Thursday, February 29, 2024
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क्या सचमुच आरएसएस उत्तराखंड से शुरू कर रहा है मदरसों का निर्माण!

(मनोज इष्टवाल)

खबर सचमुच चौंका देने वाली है क्योंकि जिस राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) देश के सभी वामपंथी व मुस्लिम संगठन कट्टर हिंदूवादी ही नहीं बल्कि हिन्दू आतंकवाद के नाम से पुकारते हैं वे ही उत्तराखंड से मदरसों की शुरुआत करने की योजना पर अमल कर रहे हैं! खबर की सच्चाई और गहराई से पड़ताल करने पर जो जानकारियाँ मिली वह और भी चौंका देने वाली हैं!

आपको बता दें कि सन 2002 में दिल्ली के जमा मस्जिद क्षेत्र जिसे आम लोग मिनी पाकिस्तान तक कह देते हैं में जन्में इमरान चौधरी ने मुस्लिम राष्ट्रीय मंच की स्थापना में हाजी मुहम्मद अफजल के सहयोगी बने ! कहा जाता है कि इसे स्थापित करने के लिए तत्कालीन संघ प्रमुख एस सुदर्शन ने उनकी मदद की और शुरूआती दौर में मुस्लिम राष्ट्रीय मंच ने अपने साथ 10 हजार मुस्लिमों को जोड़कर देश के प्रति पूरी निष्ठा से हिन्दुस्तानी मुसलमान कहलाने व हिन्दू मुस्लिम भाई चारे को बढाने की शपथ ली! तभी से ज्यादात्तर कट्टर मुस्लिम संगठन मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के धुर्र विरोधी हो गए लेकिन फिर भी उन्होंने अपना कर्तब्य नहीं छोड़ा!

दिसम्बर 2002 में स्थापित इस मंच के राष्ट्रीय संयोजक हाजी मुहम्मद अफजल बने जबकि इसके मार्गदर्शक के रूप में आरएसएस के नेता इन्द्रेश कुमार रहे! मुस्लिम राष्ट्रीय मंच जहाँ अपने को आरएसएस का ही एक हिस्सा मानकर उसे अपने से सम्बन्ध बताते हुए पैत्रिक संगठन कहता है वहीँ दूसरी ओर आरएसएस द्वारा विश्व भर में 39 देशों के अपने 39 संघ संगठनों में इसे कहीं जोड़ा गया हो उसके कोई प्रमाण नहीं मिलते!

मुस्लिम छात्रों के साथ इन्द्रेश कुमार !

राष्ट्रीय मुस्लिम मंच ने यकीनन भाई चारे की बुनियाद रखते हुए धार्मिक कट्टरता को ख़त्म करने का जो बीड़ा उठाया वह अपने आप में सराहनीय है! ज्ञात हो कि नवंबर 2009 में भारत के सबसे बड़े इस्लामिक संगठनों में से एक जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने वंदे मातरम् को एक गैर इस्लामिक गीत के रूप में वर्णित एक संकल्प पारित किया था । मुस्लिम राष्ट्रीय मंच ने इस संकल्प का विरोध किया था । इसके राष्ट्रीय संयोजक मोहम्मद अफजल ने कहा, “हमारे मुस्लिम भाइयों को फतवे का पालन नहीं करना चाहिए क्योंकि वंदे मातरम देश का राष्ट्रीय गीत है और हर भारतीय नागरिक का सम्मान करना चाहिए।” मुस्लिम राष्ट्रीय मंच ने आगे कहा कि मुसलमान जिन्होंने गाने से मना कर दिया , वे इस्लाम और भारत दोनों के विरोधी थे। अगस्त 2008 में, मुस्लिम राष्ट्रीय मंच ने अमरनाथ तीर्थ यात्रा के लिए भूमि आवंटन के समर्थन में दिल्ली से कश्मीर में लाल किले से एक पैग़ाम -ए-अमन (शांति का संदेश का संदेश) का आयोजन किया। झारखंड शाही-इमाम मौलाना हिजब रहमान मेरठी के नेतृत्व में, यात्रा के 50 कार्यकर्ताओं को शुरू में जम्मू-कश्मीर की सीमा पर रोक दिया गया था। उन्हें बाद में जम्मू जाने की अनुमति दी गई, जहां उन्होंने श्री अमरनाथ संघर्ष समिति के साथ बैठकें कीं। 6 से 8 नवंबर 2009 में, मुस्लिम राष्ट्रीय मंच ने आतंकवाद के विरोध में एक तिरंगा यात्रा (राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान में मार्च) का आयोजन किया, जो मुंबई में गेटवे ऑफ इंडिया की ओर अग्रसर हुई । एक हजार स्वयंसेवकों ने आतंक के विरुद्ध शपथ ली और अपने गृह जिलों में इसके खिलाफ अभियान की कसम खाई। सितंबर 2012 में, मुस्लिम राष्ट्रीय मंच ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 370 को रद्द करने के लिए एक हस्ताक्षर अभियान का आयोजन किया, जो जम्मू-कश्मीर राज्य को सीमित स्वायत्तता देता है, और दावा किया कि उन्होंने 700,000 हस्ताक्षर एकत्र किए हैं।

यह सब तो ठीक है लेकिन उत्तराखंड से आरएसएस मदरसों की शुरुआत करेगा यह बात उत्तराखंड प्रदेश के 9 पहाड़ी जनपदों के ठेठ हिन्दू धार्मिक विचारकों के गले नहीं उतर रही है! हो न हो आने वाले समय में आरएसएस का यह कदम खुद आरएसएस के लये ही आत्मघाती हो क्योंकि जिस तरह आये दिन प्रदेश में विगत चार पांच सालों से लव जिहाद के मामले व धार्मिक कट्टरता के मामले प्रकाश में आये हैं उस से हिंदुत्व को अपनी आन बान शान समझने वाला उत्तराखंड का पहाड़ी जन मानस एक पल भी नहीं चाहता कि उनकी धरती पर ऐसी पहल की जाय ! यहाँ के जनमानस का मानना है कि ऐसी ही शुरुआत पूर्व में प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत भी कर चुके हैं आज उनसे पहाड़ी मूल का व्यक्ति इसी कारण नफरत करता है और उनका बर्षों का राजनीतिक जीवन भी इसी कारण धूमिल हुआ है!

अब प्रश्न यह आता है कि जब मुस्लिम राष्ट्रीय मंच को आरएसएस ने अपने से सम्बन्ध नहीं किया हुआ है तब कैसे संघ के वरिष्ठ नेता इन्द्रेश कुमार इसके मार्गदर्शक बने हुए हैं? ज्ञात हो कि इन्द्रेश कुमार अपनी सबसे अधिक गतिविधियाँ हरीश जनपद व उसके आस-पास के इलाके में चलाते हैं और शायद वे यहीं से मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के तत्वावधान में मदरसों की शुरुआत करना चाहते हैं! कुछ संघियों का मानना है कि संघ इस पर नजर रखे हुए है क्योंकि कल संघ पर कोई प्रश्नचिह्न न लगे इसलिए इन्द्रेश कुमार के नेतृत्व में राष्ट्रीय मुस्लिम मंच उर्दू किताबों के साथ हिंदुत्व सम्बन्धी पुस्तकें भी पढेगा और उनके दिमाग से फितूर निकालकर उन्हें देश प्रेम का पाठ पढ़ाया जाएगा! वहीँ सूत्र यह भी कहते हैं कि अभी तक इन्द्रेश कुमार लगभग दो लाख मुस्लिमों का धर्म परिवर्तन करवा चुके हैं और वे विधिवत हिन्दू हो चुके हैं लेकिन प्रश्न फिर भी वही है कि क्या ये मदरसे सिर्फ उत्तराखंड के मैदानी भागों में ही रहेंगे या फिर इन्हें पहाड़ चढ़ाया जाएगा! बहरहाल आरएसएस मदरसों का निर्माण करवा रहा है यह खबर बेबुनियाद कही जा सकती है क्योंकि इन्द्रेश कुमार जरुर आरएसएस से सम्बन्ध हैं लेकिन आरएसएस के अजेंडे में मदरसों का कोई प्रारूप नहीं है ऐसा कहा जा रहा है!

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