Monday, June 24, 2024
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पुरातन सनातन हिन्दू संस्कृति पर लगा प्रश्न चिह्न। वैदिक कालीन सभ्यता के धोत्तक कण्वाश्रम ऋषि मन्दिर में फैंके शरारती तत्वों ने जूते-चप्पल।

पुरातन सनातन हिन्दू संस्कृति पर लगा प्रश्न चिह्न। वैदिक कालीन सभ्यता के धोत्तक कण्वाश्रम ऋषि मन्दिर में फैंके शरारती तत्वों ने जूते-चप्पल।

(मनोज इष्टवाल)

अब जब कोई ऋषिकुल सभ्यता मजनुओं के सैर सपाटे का स्थान व बेबड़ों के लिए मदिरालय बन जाय तो कहा क्या जा सकता है। विगत रात्रि कण्वाश्रम ऋषि मन्दिर में घुसकर शरारती तत्वों ने ऋषि मूर्तियों पर जूते चप्पल दे फैंके। जिसकी जानकारी सुबह जब लोगों को मिली तो पूरे क्षेत्र में आग की तरह खबर फैल गयी।

इतनी बड़ी घटना को अंजाम किसने व कब दिया किसी को फिलहाल जानकारी नहीं है लेकिन मालन घाटी के दोनों छोरों पर अवस्थित भाबर क्षेत्रवासियों में इस शर्मसार कर देने वाली घटना के बाद बेहद रोष ब्याप्त है। कण्वाश्रम, लछमपुर, भीमसिंहपुर, कलालघाटी से लेकर जसोधरपुर-किशनपुरी-सिगड़ी तक मवाकोट से लेकर मोटाढाक दुर्गापुरी तक जिसके मुंह सुनो यह घटना बेहद वायरल हो रही है व पूरा जन समुदाय गुस्से में है।

घटनाक्रम की जानकारी देते हुए मयंक कोठारी बताते हैं कि विगत रात्रि किसी नीच प्रवृत्ति के लोगों द्वारा ऐसे दुष्कृत्य को अंजाम दिया गया। जिससे क्षेत्रवासियों में रोष है, व आज कई क्षेत्रीय सामाजिक संगठन इस बारे में एसडीएम से मिलकर अपनी बात रखेंगे व साथ ही मन्दिर परिसर में सीसीटीवी कैमरे लगाने की मांग व पुलिस गश्त लगाने की मांग करेंगे । वरना यह क्षेत्र वर्तमान में मौज मस्ती के लिए हो गया है। साल में एक बार यहां जलेबी पकोड़ी मेला लगता है और इतिश्री हो जाती है।

विश्व हिंदू संगठन के पूर्व जिला प्रचार मंत्री संजय थपलियाल इस घटना पर कहते हैं कि इसके जिम्मेदार स्थानीय नागरिक है जो केवल पैसा कमाना और खाना जानते हैं और अपने परिवार के लिए ही उनके जीवन का अर्थ है सामाजिक जीवन में वह उतरना ही नहीं चाहते हैं वरना ऐसी क्या कौन सी वजह थी जो कण्व आश्रम लड़कियां घुमाने की जगह बन कर रह गया है एवं शाम को 5:00 बजे के बाद वहां पर पीने की व्यवस्था के लिए ही लोग जाते हैं जिस प्रकार से महिला मंगल दल के द्वारा बहुत से सार्थक काम किए गए हैं पुरुष समाज तू नपुंसक हो चुका है मेरी मातृ शक्ति से निवेदन है रहेगा कि आप लोग उठकर 1 घंटे के लिए प्रत्येक महिला जो कि स्थानीय है वाह जिम्मेदारी उठाएं और आगे बढ़ कर सकारात्मक कार्य करें पुरुषों से अपेक्षा करना सबसे बड़ी मूर्खता वाला कार्य रहेगा मैं खुद पुरुषों का यह बात कह रहा हूं।

वहीं क्षेत्रीय समाजसेवी इंदु डबराल नौटियाल इस घटना को बेहद निंदनीय करार देते हुए कहती हैं कि यह इस क्षेत्र के लिए शर्मसार कर देने वाली घटना है। जिस तरह आये दिन कण्वाश्रम में अराजक तत्वों की कारगुजारियाँ दिखाई दे रही हैं वह बेहद चिंताजनक है। विगत रात्रि जिस तरह ऋषि मन्दिर में घटना को अंजाम दिया गया वह किसी सोची समझी साजिश का हिस्सा है।

सम्राट भरत जन्मस्थली के संयोजक व वरिष्ठ अधिवक्ता अमित सजवाण का कहना है कि गंगा नदी से भी ज्यादा पुरातन व गंगा नदी जैसी ही पवित्र नदी मालिनी की गोद में बसे कण्वाश्रम की जो दुर्गति हो रही है, वह हम सबके लिए बेहद चिंतनीय है। यह क्षेत्र सिर्फ शराबी जुआरियों का अड्डा व नवयुवक-नवयुवतियों का पिकनिक स्पॉट बन गया है। मालन नदी तट सिर्फ बकरा-मुर्गा खाने का अड्डा बना हुआ है। किसी को भी इसकी धर्म संस्कृति या सांस्कृतिक महत्व का बोध नहीं है। आये दिन यहां नई नई घटनाएं सुनाई देती हैं। हमने यहां कई बार इस नदी घाटी सभ्यता सम्बन्धी बोर्ड भी लगवाए लेकिन सब निरर्थक ही साबित हुए हैं। वह दिन दूर नहीं जब इस शान्त क्षेत्र को अशांत करने के लिए अराजक तत्व सक्रियता से काम करना शुरू कर देंगे। ऋषि मन्दिर में जूते चप्पल फैंककर ये लोग यह जाहिर करवा भी चुके हैं। शायद ऐसे लोग ऐसे दुष्कर्म कर यह जानना चाह रहे हों कि यह सोया समाज अभी तक सोया है कि जाग गया है। यह बेहद निंदनीय कृत्य है इसकी जितनी निंदा की जाय वह कम है।

कुमाऊँ के परिधानों पर काम करने वाली समाजसेवी मनोरमा मुक्ति इस घटना पर कहती हैं कि “आप जैसे सनातन धर्म के ध्वजवाहक लोग जिस तरह से लोगों को जागृत करने का कार्य कर रहे हैं और बहुत ही सराहनीय है ,आपकी पहुंच भी बहुत सारे लोगों तक है विशेष तौर पर इस समय सत्ता में बैठी हुई भारतीय जनता पार्टी की सरकार बिना किसी धार्मिक भेदभाव के वह प्रत्येक वर्ग को समान अधिकार दे रहे हैं और हमारे ऐतिहासिक और प्राचीन पौराणिक स्थलों के लिए कार्य किया जा रहा है ऐसे में कारण यह आश्रम जो कि कोटद्वार की पहचान है उसमें इस तरह की घटना निंदनीय तो है ही साथ ही इसके लिए सरकार को का ध्यान आकर्षण करने का कार्य ही आप को प्रमुखता से निभाना होगा क्योंकि आप जैसे लोग ही समाज के लिए गुप्त रूप से पत्रकारिता के साथ-साथ बहुत सारे कार्य कर रहे हैं, ऐसे कार्य जहां तक सत्ता में बैठे हुए दलों का ध्यान मुश्किल से जा पाता है क्योंकि सत्ता में बैठे हुए लोगों के पास बहुत सारे कार्य होते हैं और धरातलीय स्थिति क्या है उसके लिए उन्हें आप जैसे सच्चे लोगों की आवश्यकता होती है, अतः आपसे आशा करती हूं कि इस मामले को आगे तक पहुंचाएंगे और साथ ही इस मंदिर परिसर और पौराणिक स्थल की सुरक्षा हेतु जल्द से जल्द कदम उठाने में आपका सराहनीय योगदान होगा।”

वहीं कण्वाश्रम समिति के सीपी नैथानी का मानना है कि शरारत शरारती तत्व कर जाते हैं और बेवजह अंगुलियां कण्वाश्रम समिति पर लोग उठाने लगते हैं, यह स्वस्थ परम्परा नहीं है। ऋषि मन्दिर की घटना का जैसे ही कमांडर रावत जो कि समिति के अध्यक्ष हैं उन्हें ज्ञान हुआ वे फौरन वहां पहुंचे। उन्होंने कहा यह घटना यकीनन निंदनीय है। इससे पहले भी छोटी बड़ी घटनाएं वहां घटित होती रही हैं जैसे दान पात्र में पानी डाल देना इत्यादि। उन्होंने कहा आज समिति के सदस्य इस बारे में कमांडर रावत व श्रीमति आभा डबराल के नेतृत्व में एसडीएम से मिलने जा रहे हैं । उन्होंने कहा कि विगत 3 अप्रैल 2022 को विधान सभा अध्यक्ष व क्षेत्रीय विधायक ऋतु खण्डूरी स्वयं यहां भ्रमण पर आई थी व उन्होंने मन्दिर परिसर मवन सीसीटीवी कैमरे लगवाने की बात कही थी जो वर्तमान तक नहीं लग पाया है।

गुरुकुल कण्वाश्रम के ब्रह्मचारी विश्वपाल जयंत ने बातचीत में कहा कि यह बेहद निंदनीय घटना है। हम कई बार अनुरोध भी कर चुके नहीं कि इस पावन धरती को शराबी-कबाबी जुआरियों से मुक्त करने के लिए कण्वाश्रम क्षेत्र में पुलिस चौकी खुले व  कण्वाश्रम 5 किमी. क्षेत्र तक पूरी तरह से शराब व मांस बर्जित हो। इस घटना का पुलिस प्रशासन व जिला प्रशासन शीघ्र संज्ञान ले व ऐसे अराजक तत्वों की गिरफ्तारी कर सख्त से सख्त दंड का प्राविधान रखे।

कण्वाश्रम समिति की महामंत्री श्रीमती आभा डबराल ने इस घटना पर प्रतिक्रिया ब्यक्त करते हुए कहा कि कालांतर में छोटी-बड़ी घटनाओं की हमने पुलिस रिपोर्ट दर्ज की है, पुलिस छानबीन करके इतिश्री कर देती हैं। कई बार दानपात्र तोड़ा गया है। इस मंदिर के वर्तमान केयर टेकर बीमार पड़े हुए हैं, इसी का फायदा उठाकर कुछ अराजक तत्व फिर ऐसी कुत्सित मानसिकता वाली गतिविधि को अंजाम दे गए हैं जो हम सबके लिए बेहद कष्टप्रद हैं। आज समिति इस मुद्दे पर बैठक करेगी व इस बिषय में कार्यवाही के लिए कदम उठाएगी।

समिति के ऊपर लगने वाले आरोपों को उन्होंने सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि समिति अपने कार्यकाल में वन विभाग से गुरुकुल कांगड़ी हरिद्वार ले जाई गयी 12 मूर्तियों को अपने संरक्षण में ले चुकी है। केंद्रीय पुरातत्व विभाग द्वारा हमारी समिति को लिखित दिया गया है कि कण्वाश्रम क्षेत्र में निकली/निकलने वाली पुरात्विक सामग्री (मूर्तियां इत्यादि) समिति के संरक्षण में रहेगी। उन्होंने कहा है कि वर्तमान में समिति के प्रयासों से ही देश के आइकोनिक स्थानों में 30 वें स्थान पर कण्वाश्रम है। यह हम सबके लिए गर्व की बात है। उन्होने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि इस क्षेत्र में शरारती तत्व कोई भी कार्य करता है तो कुछ लोग समिति को लपेटे में ले लेते हैं।

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35 बर्षों से पत्रकारिता के प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक व सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक, धार्मिक, पर्यटन, धर्म-संस्कृति सहित तमाम उन मुद्दों को बेबाकी से उठाना जो विश्व भर में लोक समाज, लोक संस्कृति व आम जनमानस के लिए लाभप्रद हो व हर उस सकारात्मक पहलु की बात करना जो सर्व जन सुखाय: सर्व जन हिताय हो.
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