सीडीएस विपिन रावत की दुर्घटना में मौत पर शोकाकुल उत्तराखंड, स्तब्ध देश और शोक में डूबा पौड़ी गढ़वाल।
(मनोज इष्टवाल)
◆ बघेल राजपूताना घराने से थी उनकी धर्मपत्नी श्रीमति मधुलिका रावत।
◆ पट्टी धनारी गांव थाती की थी उनकी मां श्रीमती सुशीला देवी। यहीं पँचपुरा मकान में हुआ था उनका जन्म।
◆ नाना ठाकुर ….प्रजामंडल पार्टी में शिक्षा मंत्री रहे।
◆ पिता लेफ्टिनेंट जनरल लक्ष्मण सिंह रावत व जनरल विपिन रावत पौड़ी गढ़वाल के सैण गांव निवासी।
मुख्यमंत्री आवास में बुधवार को विधानमण्डल दल की बैठक के अवसर पर सीडीएस जनरल बिपिन रावत के हेलीकाप्टर दुर्घटना में हुए आकस्मिक निधन पर दो मिनट का मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि आर्पित की गई।
इस अवसर पर जनरल रावत का भावपूर्ण स्मरण करते हुए मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि जनरल रावत का निधन देश व उत्तराखण्ड के लिए अपूरणीय क्षति है। उनका आकस्मिक निधन स्वयं उनके लिए भी व्यक्तिगत क्षति है। उन्होंने कहा कि वे सर्वोच्च सेना अधिकारी होने के साथ ही सादगी व सरलता की भी प्रतिभूति थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड से भी जनरल रावत का विशेष लगाव था। राज्य के विकास की उनकी सोच थी। अभी हाल ही में राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर अपनी पत्नी के साथ वे देहरादून आये थे, उनका आकस्मिक निधन उत्तराखण्ड के लिए बड़ा ही दुःखद है।
इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज, डॉ हरक सिंह रावत, बंशीधर भगत, सुबोध उनियाल, बिशन सिंह चुफाल, स्वामी यतीश्वरानन्द, विधायक हरवंश कपूर, हरभजन सिंह चीमा सहित अन्य विधायकगणों ने भी जनरल बिपिन रावत को श्रद्धांजलि अर्पित की।
भारत की सशस्त्र सेनाओं के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल बिपिन रावत का असामयिक निधन हो गया। जनरल रावत 1978 को भारतीय सेना में कमीशन हुए और उन्होंने 43 वर्ष की सैन्य सेवा में देश के सर्वोच्च मिलिट्री रैंक तक का सफर तय किया।
स्वॉर्ड ऑफ ऑनर से लेकर परम विशिष्ट सेवा मेडल तक, 11 गोरखा राइफल्स से देश के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ तक, गढ़वाल के गांव से लेकर कश्मीर के ऊंचे पहाड़ों तक, जनरल रावत ने जितना विशाल जीवन जिया वो हर सैन्यकर्मी के लिए एक प्रेरणा बनकर शाश्वत रहेगा। कश्मीर के उरी में कर्नल बिपिन रावत, सोपोर में रावत साहब और दिल्ली में जनरल रावत बने बिपिन रावत अब एक अनन्त यात्रा पर चले गए हैं। लेकिन ना रैंक गई, ना जनरल रावत का फौजी होना…कश्मीर के एक समारोह में उन्होंने कहा था- फौजी और उनकी रैंक कभी रिटायर नहीं होते।
कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (सीसीएस) की आपातकालीन बैठक।
MI-17 V5 हादसे में देश के पहले सीडीएस जनरल बिपिन रावत, उनकी पत्नी मधुलिका रावत समेत सेना के 11 अधिकारियों के दुर्भाग्यपूर्ण निधन के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार शाम को कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (सीसीएस) की बैठक बुलाई। देश के शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों के साथ इस हादसे के बाद उत्पन्न स्थिति पर चर्चा की। साथ ही हादसे में देश के शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों के निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए 2 मिनट का मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि दी।
आंतरिक सुरक्षा और रक्षा नीति पर देश की शीर्ष निर्णय लेने वाली संस्था कैबिनेट कमेटी ऑफ सिक्योरिटी की शाम को बैठक हुई। संक्षिप्त बैठक में जनरल रावत को श्रद्धांजलि दी गई।
सीडीएस जनरल विपिन रावत का उत्तराधिकारी कौन।
कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (सीसीएस) की बैठक उन अटकलों के बीच हुई है कि क्या समिति जनरल रावत के उत्तराधिकारी के मामले पर चर्चा करेगी, खासकर लद्दाख में चीन के साथ तनाव को देखते हुए। हालांकि वरिष्ठता सूची के हिसाब से जनरल एमएम नरवणे की दावेदारी सबसे मजबूत दिख रही है। सीडीएस जनरल विपिन रावत त्रि-सेवा मामलों पर रक्षा मंत्री के प्रधान सैन्य सलाहकार भी थे। प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में सीसीएस में रक्षा, गृह, विदेश और वित्त मंत्री शामिल हैं।
शुक्रवार को दिल्ली में होगा अंतिम संस्कार:
चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत और उनकी पत्नी का अंतिम संस्कार शुक्रवार (10 दिसंबर) को दिल्ली छावनी में किया जाएगा। उनके पार्थिव शरीर के कल शाम तक एक सैन्य विमान से राष्ट्रीय राजधानी पहुंचने की उम्मीद है। पार्थिव शरीर को शुक्रवार को उनके घर लाया जाएगा और लोगों को सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक श्रद्धांजलि देने की अनुमति दी जाएगी, इसके बाद एक अंतिम संस्कार जुलूस कामराज मार्ग से दिल्ली छावनी में बरार स्क्वायर श्मशान तक निकाला जाएगा।
जनरल विपिन रावत पर कुछ महत्त्वपूर्ण ।
*आखिरी भाषण:- जैविक युद्ध भविष्य के लिए सबसे बड़ी चुनौती।
* सेना के तीनों अंगों को एक साथ काम करने की आवश्यकता।
* लोकगायक नरेंद्र सिंह नेगी के साथ खाई थी झंगोरे की खीर।
* जनरल पद से सेवानिवृत्ति से बाद आये थे अपने पैतृक गांव।
* 12:40 दोपहर वेलिंग्टन हाउस में मौत की पुष्टि।
* विंग कमांडर पृथ्वी सिंह चौहान थे पायलट।
* 31 दिसम्बर 2016 से 1 दिसम्बर 2017 तक रहे सेना के 26वें जनरल।
* शिमला में पढ़ाई, आईएमए देहरादून से पासआउट, 11वीं राइफल के 5वें अफसर जो जनरल बने।
* कैबिनेट कमिटी ऑफ सेक्युरिटी (सीसीएस) की आपात बैठक।
* राष्ट्रपति कोविद ने मुम्बई के कार्यक्रम किये रदद्।
* दुनिया के 60 देशों में हैं सीडीएस।
* जनरल रावत की महत्वपूर्ण पहल- सेना को आपातकाल में स्वयं फैसले लेने का अधिकार।
* सेडोल से जबलपुर व जबलपुर से दिल्ली आएंगी उनकी सासू माँ व उनका परिवार।
* 2012:- आप मेरी सेवा बाद में करना अभी देश को मेरी सेवाओं की आवश्यकता है।
* नीलगिरी के जंगलों में हादसे।
* 10 दिसम्बर 2021 को आईएमए देहरादून आने वाले थे जनरल विपिन रावत।
कहाँ जन्में सीडीएस जनरल विपिन रावत व कहाँ कटे बचपन के दिन।
मूलतः सीडीएस जनरल विपिन रावत पैतृक गांव पौड़ी गढ़वाल के द्वारीखाल विकास खंड की ग्राम सभा बिरमोली के एक छोटे से गांव सैण है लेकिन उनका जन्मस्थान उनके मामाकोट थाती गांव ,धनारी पट्टी उत्तरकाशी में बताया जाता है। जबकि पौड़ी गढ़वाल के सैण गांव के लोगों का मानना है कि जनरल रावत का जन्म यहीं हुआ और जन्म के बाद कुछ समय वह अपने मामाकोट थाती गांव रहे।
बिपिन रावत उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल में पैदा हुए थे। 1978 से भारतीय सेना में थे। उन्हें 1978 में भारतीय सैन्य अकादमी, देहरादून से ग्यारह गोरखा राइफल्स की पांचवी बटालियान में नियुक्त किया गया था। उन्हें स्वार्ड आफ ऑनर भी मिल चुका है।
सेवानिवृत्ति के पश्चात सपत्नीक 30 अप्रैल 2018 को अपने पैतृक गांव सैण गांव व अपने मामाकोट 20 सितंबर 2019 को उत्तरकाशी जिले की पट्टी धनारी के थाती गांव आये थे देश के पहले सीडीएस व 26वें सेनाध्यक्ष विपिन रावत।
आपको बता दें कि जनरल रावत की माता का नाम सुशीला देवी व नाना का नाम ठाकुर सूरत सिंह परमार थे वे छोटे नाना ठाकुर किशन सिंह परमार थे, जो उत्तर प्रदेश में कद्दावर नेताओं के रूप में जाने जाते थे व उत्तर प्रदेश में संविधान सभा के सदस्य भी रहे। उनके पिता लेफ्टिनेंट जनरल लक्ष्मण सिंह रावत थे।
उदित घिल्डियाल जानकारी देते हुए बताते हैं ठाकुर किशन सिंह टिहरी प्रजामंडल सरकार में शिक्षा मंत्री रहे। उसके बाद स्वतंत्र भारत में मनोनीत सांसद रहे। उन्होंने सन 1962, 1967, 1969 में उत्तरकाशी विधानसभा क्षेत्र से विधायक का प्रतिनिधित्व किया। 1969- 70 में उत्तर प्रदेश सरकार में वन राज्य मंत्री भी रहे। ठाकुर किशन सिंह परमार उन बिरले व्यक्तित्व में शामिल व्यक्ति कहे जाते हैं जिन्होंने भारत सरकार से उत्तरकाशी में नेहरू पर्वतारोहण संस्थान की स्थापना करवाई। वह देहरादून बार एसोसिएशन के अध्यक्ष भी रहे।सुशीला देवी की पढ़ाई किशन सिंह जी के देख रेख में देहरादून में हुई।
वरिष्ठ पत्रकार शीशपाल गुसाईं बताते हैं कि जनरल बिपिन रावत हर्षिल, नेलांग में भी रहे। बतौर आर्मी चीफ वह दो बार दो रात्री को हर्षिल में रहे। उन्होंने नेलांग और हर्षिल पुराने दिनों को याद किया था। पुनः 18 नवम्बर 19 को हर्षिल से अपने वह अपने मामाकोट आये थे। वहाँ वह अपने भाई भाभी जी सहित बच्चों, गाँव वासियों को मिले थे। उन्होंने वह घर भी देखा जहाँ वह बचपन में अपनी माँ के साथ उस आलीशान चौपुरा भवन में आया करते थे, रहा करते थे। उनकी मां एमकेपी कालेज में पढ़ती थी। जब छुट्टियां होती थी, तब वह धनारी पट्टी में जाती थी।
जनरल विपिन रावत कि नाना ठाकुर किशन सिंह की न्यू रोड देहरादून में कोठी थी वहां भी जनरल बिपिन रावत काफी समय तक रहे। उस कोठी में भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू बैडमिंटन खेलने आया करते थे। अंग्रेज अधिकारियों ने उन्हें या छूट दे रखी थी, नेहरू जी पास के ही देहरादून जेल में करीब 300 दिन तक बंद थे।
उत्तराखंड के लिए गौरव की बात थी जब वह अपने देश के एक जनरल को अपने गांव में अपने मामा कोट में अपने पास आते हुए देखते थे। इतिहास के प्रति मेरी रुचि से जनरल साहब की मां श्रीमती सुशीला देवी के भाई कर्नल सत्यपाल सिंह परमार से फोन पर बातचीत होती है। कर्नल परमार जी नोयडा में रहते हैं। मामकोट पक्ष से कर्नल साहब, जनरल साहब से संपर्क में रहते थे। कर्नल स्तब्ध हैं।
जनरल रावत उत्तरखण्ड से देश में बहुत ऊंचाईयों पर गए
जहाँ अभी तक सात आठ लोग ही पहुँचे हैं। इतिहास उन्हें याद करता रहेगा। विनम्र श्रद्धांजलि।
मध्य प्रदेश के रीवा राजघराने में है सीडीएस जनरल विपिन रावत की ससुराल।
भोपाल से मित्र राकेश सिंह से दूरभाष पर बात हुई तो उन्होंने बताया कि आज इस क्षेत्र के सभी अखबार सीडीएस बिपिन रावत की मौत की खबर से पटे पड़े हैं। सीडीएस रावत के निधन के बाद देश के साथ-साथ उनकी ससुराल शहडोल के सोहागपुर में भी माहौल बेहद गमगीन है। बिपिन रावत के निधन के बाद उनके साले यशवर्धन सिंह ने आजतक से खास बातचीत में बताया था कि उनके जीजा जी बिपिन रावत का निधन देश के लिए बड़ी क्षति है। बिपिन रावत हमेशा देश सेवा की बात करते थे। उन्होंने जनवरी 2022 में ससुराल शहडोल आने को कहा था, लेकिन यह नहीं पता था कि वह अब नहीं आएंगे।
जनरल बिपिन रावत की पत्नी श्रीमति मधुलिका रावत के भाई यशवर्धन सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि बिपिन रावत ने शहडोल को सैनिक स्कूल देने का वादा किया था. उन्होंने कहा था कि आदिवासी इलाके में सैनिक स्कूल खोलने से यहां के स्थानीय लोगों को बहुत लाभ होगा। यशवर्धन सिंह ने बताया कि जीजा जी (बिपिन रावत) बहुत नरम दिल के थे बहन से शादी का रिश्ता पहले बिपिन रावत जी के पिताजी की तरफ से 1986 में आया था और फिर उनकी शादी हुई थी।
ज्ञात हो कि देश के सीडीएस बिपिन रावत का मध्यप्रदेश से गहरा नाता है। उनकी ससुराल मध्यप्रदेश के शहडोल में है। उनकी पत्नी मधुलिका रावत मध्यप्रदेश के राजपरिवार की बेटी है। मध्यप्रदेश के शहडोल जिले के सोहागपुर स्थित गढ़ी में बिपिन रावत की ससुराल है। उनकी पत्नी मधुलिका रावत यही पर पली और बढ़ी हुई। वे स्व. कुंवर मृगेंद्र सिंह की पुत्री हैं। मृगेंद्र सिंह रीवा घराने से ताल्लुक रखते हैं।
रावत की मधुलिका सिंह से शादी 1985 में हुई थी। जनरल रावत और मधुलिका की दो बेटी हैं। बड़ी बेटी कृतिका रावत है, जिनकी शादी मुंबई में हुई है, जबकि छोटी बेटी तारिणी अभी पढ़ाई कर रही हैं। विपिन रावत के ससुर मृगेंद्र सिंह शहडोल के सोहागपुर से 1967 और 1972 में कांग्रेस से दो बार विधायक रह चुके हैं।

जनरल विपिन रावत।
हम सभी जानते हैं कि विगत 8 दिसम्बर 2021 को एक दुखद हादसे में भारतीय सेना का एक शानदार नायक, चीफ ऑफ डिफ़ेंस स्टाफ-सीडीएस जनरल बिपिन लक्ष्मण सिंह रावत अपनी पत्नी मधुलिका रावत और 11 अन्य सैन्य अधिकारियों के साथ इस दुनिया को अलविदा कह देंगे। यूं बीच सफर छोड़कर गए जनरल रावत देशभर में हर तरफ आँखों को नम कर गए। उत्तराखंड ने तो अपना ऐसा लाल खो दिया जिसके कंधों पर देश की सैन्य ताकत का बहुत बड़ा भार था। पहाड़ की आँखें नम हैं, सब तरफ एक ठहराव सा दिख रहा है। यक़ीनन इस तरह जनरल बिपिन रावत विदा होंगे इसकी कल्पना किसी ने सपने में भी नहीं की थी।
देश के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत का सैन्य करिअर न केवल शानदार रहा बल्कि उनकी हिम्मत की चमक उनको मिले तमग़ों में झलकती थी। जनरल रावत गोरखा रेजिमेंट के चौथे अधिकारी थे, जो देश के सेनाध्यक्ष बनें। जनरल बिपिन रावत का कद एक सैन्य नायक के रूप में कितना विराट है इसकी बानगी उनके सेना की कमान संभालने के बाद पाकिस्तान में सर्जिकल स्ट्राइक, डोकलाम में चीनी सेना को पीछे धकेलने जैसे उदाहरणों से दिख जाती है। उन्हीं के सेनाध्यक्ष रहते जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटने के बाद माहौल को संभालने में सेना कामयाब रही।
देश के प्रथम सीडीएस बने जनरल बिपिन रावत।
जनरल बिपिन रावत 2019 में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ यानी सीडीएस बने थे। यह पद संभालने वाले वे भारतीय सशस्त्र बलों के पहले अधिकारी रहे। यह जनरल बिपिन रावत के सैन्य जीवनकाल के साहसिक कार्यों का ही परिणाम रहा कि भारत सरकार ने सेना प्रमुख पद से उनके रिटायरमेंट से ठीक पहले सीडीएस बना दिया। बतौर सीडीएस में जनरल रावत का कार्यकाल 2022 में खत्म हो रहा था, लेकिन किसे पता था वे यूं दुनिया छोड़कर अचानक चले जाएंगे।
जनरल रावत का एनडीए से आईएमए तक का सफर।
जनरल बिपिन रावत महाराष्ट्र के खड़कवासला में राष्ट्रीय रक्षा अकादमी में दाखिल होने से पहले शिमला के सेंट एडवर्ड स्कूल मे पढ़े थे। जनरल रावत ने देहरादून स्थित भारतीय सैन्य अकादमी-IMA में ट्रेनिंग ली थी। जनरल बिपिन रावत ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के साथ एक पैदल सेना बटालियन की कमान संभाली, जो पूर्वी क्षेत्र में भारत की स्थिति को चीनियों से अलग करती है। उन्होंने कश्मीर घाटी में एक पैदल सेना डिवीजन और पूर्वोत्तर में एक कोर की कमान भी संभाली थी।
गोरखा रेजिमेंट से सेना प्रमुख तक का सफर।
जनरल बिपिन रावत गोरखा रेजीमेंट के सैन्य अधिकारी थे। जनरल रावत गोरखा रेजीमेंट के चौथे ऐसे अधिकारी थे जो सेनाध्यक्ष पद पर पहुँचे थे। सीडीएस के रूप में जनरल रावत सेना से संबंधित मसलों पर भारत सरकार के सिंगल पॉइंट एडवाइज़र की भूमिका में थे। सीडीएस जनरल रावत ने सशस्त्र बलों के तीनों विंग भारतीय सेना, भारतीय वायु सेना और भारतीय नौसेना के बीच बेहतर तालमेल पर फोकस किया और सैन्य मॉडर्नाइजेशन को तवज्जो दी। जनरल रावत को 31 दिसंबर 2016 को सेनाध्यक्ष नियुक्त किया गया था। एक चार सितारा सैन्य अधिकारी, जनरल रावत को 30 दिसंबर 2019 को चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ नियुक्त किया गया था।
बेदाग रहा जनरल बिपिन रावत का सैन्य करिअर।
जनरल रावत ने एक ब्रिगेड कमांडर, जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ (जीओसी-सी) दक्षिणी कमान, सैन्य संचालन निदेशालय में जनरल स्टाफ ऑफिसर ग्रेड -2, कर्नल सैन्य सचिव और उप सैन्य सचिव की सेवा में करीब 40 साल बिताए। जनरल रावत जूनियर कमांड विंग में सैन्य सचिव की शाखा और वरिष्ठ प्रशिक्षक के पद पर भी रहे। वह संयुक्त राष्ट्र शांति सेना (यूएनपीएफ) का भी हिस्सा थे और उन्होंने कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य में एक बहुराष्ट्रीय ब्रिगेड की कमान संभाली थी।
सर्जिकल स्ट्राइक के जरिए पाकिस्तान को किया था पस्त।
अपने शानदार और सफल सैन्य करिअर में जनरल बिपिन रावत के नाम एक के बाद एक अनेक उपलब्धियां जुड़ती गई। जनरल रावत ने नॉर्थ-ईस्ट में उग्रवाद को क़ाबू करने से लेकर म्यांमार में 2015 सीमापार ऑपरेशन की मॉनिटरिंग करने और 2016 के सर्जिकल स्ट्राइक की निगरानी में बेहद अहम भूमिका निभाई थी।
जनरल बिपिन रावत ने डोकलाम में चीन को पीछे धकेला।
2017 में डोकलाम में भारतीय और चीनी सेनाएं आमने-सामने आ गई थी। चीन डोकलाम के एक हिस्से में सड़क बना रहा था लेकिन भारतीय सेना के कड़े विरोध के बाद दोनों सेनाओं के बीच युद्ध जैसी स्थिति आ गई थी। 70 से ज्यादा दिनों तक डोकलाम विवाद चला था लेकिन तत्कालीन सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत के नेतृत्व में भारतीय सेना ने चीनी सेना का डटकर सामना किया और अंतत: ड्रैगन को पीछे होने पर मजबूर होना पड़ा।
जनरल रावत ने कश्मीर में लॉन्च किया था ऑपरेशन ऑलआउट।
जम्मू-कश्मीर में सीमापार पाकिस्तान से फैलाए जा रहे आतंक को मुँहतोड़ जवाब देने को सेना की कमान संभालने के बाद जनरल बिपिन रावत ने 2017 में भारतीय सेना की तरफ से ऑपरेशन ऑलआउट लॉन्च किया गया। इस ऑपरेशन के जरिए जम्मू कश्मीर में कई आतंकी संगठनों को ठिकाने लगाया गया।
मोदी सरकार ने अनुच्छेद 370 हटाया तो जम्मू-कश्मीर में जनरल रावत ने संभाला था मोर्चा।
केंद्र की मोदी सरकार ने 2019 में जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाया तो घाटी में शांति बनाए रखने को सरकार ने बड़ी संख्या में सेना के जवानो को कश्मीर में तैनात किया और इसकी पूरी ज़िम्मेदारी सेना प्रमुख बिपिन रावत संभाली थी।
जनरल बिपिन रावत का उपलब्धियों भरा शानदार करिअर।
2015 में भारतीय सेना ने नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालैंड-खापलांग (NSCN-K) के उग्रवादियों द्वारा किए गए घात का सफलतापूर्वक जवाब दिया। जनरल रावत ने उस मिशन की निगरानी की थी जिसे III-कोर आयोजित किया गया था।
2016 में जनरल बिपिन रावत भारतीय सेना के उरी बेस कैंप पर आतंकवादी हमले के बाद सर्जिकल स्ट्राइक की योजना का हिस्सा थे। भारतीय सेना की एक टीम ने एलओसी पार कर पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में प्रवेश किया। जनरल रावत ने नई दिल्ली में साउथ ब्लॉक से घटनाक्रम की निगरानी की थी।
जनरल बिपिन रावत परम विशिष्ट सेवा मेडल, उत्तम युद्ध सेवा मेडल, अति विशिष्ट सेवा मेडल, विशिष्ट सेवा मेडल, युद्ध सेवा मेडल और सेना मेडल से अलंकृत थे और उनकी भारतीय सेना में विशिष्ट सेवा सदैव देश के गौरवशाली सैन्य इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में अंकित रहेगी।
देश के पहले सीडीएस व 26वें जनरल विपिन रावत की शान में उत्तराखंड के सभी सरकारी व गैर सरकारी विभागों व भवनों पर लगा तिरंगा झुका रहेगा व मुख्यमंत्री धामी द्वारा तीन दिन के राज्यीय शोक की घोषणा की है।
बिग सैल्यूट जनरल विपिन रावत।







