Monday, June 24, 2024
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देवी देवताओं के मंदिर क्यों न दिव्य और भव्य बनें? – तीरथ सिंह रावत

ज्वालपा धाम में मंदिर सौंदर्यीकरण के लिए भूमि पूजन सम्पन्न।

* ज्वालपा धाम में मंदिर सौंदर्यीकरण के लिए भूमि पूजन सम्पन्न।

(रिपोर्ट- पार्थ सारथि थपलियाल, ज्वालपा धाम)

ज्वालपा माता की जयकारे और ढोल दमाऊं पर पारंपरिक नृत्य तालों के मध्य हर्षोल्लास के साथ नाचते गाते मां ज्वालपा के भक्तगण ज्वालपा देवी मंदिर के बाह्य स्वरूप के सौंदर्यीकरण के लिए भूमि पूजन सम्पन्न हुआ। श्री ज्वालपादेवी सिद्धपीठ पूजा समिति और श्री ज्वालपा देवी मंदिर समिति द्वारा संयुक्त रूप से श्री ज्वालपा देवी मंदिर के वर्तमान स्वरूप में किसी प्रकार का परिवर्तन किए, मंदिर के बाह्य स्वरूप का सौंदरीयकरण के लिए भूमि पूजन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित तीरथ सिंह रावत (पूर्व मुख्यमंत्री एवं सांसद गढ़वाल संसदीय क्षेत्र) मुख्य यजमान की भूमिका निभाई।

विगत अक्षय तृतीया के दिन 10 मई शुक्रवार के दिन दोपहर 12.06 से 12.58 बजे तक अभिजित मुहूर्त में यह समारोह संपन्न हुआ। मां ज्वालपा के भक्त आस पास के गावों से ढोल दमाऊं बजाते हुए, नए और उत्सवी परिधानों से सुसज्जित नर नारियां समारोह स्थल पर आए। समारोह मंडप ज्वालपा धाम स्थित संस्कृत विद्यालय के प्रांगण में बनाया गया था। ज्वालपा धाम संस्कृत विद्यालय और महाविद्यालय के छात्र पंडित भास्कर ममगाई और पंडित सुरेंद्र कुकरेती के नेतृत्व में स्वस्तिवाचन करते हुए सभा मंडप में अतिथियों की अगवानी करते हुए पहुंचे। श्री ज्वालपा देवी सिद्धपीठ पूजा समिति के अध्यक्ष सतीश अणथ्वाल और श्री ज्वालपा देवी मंदिर समिति के अध्यक्ष कर्नल शांति प्रसाद थपलियाल (से. नि.) ने मुख्य अतिथि तीरथ सिंह रावत का भावभीना स्वागत किया। दोनो समितियों के पदाधिकारियों ने भी मालाएं पहनाकर अभिनंदन किया। मंचस्थ अन्य प्रमुख व्यक्ति थे- शिवदयाल बौंठियाल, भगवती प्रसाद अणथ्वाल, रमेश चंद्र थपलियाल, उमेश नौडियाल, रविन्द्र बिष्ट, संजय अणथ्वाल, रोहित अणथ्वाल देवेंद्र बिस्ट, भास्करानंद अणथ्वाल, चक्रधर अणथ्वाल अनिल किशोर अणथ्वाल, अनिल थपलियाल और राजेश थपलियाल।

सिद्धपीठ पूजा समिति के अध्यक्ष सतीश अणथ्वाल ने अतिथियों के स्वागत करते हुए बताया कि लंबे समय से ज्वालपा देवी के मंदिर के बाह्य स्वरूप का सौंदर्यीकरण का संकल्प पूजा समिति और मंदिर समिति की कार्य योजना में था। अंतत अक्षय तृतीया के दिन अभिजित मुहूर्त में भूमिपूजन का काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में लोकसभा चुनावों के कारण आदर्श आचार संहिता लागू है इसलिए समारोह में पूर्ण रूप से आचार संहिता का पालन किया जा रहा है। मंदिर समिति के अध्यक्ष कर्नल शांति प्रसाद थपलियाल ने बताया कि इस आयोजन के लिए 9 वर्ष पूर्व दोनों समितियों के मध्य आरंभिक चिंतन हुआ। 2021 में दोनो समितियों के मध्य सहमति पत्र पर हस्ताक्षर हुए। इससे पूर्व दो बार भूमिपूजन के अवसर बने लेकिन कारण विशेष से पूरे नही हो सके। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि वर्तमान मंदिर में कोई छेड़छाड़ किए बिना यह सौंदर्यीकरण मंदिर के बाह्य भाग का किया जाएगा। उन्होंने इस काम में सभी की सहभागिता पर बल दिया।

मुख्य अतिथि तीरथ सिंह रावत ने कहा कि भूमि पूजन में शामिल न होने के लिए कुछ लोगों ने मुझे फोन किए थे लेकिन हमें यह याद रखना चाहिए कि जब मनुष्य अपने पुराने घर को एक नया और आधुनिक लुक देता है तो यही बात देवी देवताओं के मंदिरों पर भी लागू होती है। उन्होंने केदारनाथ,अयोध्या में राम मंदिर और काशीनाथ कोरिडोर के उदाहरण देते हुए अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि मंदिर का गुंबद ऊंचा होगा तो सड़क से भी लोग मंदिर को देख पाएंगे। मुख्यातिथि ने ऑल वेदर रोड, बदरीनाथ, केदारनाथ आदि का जिक्र करते हुए कहा कि मंदिरों की आकर्षिता श्रद्धालुओं के साथ साथ पर्यटकों को भी अपनी ओर आकर्षित करते हैं। लोगों के आने जाने से कई तरह के रोजगार भी खुलते हैं। इस समारोह का संचालन पार्थसारथि थपलियाल ने किया।

शुभ मुहूर्त पर मंदिर परिसर में पं भास्कर ममगाईं और पं सुरेंद्र कुकरेती के आचार्यत्व में संस्कृत विद्यालय, महाविद्यालय के छात्रों ने भूमि पूजन सम्पन्न करवाया। मुख्य यजमान की भूमिका में तीरथ सिंह रावत, सतीश अणथ्वाल- पूर्णिमा अणथ्वाल, शांति प्रसाद थपलियाल-सरोज थपलियाल ने निभाई। भूमि पूजन के समय लगभग एक हजार श्रद्धालु इस महत्वपूर्ण आयोजन के साक्षी बनें। आदर्श आचार संहिता के मद्देनजर जिला प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किए हुए थे। सभी आमंत्रित अतिथियों का आभार व्यक्त किया पार्थ सारथि थपलियाल ने। शीघ्र ही सौंदर्यीकरण कार्य को मूर्तरूप दिया जायेगा।

 

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35 बर्षों से पत्रकारिता के प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक व सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक, धार्मिक, पर्यटन, धर्म-संस्कृति सहित तमाम उन मुद्दों को बेबाकी से उठाना जो विश्व भर में लोक समाज, लोक संस्कृति व आम जनमानस के लिए लाभप्रद हो व हर उस सकारात्मक पहलु की बात करना जो सर्व जन सुखाय: सर्व जन हिताय हो.
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