(मनोज इष्टवाल)
1996 से लगातार साये की तरह डॉ हरक सिंह रावत के हर सुख दुःख के साथी रहे विनोद रावत पर भाजपा कोटद्वार विधान सभा सीट से दांव खेल सकती है। सूत्रों की माने तो विनोद रावत भाजपा हाई कमान को कोटद्वार से डॉ हरक सिंह रावत का बेहतर विकल्प दिखाई दे रहे हैं । वहीं छनकर यह बात भी सामने आ रही है कि प्रदेश पार्टी अध्यक्ष मदन कौशिक व पूर्व मुख्य
ज्ञात हो कि 1991 में कोटद्वार डिग्री कॉलेज के अध्यक्ष का चुनाव जीतने के बाद से अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के माध्यम से राजनीति में दखल रखने वाले विनोद रावत नब्बे के दशक में मनोहर कांत ध्यानी को लोकसभा सांसद व पुनः पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद खंडूरी को लोकसभा सांसद का चुनाव लड़वाने के बाद 1993 में डॉ हरक सिंह रावत के साथ दोस्ती निभाते हुए बसपा में शामिल हुए व उन्ही के साथ कांग्रेस व पुनः भाजपा में शामिल हुए। उन्हें डॉ हरक सिंह रावत का राइट हैंड समझा जाता था और जब जब विनोद रावत उनके साथ रहे वे उनकी रणनीति के आधार पर चुनाव जीतते रहे। फिर चाहे वह लैंसडाउन विधान सभा हो या रुद्रप्रयाग..! या फिर कोटद्वार विधान सभा। हर जगह विनोद रावत उनके लिये संकट मोचक साबित हुए।
वहीं सूत्रों का कहना यह भी है कि विनोद रावत व डॉ हरक सिंह रावत के संबंधो में तल्खी तब आनी शुरू हुई जब लाख समझाने के बावजूद भी हरक सिंह रावत ने कुछ महिलाओं पर पार्टी कार्यकर्ताओं से ज्यादा विश्वास करना शुरू कर दिया व उन जैसे कई अन्य करीबियों से दूरियां बनानी शुरू कर दी। नतीजा यह हुआ कि धीरे-धीरे हरक सिंह रावत के सब नजदीकियों ने स्वयं हरक सिंह रावत से दूरियां बनानी शुरू कर दिया और आज जब नेता जी को सबकी आवश्यकता थी, नेताजी अकेले पड़ गए।
विनोद रावत का पार्टी के प्रति डेडिकेशन व कर्तब्य परायणता ही उन्हें टिकट बंटवारे प्रथम पांत में शामिल कर रही है।
