देहरादून (हि. डिस्कवर)
उत्तराखंड फ़िल्म कलाकार संगठन (दिल्ली) द्वारा पूर्व निर्धारित कार्यक्रमानुसार संस्कृति विभाग उत्तराखण्ड शासन की निदेशक सुश्री बीना भट्ट से मुलाकात कर कलाकारों की विभिन्न समस्याओं के समाधान हेतु 08 मांगों का एक ज्ञापन संस्कृति विभाग को दिया गया।
संगठन के महासचिव नरेंद्र रौथाण ने कहा कि संगठन के कलाकारों के साथ संस्कृति निदेशक बीना भट्ट ने वार्ता हेतु एक बैठक आहूत की थी जिसमें संगठन ने 08 मांगों का एक प्रस्ताव संस्कृति निदेशालय को निदेशक संस्कृति के माध्यम से सौंपा है। उन्होंने बताया कि उन्होंने अपने प्रस्ताव में उत्तराखंड की लोक कला, साहित्य व संस्कृति से जुड़े लोककलाकारों, साहित्यकारों एवं तकनीकी विशेषज्ञों की पहचान हेतु संस्कृति विभाग उत्तराखण्ड के माध्यम से परिचय पत्र बनाने की मांग रखी है ताकि शासन प्रशासन में कार्यवश जाने पर अधिकारी व कर्मचारी यहां के लोककलाकारों की पहचान कर सकें।
संगठन के महासचिव नरेंद्र रौथाण ने कहा है कि उत्तराखंड फ़िल्म कलाकार संगठन उत्तराखंड में उत्तराखंड के लोक कलाकारों, साहित्यकारों व कला क्षेत्र में काम करने वाले तकनीकी विशेषज्ञों के लिए कार्य करने वाला संगठन है इसीलिए हम सब एक जुट होकर उत्तराखंड सरकार के सामने अपनी मांगें प्रस्ताव के माध्यम से रख रख रहे हैं ताकि सरकार इन पर सहृदयता दिखाते हुए अपनी मंजूरी दे।
संगठन द्वारा अपनी 7-8 मांगों में लोक कलाकारों के लिए स्वास्थ्य परिवहन व्यवस्था में 50 प्रतिशत की छूट, उत्तराखंड की समृद्धि सरोकारों से जुड़े विविध विधा के कलाकारों, साहित्यकारों की पहचान ग्राम सभा, ब्लॉक, नगर पालिका स्ततरीय विभागीय टीमों के माध्यम से करने व चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता अपनाए जाने की बात रखी गयी है। साथ ही साथ दूरस्थ क्षेत्रों की वाद्य यंत्र वादकों, कलाकारों, काश्तकारों, जगरिया, सरईया इत्यादि के लिए उपयुक्त प्लेटफॉर्म की व्यवस्था हो व ऐसा कुछ अमेंडमेंट किया जाय ताकि अपने जनपद के लोककलाकार अपने ही जनपद में अपनी लोककला का प्रदर्शन कर सकें इससे दो फायदे होंगे। एक सुगमता बनेगी व दूसरा इन कलाकारों को मिलने वाले पारिश्रमिक में कटौती कम होगी।
संगठन ने मांग रखी है कि हर कलाकार का जीवन बीमा व स्वास्थ्य बीमा हो ताकि असहाय, बेबस, दुर्घटना पीड़ित या बीमार कलाकार को अपने इलाज के लिए दर दर की ठोकरें ना खानी पडे। 45 बर्ष के उपरांत कलाकार को पेंशन श्रेणी में रखा जाय व इसके लिए उसे कम से कम 25 बर्ष के अनुभव की प्रमाणिकता देनी होगी।
संगठन के महासचिव नरेंद्र रौथाण के अनुसार संगठन चाहता है कि चयन प्रक्रिया में चार ग्रेड एबीसी व ड़ी हों ताकि सब एक ही तराजू में न तौले जाएं व दल चयन करते समय यह ध्यान में हो कि किस कलाकार या दल के पास कितनी विधाएं हैं जिससे उसकी ग्रेड साबित हो सके। संगठन यह नहीं चाहता कि पद्मश्री, राष्ट्रीय व प्रदेश सरकार द्वारा सम्मानित कलाकारों को भी इस चयन प्रक्रिया से प्रतिबर्ष गुजरना पड़े इसलिए उन्हें विभाग जिस स्तर पर चाहे आमंत्रित कर उनके वरिष्ठता क्रम के अनुसार उनका पारिश्रमिक तय कर सकता है।
इसके अलावा उत्तराखंड फ़िल्म कलाकार संगठन (दिल्ली) द्वारा अपने प्रस्ताव में मांग की गई है कि प्रदेश व केंद्र सरकार अपने संस्कृति मंत्रालयों में संग्राहलय, वाचनालय व शिल्पकला केंद्रों की स्थापना या निर्माण करे ताकि इसमें देश प्रदेश की संस्कृति लोकसमाज को दर्शाने, फिल्माने, दिखाने, अवलोकन करने या पढ़ने हेतु वाद्य यंत्रों, पारम्परिक गीत संगीत, लोकनृत्य, लोकगाथा, लोक नाट्य, नृत्य व हस्तकला सम्बन्धी प्रदर्शनों का लिखित व व दार्शनिक संरक्षण व संवर्द्धन किया जा सकें।
संगठन ने संस्कृति विभाग की निदेशक सुश्री बीना भट्ट से हुई बैठक पर खुशी का इजहार करते हुए कहा है कि यह बैठक कई मायनों में साकारात्मक साबित हुई है जिसमें लिखित प्रस्तावों के साथ मौखिक में भी कई कलाकारों ने अपनी आम समस्याओं को विभाग के साझा किया है।

