सरकार को आड़े हाथों लिया था। उन्होंने तंज कसते हुए कहा था कि पलायन आयोग के कार्यकर्ताओं को रोल मॉडल के रूप में अपने गांव बसना था लेकिन इसके उल्टा ये अपनी कूड़ी पुंगड़ी बेचकर शहर की ओर पलायन कर रहे हैं।
ऐसे में स्वाभाविक था कि इस प्रकरण में बाद मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत सबसे ज्यादा ट्रोल किये गए क्योंकि वे मुख्यमंत्री के साथ साथ पलायन आयोग के अध्यक्ष भी हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री ने जुलाई से लेकर अगस्त तक इस घटना पर कुछ नहीं बोला शायद वे मौके की तलाश में थे और जब बोला तो पहले कर दिया फिर बोला।
उन्होंने ट्वीट करते हुए कहा-“गैरसैंण जनभावनाओं का प्रतीक है। गैरसैंण हर उत्तराखंडी के दिल में बसता है। लोकतंत्र में जनभावनाएं सर्वोपरि होतीं है। गैरसैँण के रास्ते ही समूचे उत्तराखंड का विकास किया जा सकता है। इसके लिए सबसे पहले जनप्रतिनिधियों को ही रिवर्स पलायन करना होगा। रिवर्स पलायन से ही पहाड़ की तकदीर और तस्वीर सुधरेगी। त्रिवेंद्र लिखते हैं कि स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर मैं भी गैरसैँण का विधिवत भूमिधर बन गया हूं।”
बहरहाल यह ट्वीट मुख्यमंत्री के विपक्षियों के लिए जोर का झटका धीरे से लगे जैसा ही था लेकिन यह कार्यसंस्कृति मुख्यमंत्री के कृपापात्रों को भी नहीं भूलनी होगी क्योंकि उनके कृत्य कहीं न कहीं मुख्यमंत्री के कद को भी असहज बना देते हैं।
ज्ञात हो कि अक्टूबर 2017 में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने पौड़ी में पलायन आयोग की नींव रखी व 06 अप्रैल 2018 को इसका विधिवत लोकार्पण किया।


