(मनोज इष्टवाल)
आज अखबार में जब उत्तरकाशी जिले की पट्टी धनारी के गांव थाती में देश के प्रथम सीडीएस व 26वें जनरल विपिन रावत के नाम से द्वार बनाये जाने की चार कॉलम की खबर पढ़ी तो मानव प्रवृत्ति के अनुसार जलन होने लगी । जलन इसलिए नहीं कि वहां देश के सर्वोच्च यौद्धा के नाम का ऐतिहासक द्वार बनने जा रहा है बल्कि जलन इसलिए कि काश…हम पौड़ी वाले विकास खण्ड द्वारीखाल की ग्राम सभा बिरमोली के ग्राम- सैण में उनके जन्मस्थान में उनके नाम के संग्राहलय की घोषणा पहले कर लेतें।
शाबाश….ग्राम प्रधान तनुजा चौहान । प्रणाम मातृशक्ति…! जिन्होंने अपनी कोख में जाने कितने ऐसे वीरों को जन्म दिया जो माँ भारती की आन-बान शान के लिए मर मिटे। उत्तरकाशी की सरजमीं अभी तो माधौ सिंह भंडारी जैसे वीर सेनानायक की तिब्बत फतह के दीपोत्सव मंगशीरी बग्वाल में डूबी ही थी कि सुनती है कि उन्हीं की थाती माटी की बेटी श्रीमती सुशीला रावत की कोख में जन्म लेने वाले देश व विश्व के अग्रणी यौद्धा जिसकी हनक से चीन व पाकिस्तान भी डरता है, वही सेना के हैलीकॉप्टर एमआई 17वी5 में रीवा रियासत की रामकुमारी श्रीमति मधुलिका रावत अपनी धर्मपत्नी के साथ शहीद हो गए हैं, तो थाती गांव शोक में डूब जाता है।
इस शोक से बाहर निकालने के लिए उसी माटी की बहू व बेटी ग्राम प्रधान थाती तनुजा चौहान घोषणा करती है कि हम अपनी उस बेटी के दूध का कर्ज अवश्य चुकाएंगे जिसका स्तनपान कर एक ऐसा पुरुष इस धरती पर पैदा हुआ जिसने अपना ही नहीं देश व उत्तराखंड का नाम स्वर्णिम आखरों में लिख डाला। उस वीर के नाम वे उनके ननिहाल गांव थाती, पट्टी धनारी जिला उत्तरकाशी में वीर द्वार बनाकर उस इतिहास को साझा करेंगे जो सीडीएस जनरल विपिन रावत की यादों से जुड़ा है।
एक शूल दिल के एक कोने पर उभरा। लगा हम पौड़ी वाले लिख पढ़ तो गए लेकिन पहले भी सोये हुए थे आज भी सो ही रहे हैं। हमें तो जनरल विपिन रावत के नाम से उनके क्षेत्र के विकास की कई योजनाओं का श्रीगणेश करवा लेना चाहिए था। काश…हम पिथौरागढ़ कुमाऊं मंडल में देश के 17वें जनरल स्व. बिपिन जोशी की स्मृति में सजे पिथौरागढ़ को देखकर आते। हम जाने कब से पिछलग्गू हो गए। जिस क्षेत्र के जनप्रतिनिधि और जनता जब सोई हुई हो तो उस क्षेत्र का विकास वैसे ही अवरुद्ध हो जाता है। मुझे लगता है कि पौड़ी गढ़वाल के बाशिंदों को ऐसे वीर सेनानायक के गांव में एक ऐसा संग्राहलय स्थापित करने की मांग करनी चाहिये ताकि हर प्रकाश पर्व के इस पावन माह उनकी मृत्यु दिवस पर हम उनकी स्मृति में दीप माला पर्व आयोजित कर सकें। ठेठ वैसे ही जैसे वीर सेनानायक माधौ सिंह भंडारी व लोधी रिखोला के तिब्बत फतह के बाद उत्तरकाशी जनपद में मंगसीरी बग्वाल, शेष गढ़वाल में “इगास” व तल्ला बदलपुर से लेकर रिखणीखाल व गढ़वाल के कुमाऊं मण्डल से सीमा बांटते गढ़वाल मंडल में रिख बग्वाल प्रचलन में है। आइये हम सब दीपावली के एक माह बाद मनाई जाने वाली बग्वाल के चार दिन बाद यानि 8 दिसम्बर 2021 को हुए ऐसे वीर यौद्धा व उनकी पत्नी की मौत पर शहीदी दिवस के दीये जलाएं भैलो खेलें ताकि हमारी आने वाली औलादें उनके इतिहास के साथ जिंदा रहकर उन्हें याद रखें व उन जैसा बनने के सपने सँजोये।
वहीं दूसरी ओर प्रमुख संगठन के अध्यक्ष व पौड़ी गढ़वाल के विकास खण्ड द्वारीखाल के प्रमुख महेंद्र सिंह राणा ने जानकारी देते हुए बताया कि ग्राम पंचायत बिरमोली का गांव सैण विकास खण्ड द्वारीखाल की गौरव गाथा लिख गया है क्योंकि यहीं देश के पहले सीडीएस व 26 वें जनरल विपिन रावत का जन्म हुआ, जिनके अदम्य साहस व वीरता का देश व दुनिया ने लोहा माना है। ऐसे में मुझे गर्व है कि मैं ऐसे सेनाध्यक्ष के विकास खण्ड का प्रमुख हूँ जो एकमात्र पहले ऐसे जनरल हुए जिनकी कमांड में तीनों सेनाएँ नभ, जल और थल रहीं। उन्होंने कहा इस गौरव गाथा का इतिहास संजोने के लिए वे विकास खण्ड द्वारीखाल में जनरल विपिन रावत की मूर्ति व उनकी गौरव गाथा का शिलापट लगाएंगे। साथ ही वह मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को पत्र लिख चुके हैं कि विकास खण्ड द्वारीखाल के नवनिर्मित्त भवन का नाम जनरल विपिन रावत के नाम पर दर्ज करें ताकि हम उनके अदम्य शौर्य पराक्रम व साहस के साथ अपने विकास खण्ड का नाम जोड़ सकें।
प्रमुख महेंद्र सिंह राणा ने कहा कि वे सरकार के माध्यम से प्रधानमंत्री कार्यालय व गृह एवं रक्षा मंत्रालय केंद्र सरकार से अनुरोध करेंगे कि जनरल विपिन रावत के जनस्थान सैण में एक ऐसा संग्राहलय बनाया जाय जहां उनकी वीर गाथा के साथ साथ उनके पिता लेफ्टिनेंट जनरल लक्ष्मण सिंह रावत जी व उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि का जिक्र हो ऐसा वार मेमोरियल हो जो उनके इतिहास को स्वर्णाक्षरों में दर्ज रखे।


