Saturday, May 18, 2024
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हिन्दी पत्रकारिता दिवस पर विचार एक नई सोच के तत्वावधान में गोष्ठी का आयोजन, पत्रकारिता के बदलते स्वरूप पर हुई चर्चा।

देहरादून (हि. डिस्कवर)।

विचार एक नई सोच के तत्वावधान में हिंदी पत्रकारिता दिवस पर एक गोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें राजधानी देहरादून के दर्जन भर से अधिक पत्रकारों ने पत्रकारिता व उसके बदलते स्वरूप पर अपने विचार व्यक्त किये। कार्यक्रम का संचालन पत्रकार अवधेश नौटियाल ने किया।

नेशनल सोशल मीडिया जर्नलिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष वरिष्ठ पत्रकार मनोज इष्टवाल ने विगत सदी के नब्बे की दशक की पत्रकारिता से लेकर वर्तमान तक की पत्रकारिता के विभिन्न स्वरूपों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि 1984 तक इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की पत्रकारिता में जहां दूरदर्शन का न्यूज़ प्रसारण शामिल था। वहीं ऑडियो पत्रकारिता के दौर में बीबीसी व आकाशवाणी ही दो माध्यम थे। तब आकाशवाणी के मीडियम वेब से ही ज्यादात्तर समाचारों का प्रसारण सुनने को मिलता था। बेशक प्रिंट मीडिया तब काफी सशक्त माध्यम हुआ करता था।

बिजनेश घरानों की जागीर बनने लगी पत्रकारिता -मनोज इष्टवाल।

मनोज इष्टवाल ने कहा कि नई सदी का 2010 का दशक पत्रकारिता की क्षेत्र में जहां नई क्रांति लाया और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ने अंतर्राष्ट्रीय बाजार में पैर फैलाने शुरू किए। बस यहीं से पत्रकारिता जुनून और जज्बे की जगह बिजनेश घरानों की जागीर बनने लगी। फिर सोशल मीडिया ने पैर पसारने शुरू किए तो प्रिंट मीडिया के संक्रमण का दौर व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के लिए चुनौती का दौर प्रारम्भ हो गया। इस दौर ने यानि 2020 तक के दशक पत्रकारिता में बड़ी उठापटक हुई। और इनकी नई परिभाषा सामने आने लगी। जहां सोशल मीडिया त्वरित मुद्दों को उठाकर सच और झूठ को बेनकाब करता हुआ दो फर्लांग आगे निकला वहीं पत्रकारिता का स्तर गिरना प्रारम्भ हो गया। इस पेशे में पढ़े लिखे के साथ साथ बहुत कम पढ़े लिखे भी सोशल साइट पर अपने यूट्यूब व न्यूज़ पोर्टल चौनल्स चलाने लगे जिस से मुख्यधारा के पत्रकार काफी विचलित नजर आये। उन्होंने कहा यह दौर हिंदी पत्रकारिता के लिए बेहद संक्रमण का दौर कहा जा सकता है लेकिन मेरा मानना है कि जल्दी ही यह संक्रमण काल मिटेगा व नया युग प्रारम्भ होगा।

पत्रकारिता में पढ़ना व सीखना हमेश जारी रखें – प्रेम पंचोली।

वरिष्ठ पत्रकार प्रेम पंचोली ने कहा पत्रकारों को विषय की समझ होना बहुत जरूरी है। किसी भी समाचार को लिखने से पूर्व हमें सभी तथ्यों की भली भांति जानकारी होनी चाहिए। उन्होंने नए पत्रकारों से आहवान किया कि शार्ट तरीकों से पत्रकारिता करने के बजाय शोधपरख पत्रकारिता पर फोकस करें। सोशल मीडिया के इस दौर में अगर आपका कंटेट अच्छा है तो आपको कोई नहीं रोक सकता है। खुद पर विश्वास रखें, पढ़ना और सीखना पत्रकारिता में हमेशा जारी रखें।

खोजी पत्रकारिता करने के लिए विषय की समझ होना जरूरी-आलोक।

वरिष्ठ पत्रकार आलोक शर्मा ने खोजी पत्रकारिता को लेकर अपनी बात कही। उन्होंने कहा खोजी पत्रकारिता में पत्रकार को विषय की समझ के साथ धैर्यवान होना बहुत जरूरी है। खोजी पत्रकारिता में एक खबर को करने में बहुत समय लगता है। बहुत से लोग आपका रास्ता रोकने की कोशिश करते हैं इसलिए डरने और घबराने वाला व्यक्ति खोजी पत्रकारिता नहीं कर सकता है। अगर आप ईमानदार हैं और आपके पास पुख्ता प्रमाण है तो आपको घपले-घोटालों से पर्दा उठाने के लिए डरने की जरूर नहीं है।

रंत रैबार दे रहा है गढ़वाली भाषा को प्रोत्साहन :- अमित।

वरिष्ठ पत्रकार अमित अमोली ने कहा राज्य गठन से अब तक बोली भाषा को लेकर जो पत्रकारिता के क्षेत्र में काम किया जाना चाहिये था वो अभी तक हुआ नहीं अगर हमें अपने आने वाली पीढ़ी को बोली भाषा से जोड़ना है तो हम सभी पत्रकारों को आगे आना होगा कम से कम एक खबर हमें अपनी बोली भाषा में लिखनी होगी और उसका प्रचार प्रसार भी करना होगा में पिछले 10 वर्षों से रंत रैबार सामाजिक संस्था व न्यूज़ पोर्टल के माध्यम से इस और अपनी टीम के साथ लगातार प्रयाशरत हूँ !

बोली-भाषा को बढ़ावा देने की जरूरत:- हरीश कंडवाल।

हरीश कंडवाल ने कहा कि हमें खबरों में अपनी बोली भाषा को बढ़ावा देने की जरूरत है। पाठकों तक अगर बोली भाषा मेें खबरें पहुंचेंगी तो उन्हें अच्छा लगेगा। इससे हमारी बोली भाषा का भी प्रचार प्रसार होगा और लोग उससे जुडेंगे। इस मौके पर हरीश कंडवाल मनखी ने अपने काव्यपाठ से सभी को मंत्रमुग्ध किया।

अपने हितों की रक्षा के लिए पत्रकारों को एकजुट होना होगा-राकेश बिजल्वाण

वरिष्ठ पत्रकार राकेश बिजल्वाण ने कहा अपने हितों की रक्षा के लिए सभी पत्रकारिता साथियों को आपसी भेदभाव भुलाकर एकजुट होना होगा। उन्होंने कहा वर्तमान में पत्रकार साथी अलग-अलग बंटे हुए नजर आते हैं। इसको हमें खत्म करना होगा। पत्रकारिता से प्रिंट, टीवी, सोशल मीडिया के पत्रकार होने का आपसी भेदभावखत्म हो गया तो यह पत्रकारिता में एक नया उदय होगा। एकजुटता में रहकर पत्रकार हितों के सभी कार्य किये जा सकते हैं।

घनश्याम जोशी व चंदन एस कैंतुरा ने किए अपने अनुभव साझा।

वरिष्ठ पत्रकार घनश्याम जोशी व चंदन एस कैतुरा ने अपने अनुभव साझा करते हुए पत्रकार साथियों को कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए। उन्होंने कहा समाज का आपके द्वारा लिखी खबरों के प्रति विश्वास बना रहे इसलिए पूरी ईमानदारी के साथ कार्य करना जरूरी है। शार्टकट तरीके से आगे बढ़कर पत्रकार पैसा कमा सकता है लेकिन इज्जत व नाम नहीं। इसलिए पत्रकारिता के मूल्यों से कभी समझौता न करें।

अमित रतूड़ी, आशीष नेगी, विकास कपरूवान बोले सोशल मीडिया सशक्त माध्यम।
इस मौके पर युवा पत्रकारों ने अपने विचार रखते हुए कहा कि सोशल मीडिया वर्तमान दौर में एक मजबूत हथियार है। विभिन्न संस्थानों में काम करने वाले पत्रकार साथी सोशल मीडिया के माध्यम से अलग-अलग मुद्दों पर मजबूती से अपनी बात रख सकते हैं। संस्थान की बंदिशें हो सकती हैं लेकिन सोशल मीडिया की नहीं।

रमन जायसवाल, जगमोहन मौर्य, अरूण पांडेय ने रखी अपनी बात
हिन्दी पत्रकारिता दिवस पर बधाई देने के साथ पत्रकार साथियों ने पूर्ण निष्ठा और ईमानदारी के साथ कार्य करने की शपथ ली।

मंच के संचालन की जिम्मेदारी वरिष्ठ पत्रकार अवधेश नौटियाल ने संभाली।

वरिष्ठ पत्रकार अवधेश नौटियाल ने इस दौरान सभी पत्रकारों के कार्यक्रम में शिरकत करने पर उनका आभार प्रकट करते हुए कहा कि मैं या मेरे साथ पत्रकारिता शुरू करने वाले मित्र उस दौर में पत्रकारिता के क्षेत्र में आये जब प्रिंट व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में तेजी से टेक्नोलॉजी ने दखल देनी शुरू कर दी थी। अखबारों के श्याम श्वेत पृष्ठों पर जहाँ रंगीनियों के हर्फ चढ़ने शुरू हो थे वहीं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में कई व्यवसायिक घराने कूद चुके थे। दूसरी ओर मोबाइल क्रांति की शुरुआत हो चुकी थी व न्यूज़ व्यूज का दृष्टिकोण बदलना प्रारम्भ हो चुका था। 2006 से वर्तमान तक न जाने हिंदी पत्रकारिता में कितने परिवर्तन हमें दिखाई दिए।

उन्होंने कहा कि इसे जहाँ हम सूचना क्रांति व टेक्नोलॉजी का स्वर्णिम दौर कह सकते हैं वहीं पत्रकारिता के पठन पाठन से लेकर उसके न्यूज़ सेंस का संक्रमित दौर भी शुरू हुआ क्योंकि जहाँ मीडिया के पुराने धुरंधरों के लिए नई टेक्नोलॉजी ने चुनौती पैदा कर दी थी वहीं नई पौध के पत्रकारों ने इसे हल्के में लेना शुरू कर दिया। तथ्यों तर्कों व खोजबीन की पत्रकारिता ने लोकसमाज लोक संस्कृति के बहुमूल्यों रूपों के स्थान पर करंट अफेयर उठाना शुरू कर दिया जिस से टीआरपी की दौड़ की भगदड़ सी मचने लगी। उम्मीद है इस दौड़ में जल्दी ठहराव आएगा।

इस मौके पर वरिष्ठ पत्रकार मनोज इष्टवाल, चंदन एस कैंतुरा, प्रेम पंचोली, राकेश बिजल्वाण, आलोक शर्मा, अमित अमोली, घनश्याम जोशी, आशीष नेगी, रमन जायसवाल, हरीश कंडवाल, जगमोहन मौर्य, आकश गौड़, अरूण पांडेय, विकास कपरुवान, अमित रतूड़ी, दिनेश रावत, मोहन पुरोहित व अवधेश नौटियाल ने शिरकत की।

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35 बर्षों से पत्रकारिता के प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक व सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक, धार्मिक, पर्यटन, धर्म-संस्कृति सहित तमाम उन मुद्दों को बेबाकी से उठाना जो विश्व भर में लोक समाज, लोक संस्कृति व आम जनमानस के लिए लाभप्रद हो व हर उस सकारात्मक पहलु की बात करना जो सर्व जन सुखाय: सर्व जन हिताय हो.
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