Tuesday, March 17, 2026
Homeलोक कला-संस्कृतिअध्यापिका रिद्धि भट्ट के प्रयास 'फुलदेई' को क्षेत्र में मिली सराहना।

अध्यापिका रिद्धि भट्ट के प्रयास ‘फुलदेई’ को क्षेत्र में मिली सराहना।

(मनोज इष्टवाल)

सच कहूं… तो मेरा मानना भी यही है कि जब तक हम अपनी सांस्कृतिक परम्पराओं, लोक धरोहरों व लोक पर्व/उत्सवों को अपने प्रारम्भिक स्कूल एजुकेशन से नहीं जोड़ते तब तक हम अपने वृहद लोक समाज व लोक संस्कृति के उन छिटक चुके आयामों को अपने आप में अंगीकार करने में सक्षम नहीं हो सकते, क्योंकि पलायन की अंधी दौड़, वर्तमान के भौतिक सुख संसाधनों ने जहाँ एक ओर हमारे ग्रामीण समाज या कहें ग्रामीण भारत की नींव हिला दी है, वहीं दूसरी ओर खेत, खलिहान, गाँव, मकानों के बंजरों और खंडहरों ने हमसे हमारी लोक व सांस्कृतिक विरासत भी छीन ली है।

आप सच बताएं कि हम अपने लोकगीत व लोकनृत्यों जिन्हें सांस्कृतिक मंचों पर देखते हैं, क्या उन्हें अपने आप में अंगीकार कर रहे हैं? आप के हृदय से एक ही आवाज निकलेगी देखते हैं, ताली भी बजाते हैं लेकिन घर लौटते ही भूल जाते हैं।

ऐसे में राजकीय प्राथमिक विद्यालय द्वारीखाल की अध्यापिका रिद्धि भट्ट ने बसंत आगमन के प्रतीक लोक पर्व ‘फुलदेई’ के प्रति अपनी स्कूल के मुट्ठी भर छात्र-छात्राओं के मध्य वह ललक पैदा की ताकि वह फुलदेई पर्व को लोक महत्व को समझ सकें। उन्होंने न सिर्फ फुलदेई लोकपर्व पर द्वारीखाल स्कूल में कार्यक्रम आयोजित किया अपितु छात्र-छात्राओं को ‘फूलदेई’ पर्व क्यों मनाया जाता है उससे संबधित लोक कथाओं की भी जानकारी दी। छात्र-छात्रों ने फुलदेई पर देहरियों में फूल डाले और खूब नृत्य भी किया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार रा० प्रा० वि० द्वारीखाल में नववर्ष के आगमन का प्रतीक फूलदेई (फुलारी) पर्व धूमधाम से मनाया गया। बच्चों ने द्वारीखाल कस्बे के समस्त घरों एवं संस्थानों की देहरियों में फूल डालकर सुख समृ‌द्धि की मंगलकामना की तथा फुलारी गीत गाये।

नन्हें बच्चे जब ढोल-दमौ की थाप पर गीत गाते हुए फूलों की टोकरियों हाथ में लिए लोगों का मन मोह रहे थे। “फूल फुल्यां छन आवा फुलारी-देल्यू में जौला बारी-बारी” गाते हुए हर देहरी पर कूल डालते हुए बच्चे बसंत के आगमन पर प्रफुल्लित थे।

कस्बे वासियों ने भी बच्चों का खूब उत्साह‌वर्धन किया तथा फल, मिठाई, टॉफी, बिस्कुट, रुपये से भेंट स्वरूप दिये। लोगों ने कहा कि यह सांस्कृतिक जिसे वि‌द्यालय ने पर्व कहीं लुप्त हो गया था पुनर्जीवित किया है।

मुजफ्फरनगर से कलोड़ी के बलिदानी स्व. बीरेन्द्र सिंह नेगी के परिजनों, श्री नत्थी सिंह राणा एवं शोभा राणा ने इस उपलक्ष में बच्चों के लिए कपड़े एवं मिठाइयाँ भेजी थीं। खंड शिक्षा अधिकारी डा. सुरेंद्र सिंह ने , क्षेत्र पंचायत सदस्य अर्जुन सिंह, सिंह, पूर्व BDC. राजेमोहन सिंह व अनिल सिंह, करन सिंह, रविन्द्र सिंह, रजनी देवी, दीपक कुमार, नीरज कुमार (SBI) पंकज सिंह समस्त द्वारीखाल वासियों ने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

इस दौरान सुनील सिंह, रविन्द्र भारद्वाज, मंजू रावत, मधु नौटियाल, पंकज तोमर, प्रियंका, पूजा, अजय कण्डवाल, सूचना रानी, विनीता नेगी इत्यादि ने भी कार्यक्रम में शिरकत की।

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35 बर्षों से पत्रकारिता के प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक व सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक, धार्मिक, पर्यटन, धर्म-संस्कृति सहित तमाम उन मुद्दों को बेबाकी से उठाना जो विश्व भर में लोक समाज, लोक संस्कृति व आम जनमानस के लिए लाभप्रद हो व हर उस सकारात्मक पहलु की बात करना जो सर्व जन सुखाय: सर्व जन हिताय हो.
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