देहरादून (हि. डिस्कवर)
500 से अधिक किसानों की भागीदारी, 24 प्रगतिशील किसान सम्मानित; आधुनिक तकनीक, वित्त और महिला सशक्तिकरण पर मंथन
देहरादून, 23 जुलाई। उत्तराखंड के किसानों को आधुनिक कृषि, बेहतर बाज़ार और वित्तीय संसाधनों से जोड़ने की दिशा में गुरुवार को विकासनगर स्थित अनिरुद्ध आश्रम में आयोजित दो दिवसीय ‘उत्तराखंड अनिरुद्ध किसान सम्मेलन’ किसानों के लिए नई उम्मीद लेकर आया। स्वर्गीय अनिरुद्ध कुमार की स्मृति में आयोजित इस सम्मेलन में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए 500 से अधिक किसानों ने भाग लिया। सम्मेलन में कृषि विशेषज्ञों, बैंकिंग संस्थानों, वैज्ञानिकों, जनप्रतिनिधियों और ग्रामीण उद्यमियों ने किसानों के साथ सीधे संवाद कर उन्हें आधुनिक खेती, वित्तीय योजनाओं और बाजार से जुड़ने के नए अवसरों की जानकारी दी।
सम्मेलन का आयोजन Kiwi Kisan Window (KIWI) के सह-संस्थापक अभिनव आहलूवालिया और नुपुर ने स्वर्गीय अनिरुद्ध कुमार के परिजनों के सहयोग से किया। कार्यक्रम का मूल विषय ‘ज्ञान, सम्मान और बाज़ार’ रहा, जिसके माध्यम से किसानों को खेती के बदलते स्वरूप से परिचित कराने का प्रयास किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ स्वर्गीय अनिरुद्ध कुमार को श्रद्धांजलि अर्पित कर किया गया। वक्ताओं ने उन्हें जौनसार-बावर क्षेत्र में नकदी फसलों को बढ़ावा देने वाला दूरदर्शी किसान नेता बताते हुए वर्ष 2005 में किसानों के हित में वैट कानून के विरुद्ध किए गए उनके संघर्ष को याद किया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राज्य मंत्री खजान दास ने कहा कि किसानों की आर्थिक समृद्धि सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक, बेहतर विपणन व्यवस्था और सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम किसान तक पहुंचाना समय की आवश्यकता है। ऐसे सम्मेलन किसानों और विशेषज्ञों के बीच मजबूत संवाद स्थापित करने का कार्य कर रहे हैं।
विशिष्ट अतिथि एवं विकासनगर विधायक मुन्ना सिंह चौहान ने कहा कि उत्तराखंड की असली ताकत उसके गांव और किसान हैं। उन्होंने कहा कि खेती को लाभकारी बनाने के लिए किसानों को नई तकनीकों, प्रसंस्करण, ब्रांडिंग और बाजार से जोड़ना जरूरी है। उन्होंने अनिरुद्ध किसान सम्मेलन को किसानों के लिए एक प्रेरणादायी मंच बताते हुए कहा कि स्वर्गीय अनिरुद्ध कुमार का किसानों के अधिकारों और उनकी आर्थिक उन्नति के लिए किया गया संघर्ष आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बना रहेगा।
सम्मेलन में प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों के 24 प्रगतिशील किसानों को उनकी उत्कृष्ट उपलब्धियों के लिए ‘किसान सम्मान पुरस्कार’ प्रदान किए गए। आयोजकों ने कहा कि समाज का वास्तविक सम्मान उन किसानों का होना चाहिए, जिनके अथक परिश्रम से देश की अन्न व्यवस्था मजबूत होती है।
सम्मेलन के पहले तकनीकी सत्र में ‘कृषि वित्त तक पहुंच’ विषय पर भारतीय स्टेट बैंक, उत्तराखंड ग्रामीण बैंक, नाबार्ड, कृषि विज्ञान केंद्र और पशु प्रजनन विभाग के विशेषज्ञों ने किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड, कृषि ऋण, सरकारी योजनाओं और वित्तीय सहायता के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
दूसरे सत्र में ‘कृषि में महिलाओं की भूमिका’ विषय पर महिला जनप्रतिनिधियों, कृषि अधिकारियों और शिक्षाविदों ने विचार रखे। वक्ताओं ने कहा कि कृषि क्षेत्र में महिलाओं की भूमिका लगातार बढ़ रही है और उन्हें तकनीकी प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता तथा बाजार से जोड़कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी जा सकती है।
सम्मेलन परिसर में लगाए गए 17 कृषि एवं ग्रामीण उद्यमिता स्टॉल भी आकर्षण का केंद्र रहे। यहां पारंपरिक हस्तशिल्प से लेकर आधुनिक कृषि ड्रोन, जैविक उत्पाद, कृषि उपकरण और नवाचारों का प्रदर्शन किया गया। इससे किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों और नए व्यावसायिक अवसरों की जानकारी मिली।
‘ओपन माइक’ सत्र में छह प्रगतिशील किसानों ने अपने अनुभव साझा करते हुए प्राकृतिक खेती, बागवानी, विपणन और तकनीकी नवाचारों के सफल प्रयोगों की जानकारी दी। किसानों ने कहा कि अनुभवों का यह आदान-प्रदान ग्रामीण कृषि को नई दिशा देने में सहायक होगा।
सम्मेलन के समापन पर Kiwi Kisan Window (KIWI) ने कहा कि संस्था हिमालयी राज्यों के किसानों को जागरूकता, आधुनिक तकनीक, वित्तीय पहुंच और बेहतर बाज़ार उपलब्ध कराने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। संस्था का उद्देश्य किसान-प्रथम दृष्टिकोण के साथ ग्रामीण किसानों और महिला कृषकों को राष्ट्रीय एवं वैश्विक मंच से जोड़ना है।
दो दिनों तक चले इस सम्मेलन ने यह संदेश दिया कि यदि किसान, वैज्ञानिक, बैंकिंग संस्थान, सरकार और बाज़ार एक मंच पर मिलकर काम करें तो खेती को लाभकारी, आधुनिक और आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है।

