Monday, June 24, 2024
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अनेक बेनाम हैं जिनकी बिटियाओं का विवाह मुस्लिम युवकों से हो रहे है।

अनेक बेनाम हैं जिनकी बिटियाओं का विवाह मुस्लिम युवकों से हो रहे है।

(भारत चौहान )

अनेक बेनाम हैं जिनकी बिटियाओं का विवाह मुस्लिम युवकों से हो रहे है
सोशल मीडिया में पौड़ी निवासी पूर्व विधायक यशपाल बेनाम की बिटिया के विवाह का जो कार्ड सार्वजनिक हो रहा है उस पर एक दूरभाष नंबर लिखा है। मैंने सत्यता जानने के लिए उस नंबर पर फोन किया और उधर से आवाज आई कि “मैं यशपाल बेनाम बोल रहा हूं” और मेरी बिटिया और मुस्लिम युवक साथ में सर्विस करते हैं और उन दोनों की आपसी सहमति से यह विवाह सुनिश्चित हुआ है।

विगत वर्ष पौड़ी जनपद से एक आंकड़ा यह भी आया था कि ईद के दिन ब्राह्मण, बनिया, क्षत्रिय एवं विभिन्न हिंदू जातियों की 32 बेटियों ने मुस्लिम युवकों से विवाह के लिए रोजा रखा था। और आज यह आंकड़े रिश्तेदारी में तब्दील हो रहे हैं।

यशपाल बेनाम की बिटिया के विवाह का यह पत्र सार्वजनिक हुआ है इसलिए पहाड़ के निवासियों और हिंदुओं की उग्र प्रतिक्रिया होनी स्वाभाविक है, परंतु हर रोज हिंदुओं की बेटियों के नैतिक व अनैतिक विवाह मुस्लिम युवकों से हो रहे हैं। मां-बाप कहीं विवश है तो कहीं अनजान है।

निरंतर पहाड़ पर मुस्लिमों की गतिविधियां बढ़ रही हैं। केदारनाथ मंदिर के आंगन में नमाज पढ़ी जा रही है। आए दिन लव जिहाद और लेड जेहाद की घटनाएं सारे आम हो रही है। हिंदुओं के पवित्र स्थान हरिद्वार में आज मुस्लिम जनसंख्या आधे पर पहुंच गई है।

ऐसे में अपने धर्म, अपनी संतानो, अपनी जन्मभूमि, अपने व्यवसाय व अपने मंदिरों को बचाये रखना एक चुनौती हैl परन्तु अक्सर देखा गया है जहां आपसी सहमति हो जाती है वहां क्षेत्रीयता, जातीयता, धर्म, ऊंच-नीच, पहाड़ मैदान की सीमाएं उसे खत्म कर दी जाती है और इसी का शिकार मासूम बेटियां हो रही हैं। विगत दिनों द केरल स्टोरी फिल्म देखने का मौका मिला। सत्य पर आधारित अनेक ऐसी घटना है जिसमें प्रेम के जाल में फंसा कर हिंदू लड़कियों के साथ क्रूरता, अमानवीय व्यवहार की सीमाएं पार हो जाती है।

प्रेम जाल और धर्म की कट्टारता में फंसी हुई लड़कियां जब वापस आना चाहती है तब बहुत देर हो चुकी होती है। तब उन्हें न हिंदू परिवार स्वीकार करता है और न वह उस काल कोठरी से बहार आ सकती है। और फिर उन लड़कियों के सामने दो ही रास्ते बचते हैं या तो असंख्य आतंकवादियों के साथ दिन रात अपना शारीरिक शोषण करवाती रहे या मानव बम बनकर काफिरों (गैर मुस्लिमों) पर बरस पड़े। यह मात्र पौड़ी की घटना नहीं है अपितु हाल ही में विकासनगर जीवनगढ़ में इस प्रकार की घटना सामने आई है।

आवश्यकता है समय रहते हुए सचेत होने की। अपने जल, जंगल और जमीन को बचाने की। अन्यथा आज सिर्फ एक बेनाम की बेटी के विवाह का निमंत्रण कार्ड प्राप्त हुआ है, कल अनेक नाम वालों की बेटियों के विवाह के निमंत्रण भी आपको प्राप्त होगे।

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35 बर्षों से पत्रकारिता के प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक व सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक, धार्मिक, पर्यटन, धर्म-संस्कृति सहित तमाम उन मुद्दों को बेबाकी से उठाना जो विश्व भर में लोक समाज, लोक संस्कृति व आम जनमानस के लिए लाभप्रद हो व हर उस सकारात्मक पहलु की बात करना जो सर्व जन सुखाय: सर्व जन हिताय हो.
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