Monday, June 24, 2024
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अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाने में कामयाब रही पहली महिला विधान सभा अध्यक्षा ऋतु खण्डूरी। बेहद अनुशासित ढंग से चला ले गयी सदन।

◆ हंगामे व बहिष्कार के बीच धामी सरकार का 65 हजार करोड़ का बजट पारित सत्र अनिश्चितकाल तक स्थगित।

◆ यह मेरा लर्निंग सत्र था। हर रोज व्यक्ति सीखता है, नए विधायक अच्छा बोले- ऋतु खण्डूरी।

(मनोज इष्टवाल)

यह यकीनन एक महिला विधायक के लिए जरा मुश्किल भरी डगर कही जा सकती थी। मुश्किल भरी इसलिए भी क्योंकि उनका राजनीतिक अनुभव मात्र 05 बर्ष का ही था। भले ही वह राजनीतिक घराने से तालुकात रखती रहीं हो लेकिन विगत 05 बर्ष पूर्व विधायक बनना और फिर एकाएक विधान सभा अध्यक्षा का पद भार सम्भालना किसी जोखिम भरे काम से कम न था। 

कोटद्वार से चुनाव जीतने के बाद उत्तराखंड विधानसभा की स्पीकर बनीं ऋतु खंडूड़ी की भी यह पहली बड़ी परीक्षा थी। लेकिन लगता है सदन की गरिमामय कुर्सी पर विराजमान होने से पहले उन्होंने अपने आप को मानसिक रूप से मजबूत करने के लिए पूरी तैयारी की हुई थी। पूर्व विधान सभा अध्यक्ष प्रेम चंद अग्रवाल से बजट सत्र शुरू होने से पूर्व मंत्रणा करना व उन फोटोज को अपने फेसबुक पर सार्वजनिक करना यह उनके व्यक्तित्व को निखार ही गया और सबसे बड़ी बात यह कि बहुत सहजता से यह भी स्वीकार कर लेना कि बतौर विधान सभा अध्यक्षा उनका यह लर्निंग सेशन था व हर रोज व्यक्ति कुछ न कुछ सीखता ही है, उन्हें भी काफी कुछ नया सीखने को मिला। पक्ष व प्रतिपक्ष के विधायकों की प्रशंसा करना इत्यादि यह साबित करता है कि वह जो भी बात रखती हैं वह बेहद बेबाकी व बिना दुराव-छिपाव व राजनीति के सबके समुख रख देती हैं। शायद यही उन्हें उनके आदर्शों के साथ आगे बढ़ाने का एक मूल मंत्र भी है।

यह देखना काफी सुखद रहा कि ऋतु खण्डूरी बजट सत्र चलाने जैसी चुनौतियों का बखूबी सामना कर सदन को अनुशासित ढंग से चला ले गयीं। सदन में उनके कड़क तेवर भी दिखे तो बीच-बीच में जरूरत अनुसार हंसकर उन्होंने माहौल को सहज भी किया। विपक्ष द्वारा बजट लीक व कार्य मन्त्रणा समिति की बैठक के एजेंडे को लेकर मुखर हुए नेता प्रतिपक्ष आर्य व प्रीतम सिंह को भी संतुष्ट करना भी उनकी कार्यकुशलता को दर्शाता है। यही नहीं उन्होंने सदन में हर सम्भव यह प्रयास किया कि विधायकों को भी अपनी बात रखने का मौका दिया जाय ताकि वे अपनी विधान सभा से सम्बंधित सभी बातें सदन के पटल पर रख सकें। व उनकी यह भी पूरी-पूरी कोशिश रही कि बहुत ढील भी नहीं दी जाय। विपक्ष की मांग स्वीकार कर विकास प्राधिकरण समेत अन्य मुद्दों पर नियम 58 में चर्चा की अनुमति भी दी। यह देखना काफी संतोष जनक रहा कि विधान सभा अध्यक्षा ऋतु खंडूड़ी पूरे चार दिन आत्मविश्वास से लबरेज दिखीं। व उनका आत्मबल उनके चेहरे पर झलकता दिखाई दिया।

उम्मीद तो यह भी थी कि हो न हो बजट सत्र आगामी सोमवार तक टल जाय लेकिन उत्तराखंड की पांचवी विधानसभा का चार दिवसीय बजट सत्र आज अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो गया है। सदन समाप्ति के बाद विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण ने विपक्ष एवं पक्ष के सभी सदस्यों को सहयोग के लिए धन्यवाद दिया है। विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि प्रदेशहित एवं जनहित के अनेक विषयों पर सदन में दोनों दलों द्वारा शांति पूर्वक गंभीर चिंतन-मनन किया गया चार दिवसीय बजट सत्र की कार्यवाही 22 घंटे 43 मिनट तक चली। चार विधेयक पास हुए और तीन प्रतिवेदन सदन के पटल पर रखे गए।

सत्र के दौरान विधान सभा को 573 प्रश्न प्राप्त हुए, जिसमें स्वीकार 14 अल्पसूचित प्रश्न में 4 उत्तरित, 190 तारांकित प्रश्न में 61 उत्तरित, 339 आताराकिंत प्रश्न में 165 उत्तरित, कुल 17 प्रश्न अस्वीकार एवं 3 विचाराधीन रखे गए। 9 याचिकाओं में से सभी याचिका स्वीकृत की गई।

नियम 300 में प्राप्त 76 सूचनाओं में से 21 सूचनाएं स्वीकृत, 26 सूचनाएं ध्यानाकर्षण के लिए, नियम-53 में 54 सूचनाओं में 6 स्वीकृत एवं 20 ध्यानाकर्षण के लिए रखी गई। नियम-58 में प्राप्त 32 सूचनाओं में 14 को स्वीकृत किया गया, नियम-310 में 4 सूचना प्राप्त हुई, जो कि नियम 58 में परिवर्तित की गई।

इस दौरान निम्न विधेयक भी  सदन के पटल पर रखे गए जिनमें उत्तराखण्ड विनियोग विधेयक, 2022उत्तराखण्ड (उत्तर प्रदेश जमींदारी विनाश और भूमि व्यवस्था अधिनियम, 1950) (संशोधन) विधेयक, 2022उत्तराखण्ड अग्निशमन एवं आपात सेवा, अग्नि निवारण और अग्नि सुरक्षा (संशोधन) विधेयक, 2022उत्तराखण्ड उद्यम एकल खिड़की सुगमता और अनुज्ञापन (संशोधन) विधेयक- 2022 शामिल हैं।

साथ ही  निम्न प्रतिवेदन प्रतिवेदन भी पटल में रखे गए जिनमें आर्थिक सर्वेक्षण उत्तराखण्ड, वर्ष 2021- 22 खण्ड-1उत्तराखण्ड मानव अधिकार आयोग द्वारा प्रस्तुत वार्षिक/विशेष रिपोर्ट, 2012-18 एवं 2018-19महालेखापरीक्षक द्वारा प्रस्तुत उत्तराखण्ड सरकार के 31 मार्च, 2021 को समाप्त हुए वर्ष के लिए राज्य के वित्त पर लेखापरीक्षा प्रतिवेदन संख्या-1 वर्ष 2022, 4.उत्तराखण्ड लोक सेवा आयोग का बीसवां वार्षिक प्रतिवदेन ( अवधि 01 अप्रैल, 2020 से 31 मार्च, 2021 तक)उत्तराखण्ड राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग 2005 की धारा 16 (2) के अन्तर्गत वर्ष 2017-18, वर्ष 2018-19 एवं वर्ष 2019-20 की वार्षिक रिपोर्ट इत्यादि शामिल हैं।

बहरहाल प्रदेश की पांचवीं सरकार का  04 दिवसीय बजट सत्र जिस कार्यकुशलता के साथ पहली महिला विधान सभा अध्यक्षा द्वारा चलाया गया उसकी पक्ष व विपक्ष के नेताओं ने खुलेमन से प्रशंसा की। ज्यादात्तर का कहना यह था कि कम राजनीतिक अनुभव के बावजूद ऋतु खण्डूरी अध्यक्षीय कुर्सी को बखूबी सम्भाल गयी।

 

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