Sunday, March 3, 2024
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जब भाग्य में माथे की लकीरें हों, तो कोई माई का लाल उसे छीन नहीं सकता।- पुष्कर सिंह धामी।

कार्यसमिति की बैठक में सरल शब्दों में इशारों इशारों  में बहुत कुछ समझा गए मुख्यमंत्री पुष्कर धामी।

(मनोज इष्टवाल)

सच में कुछ तो ऐसा है मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी में जिस से वह भीड़ में भी सबसे अलग नजर आते हैं। ठंडे शब्दों के बीच गर्म मिजाज, शालीन और अनुशासित सा दिखने जैसा व्यक्तित्व..! चेहरे पर मासूमियत लेकिन फैसले लेने की अद्भुत क्षमता। हारी बाजी को जीतने का सगल…और विरोधियों को उन्ही का भाषा में समझाने के तौर तरीके। यह सब वह भी इतनी सी उम्र में…लगता है राजनीति में कोई अलग से अमरत्व की जड़ी का रस्वादन किये हुए हैं, तभी तो बोले “जब भाग्य में माथे की लकीरें हों, तो कोई माई का लाल उसे छीन नहीं सकता।”

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से अपनी राजनीति की शुरुआत करने वाले पुष्कर सिंह धामी भाजपा युवा मोर्चा के अध्यक्ष, मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी के ओएसडी, व दो बार विधायक व मुख्यमंत्री तक उन्होंने वह हर राजनीति अपने आप में आत्मसार कर ली है जिसे समझने के लिए दिग्गजों को पूरी उम्र खपानी पड़ती है।

भाजपा की कार्यसमिति में आगामी निकाय, पंचायत और लोकसभा चुनाव को लेकर चर्चा करते हुए बड़ी जीत का संकल्प लिया गया। वहीं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी आज अपने उदबोधन की शुरुआत करते हुए कहा कि “हौसलों के तरकस में कोशिशों के तीर जिंदा रखो, हार भी गए अगर सबकुछ जो जीतने की उम्मीद जिंदा रखो।”

पुष्कर सिंह धामी आज अपनी रौ में दिखाई दिए। ऐसे लगा मानो अपने विगत चुनाव व वर्तमान में चम्पावत उप चुनाव के अनुभव उन्होंने बेहद बारीकी से लिये और उनके अनुभव को देखते हुए उन्होंने अपने शब्दों की अभिव्यक्ति को कुछ इस तरीके से प्रस्तुत करते हुए कहा कि हमारे मध्य हमारे बंशीधर जी व महाराज जी गार्जन की तरह हैं, नरेश जी , प्रेम दा, बिशन दा सभी मेरे से सीनियर हैं और सभी तो हैं ही..! लेकिन जब भाग्य में माथे की लकीरें हों, तो कोई माई का लाल उसे छीन नहीं सकता।

शब्द बहुत सरल व साधारण रूप से कहे गए थे, भले ही ये शब्द राजनेताओं के दिल में बिजली की तरह कौंधे होंगे क्योंकि उन्होंने यहीं अपना उद्बोधन समाप्त नहीं किया। उन्होंने कहा कि हम सब एक परिवार के हैं, हमें रोज एकदूसरे की ख़बरसार लेनी चाहिए ताकि हमारे संज्ञान में रहे कि काम क्या छूट गया, क्या रह गया। काम जो करता है उसे बताने की आवश्यकता नहीं पड़ती, हर किसी का काम अपने आप बता देता है।

यकीनन मुख्यमंत्री ने जिस कंफीडेंस के साथ अपनी बातें रखी उससे यह तो साफ जाहिर है कि उन्होंने यह जताने की कोशिश की है कि ये न सोचिए मैं कुछ नहीं जानता। मैं सब जानते हुए भी बहुत सरलता से वह सब लेता हूं और नादान बना रहता हूँ। यकीनन कार्यसमिति की बैठक में भाजपाइयों के बीच रखी गयी उनकी बहुत हल्के शब्दों में रखी गयी बातें एक बड़ा संदेश पार्टी राजनीति व उत्तराखंडी राजनीति में काफी वजनदार है।

ज्ञात हो कि विगत 8 जून से हल्द्वानी के रामपुर रोड स्थित एक होटल में आयोजित कार्यसमिति की बैठक के प्रथम सत्र का उद्घाटन प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक, सीएम पुष्कर सिंह धामी, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, प्रदेश सह प्रभारी रेखा वर्मा, प्रदेश संगठन मंत्री अजेय ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया। पहले सत्र में विधानसभा चुनावों में भारी जीत के लिए सीएम पुष्कर सिंह धामी को माला पहनाकर स्वागत और अभिनंदन किया गया। इसके बाद केंद्र्र सरकार और प्रदेश सरकार के विकास और जनहितकारी कार्यों को लेकर राजनैतिक प्रस्ताव केंद्रीय रक्षा राज्यमंत्री अजय भट्ट के माध्यम से आया। इसका समर्थन पूर्व केंद्रीय मंत्री व सांसद डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक, पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री सांसद अजय टम्टा और राज्यसभा सदस्य नरेश बंसल ने किया जबकि अनुमोदन प्रदेश कार्यसमिति सदस्य आशा नौटियाल, पूर्व मुख्यमंत्री सांसद तीरथ सिंह रावत, पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने किया। इसमें जनता, कार्यकर्ताओं, कार्यकर्ताओं के परिवारों और मातृशक्ति का आभार जताया गया।

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