Wednesday, March 11, 2026
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श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय के कुलसचिव का पद हुआ रिक्त कुलपति ने शासन को लिखा पत्र। नियमों को ताक में रखने वाले कुलसचिव के पिछले 09 साल के कार्यो की होगी जांच।

श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय में कार्यरत रहे सुधीर बुडाकोटी के विरूद्ध जांच करवाने हेतु विश्वविद्यालय के कुलपति डा0 पीताम्बर प्रसाद ध्यानी ने प्रमुख सचिव को भेजा पत्र।

क्या है पूरा मामला।

बताते चलें कि सुधीर बुडाकोटी, द्वारा श्री देव सुमन उत्तराखण्ड विश्वविद्यालय में बिना कुलपति के अनुमोदन के उपकुलसचिव दिनेश चन्द्रा से पत्र जारी करवाकर दिनांक 02.12.2020 को कुलसचिव के पद पर कार्यभार ग्रहण किया गया। कार्यभार ग्रहण करने के बाद बिना कुलपति को बताये हुये मुख्यालय छोड गये। जिस पर कुलपति द्वारा खेद व्यक्त करते हुये सुधीर बुडाकोटी को 02 दिन के अन्दर विश्वविद्यालय में उपस्थित होने तथा ऐसा उनके द्वारा क्यों किया गया इस पर स्पष्टीकरण प्रस्तुत के आदेश पारित किये गये। किन्तु बुडाकोटी द्वारा किसी भी प्रकार से अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत नही किया गया। विश्वविद्यालय कुलपति के नियंत्रणाधीन न होकर प्रत्यक्षरूप से शासन के प्रतिनिधि के रूप में स्वतंत्र इकाई के रूप में क्रियाशील हैं, जो कि विश्वविद्यालय अधिनियम और परिनियम की मूल भावनाओं के विपरीत और अवेहलना है। विश्वविद्यालय में कुलसचिव के पद पर कार्यरत रहे सुधीर बुडाकोटी 05 माह के लिये उच्च शिक्षा मंत्री के यहां भी सम्बद्ध रहे।

श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय के उपकुलसचिव दिनेश चन्द्रा द्वारा दिनांक 02 दिसम्बर, 2020 को बिना कुलपति के अनुमोदन के सुधीर बुडाकोटी को कुलसचिव के पद पर कार्यभार ग्रहण करवाया गया। सूत्रों की बात मानी जाय तो कुलपति ने इस सम्बन्ध में भी जांच के आदेश पारित किये गये । कुलपति की सत्यनिष्ठा एंव ईमानदारी के बावजूद भी अधिकारी सुधरने का नाम नही ले रहे है। इस का कारण है कि कुलपति द्वारा शासन स्तर पर जंाच करवाये जाने के लिये शासन को पत्र प्रेषित किया गया है। सुधीर बुडाकोटी श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय में वर्ष 2011 मे भी कार्यरत रहे हैं, 2011 में भी कई वित्तीय मामलों में कुलसचिव द्वारा सीधे अपने स्तर पर अहम वित्तीय निर्णय लिये गये जो कि नियमानुकुल सही नही हैं।

हाल ही में दिनेश चन्द्रा उपकुलसचिव द्वारा जारी आदेश के क्रम में कुलसचिव से विभागीय वाहन मुख्यालय में तत्काल वापस मंगवाया गया तथा विश्वविद्यालय से सम्बद्ध राजकीय महाविद्यालयों एवं स्व वित्त पोषित संस्थानों के निरीक्षण तथा विश्वविद्यालय से सम्बन्धित राजकीय कार्यो में भी प्रतिबन्धित किया गया।

अब देखना होगा कि क्या कुलपति द्वारा दी गयी संस्तुति के आधार पर 09 वर्ष पुराने प्रकरण पर, कर्मचारी आचरण नियमावली का उल्लंघन करने या फिर बिना कुलपति के अनुमोदन पर कुलपति की अनुपस्थिति में नियुक्त कराये गये कुलसचिव प्रकरण पर शासन क्या जांच करवाता है ।

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