Sunday, March 15, 2026
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विधानसभा में बैकडोर भर्ती मामले में तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय एक्सपर्ट कमेटी गठित। जो भी गलत हो कार्यवाही होकर रहेगी – ऋतु खंडूरी।

विधानसभा में बैकडोर भर्ती मामले में तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय एक्सपर्ट कमेटी गठित। जो भी गलत हो कार्यवाही होकर रहेगी – ऋतु खंडूरी।

◆ विधान सभा  सचिव  का  कमरा  हुआ  सील ।

◆ मुख्यमंत्री धामी के पत्र के संज्ञान लेते हुए की बड़ी कार्यवाही।

(मनोज इष्टवाल)

विदेश दौरे से लौटने के बाद ही विधान सभा अध्यक्ष ने यह कल्पना तक नहीं की होगी कि उन्हें अपने पिछले अध्यक्षों के किये गए गडबड घोटालों की चूल्हें हिलानी पड़ेंगी। विगत एक सितंबर को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के पत्र पर फौरन कार्यवाही करते हुए विधान सभा अध्यक्ष ऋतु खंडूरी द्वारा विधान सभा नियमावली के विरूद्ध भर्ती, प्रमोशन व एसीआर की जांच हेतु तीन सदस्यीय उच्च-स्तरीय कमेटी का गठन कर एक माह में सम्पूर्ण प्रकरण का खुलासा करने का निर्देश दिया है। आईएएस दलीप कोटिया की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय समिति में सुरेंद्र सिंह रावत व अवनेंद्र सिंह नयाल को शामिल किया गया है।

यह यकीनन सामाजिक दृष्टि से जनता के मध्य दिया गया सुचिता एवं पारदर्शिता का ऐसा सन्देश है जिसे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी बिना लाग-लपेट के देना चाहते हैं। पहले लग रहा था कि जो अवैध भर्ती के प्रकरण सामने आये हैं व उन में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी व उनके राजनीतिक गुरु कहलाने वाले पूर्व मुख्यमंत्री व महाराष्ट्र के राज्यपाल श्री भगत सिंह कोश्यारी के नज़दीकी रिश्तेदारों के नाम सम्मिलित होने से कहीं मुख्यमंत्री धामी हिचक न जाएं लेकिन उनके द्वारा लिखे गए विधान सभा अध्यक्ष को पत्र ने साफ कर दिया है कि उन्हें इस बात का इल्म नहीं था कि उनके नजदीकी भी ऐसे भ्रष्टाचार में लिप्त होंगे क्योंकि अगर यह सब उनके द्वारा ही किया गया होता तो ऐसा हो ही नहीं सकता था कि कोई मुख्यमंत्री इतनी पारदर्शिता के साथ पत्र लिखकर विधान सभा अध्यक्ष से जांच का अनुरोध करता।

दूसरी ओर यह जाहिर सी बात है कि जिन खुले हाथों से एस टी एफ UKSSSC भर्ती घोटाले का पर्दाफाश कर रही है उससे साफ पता चलता है कि मुख्यमंत्री ने एसटीएफ को खुली छूट दी है। यकीनन मुख्यमंत्री धामी ऐसे समय में अपनी ही सरकार पर जांच बिठाकर जनता के बीच जनता के हीरो बन गए हैं।


उक्त प्रकरण पर प्रेस कांफ्रेंस करते हुए विधान सभा अध्यक्ष ऋतु खंडूरी अपने तल्ख तेवरों में दिखी व आत्मविश्वास से लबरेज ऋतु खंडूरी ने पत्रकारों के प्रश्नों का उसी अंदाज में जबाब दिया जिस अंदाज के लिए वह जानी जाती हैं। उन्होंने कहा कि वे राजनीति में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आदर्श मानती हैं व उनके “न खाऊंगा न खाने दूंगा” नारे का अनुशरण भी करती हैं, इसलिए निश्चिंत रहिए जो गलत है, कोई भी गलत है ! उस पर कार्यवाही होकर रहेगी।

विधान सभा अध्यक्ष ने जानकारी देते हुए बताया कि उन्होंने मीडिया व अन्य स्रोतों से जानकारी प्राप्त करते हुए तत्काल विधान सभा सचिव को तब तक के लिए छुट्टी पर भेज दिया है जब तक सम्पूर्ण जांच नहीं हो जाती व साथ ही निर्देश जारी किये हैं कि जांच के समय वह जांच कमेटी को सहयोग करें।

(प्रेस कांफ्रेंस के दौरान कुछ ऐसे तेवरों में दिखी विधान सभा अध्यक्ष ऋतु खंडूरी)

उन्होंने कहा है कि इस सब प्रकरण से जो मीडिया के माध्यम से उन्हें विगत 15 दिनों स्व प्राप्त हुई है विधान सभा की गरिमा आहत हुई है। उन्होंने कहा अब विधान सभा के सम्पूर्ण रूल एन्ड रेगुलेशन का पालन होगा व सख्त नियमावली बनेगी। उन्होंने पत्रकारों के प्रश्नों का जबाब देते हुए कहा कि विधान सभा अध्यक्ष के पास विशेषाधिकार जरूर होता है लेकिन बैक डोर भर्ती में कैसे विशेषाधिकार का प्रयोग हुआ है उसकी जांच नियमों के अधीन जांच कमेटी के ईमानदार छवि के अफसर करेंगे।

प्रेस विज्ञप्ति

उत्तराखंड विधानसभा भर्ती प्रकरण पर उत्तराखंड विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूडी भूषण ने पत्रकार वार्ता के दौरान कहा कि उत्तराखण्ड विधान प्रदेश का सर्वोच्च सदन है, इसकी गरिमा को बनाये व बचाये रखना मेरा दायित्व ही नहीं मेरा कर्तव्य भी है।एक बात मैं स्पष्ट रूप से प्रदेशवासियों को और खासतौर पर उत्तराखण्ड के युवा वर्ग को कहना चाहूँगी, वह आश्वस्त रहें, मैं किसी को भी निराश नहीं करूँगी, सबके साथ न्याय होगा।

मेरे लिये सदन की गरिमा से ऊपर कुछ भी नहीं है इसको बनाए रखने के लिये कितने ही कठोर व कड़वे निर्णय लेने हों, मैं पीछे नहीं हटूंगी। विधान सभा परिसर लोकतन्त्र का मंदिर है। अध्यक्ष होने के नाते किसी भी प्रकार की अनियमितता एवं अनुशासनहीनता मुझे स्वीकार्य नहीं है। विधान सभा व प्रदेश के हित में मुझे जितने भी रिफॉर्म्स विधान सभा में करने पडें मैं उसके लिये तैयार हूँ ।

मेरे सार्वजनिक जीवन की शुरूआत माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के व्यक्तित्व से प्रभावित होकर हुई। मुझे याद है उन्होंने कहा था “ना खाऊंगा ना खाने दूंगा” इसी ध्येय को मैंने भी अपने जीवन में उतारा है।

मीडिया व अन्य विभिन्न स्रोतों से विधान सभा सचिवालय में कार्मिकों/अधिकारियों की विधि एवं सेवा नियमों के विरूद्ध नियुक्तियों / पदोन्नति के सम्बन्ध में प्राप्त जानकारी के आधार पर जनहित में मैंने आज दो बड़े निर्णय लिये हैं।

1. विशेषज्ञ जांच समिति गठित की गयी है जिसमें (क) श्री दिलीप कुमार कोटिया (अध्यक्ष) (ख) श्री सुरेन्द्र सिंह रावत सदस्य एवं (ग) श्री अवनेन्द्र सिंह नयाल सदस्य हैं। सभी पूर्व कार्मिक सचिव हैं एवं प्रदेश के वह इस मामले के विशेषज्ञ हैं। इसके साथ-साथ यह भी निर्देश दिया है कि विशेषज्ञ समिति अधिकतम एक माह के भीतर अपना प्रतिवेदन, जांच रिपोर्ट / सुझाव उपलब्ध करायेगी।

2. दूसरा निर्णय यह किया है कि वर्तमान विधान सभा सचिव (श्री मुकेश कुमार सिंघल) तत्काल प्रभाव से आगामी आदेश तक अवकाश पर रहेंगे। उक्त अवकाश की अवधि में विशेषज्ञ समिति, श्री मुकेश कुमार सिंघल सचिव को जांच में सहयोग हेतु उपस्थित होने के लिये जब-जब कहेगी तो उन्हें ऐसे निर्देशों का पालन करना होगा।

बहरहाल यही मौका है जहां विधान सभा अध्यक्ष ऋतु खंडूरी को अपने आपको अपने पिता पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल भुवन चन्द्र खंडूरी जैसा विशाल व साफ राजनेता के रूप में उत्तराखंड के जनमानस के मध्य स्थापित करना है व आगामी भविष्य की राजनीति की मजबूत नींव रखनी है। यह जितना आसान दिख रहा है उतना है नहीं क्योंकि क्या पक्ष और क्या विपक्ष…यहां तो जिस मंत्री की कुंडली खंगाली जा रही हैं उसी का पूरा परिवार सरकारी सेवा अवैध व वैध तरीके से उन्हीं के कार्यकाल में नियुक्ति पाता दिखाई दे रहा है। ऐसे में जांच कमेटी की जांच पर निर्भर करता है कि वह जांच एक माह में जनभावनाओं के अनुकूल सामने आएगी या फिर प्रतिकूल।

यहां सिर्फ विधान सभा अध्यक्ष ऋतु खंडूरी का राजनीतिक भविष्य ही दांव पर नहीं लगा है अपितु मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी व 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव भी दांव पर हैं। यहां जहां एक ओर पुष्कर सिंह धामी के हीरो बनने के चांसेस भी हैं वहीं केंद्रीय राजनीति का बोझ भी। यह उनके सब्र पर निर्भर है कि वे जन नेता बनेंगे या फिर राजनेता ही बने रहेंगे। और यदि जांच सचमुच जनता के पक्ष में गयी तो यह साफ है कि मुख्यमंत्री धामी का आधा मंत्रिमंडल त्यागपत्र देकर मंत्रिपद गंवाएगा।

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35 बर्षों से पत्रकारिता के प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक व सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक, धार्मिक, पर्यटन, धर्म-संस्कृति सहित तमाम उन मुद्दों को बेबाकी से उठाना जो विश्व भर में लोक समाज, लोक संस्कृति व आम जनमानस के लिए लाभप्रद हो व हर उस सकारात्मक पहलु की बात करना जो सर्व जन सुखाय: सर्व जन हिताय हो.
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