Monday, June 24, 2024
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नर्सिंग के क्षेत्र में क्वालिटेटिव रिसर्च पूरे प्रदेश को एक नई दिशा देगा- डा विनीता शाह।

सीआईएमएस कॉलेज में क्वालिटेटिव नर्सिंग रिसर्च का दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का सफल समापन।

* सीआईएमएस कॉलेज में क्वालिटेटिव नर्सिंग रिसर्च का दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का सफल समापन।

देहरादून (हि. डिस्कवर)

नर्सिंग शिक्षक एसोशिएसन ऑफ इंडिया दिल्ली एनसीआर शाखा व सीआईएमएस कॉलेज ऑफ नर्सिंग कुंआवाला देहरादून द्वारा संयुक्त रूप से बियॉन्ड बॉर्डर एक्सप्लोरिंग क्वालिटीटेटिव रिसर्च मेथोडोलॉजी इन रियलिटी विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का आज सफल समापन हो गया है। उत्तराखण्ड में पहली बार आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन के समापन के अवसर पर उत्तराखण्ड बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. गीता खन्ना मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रही। सम्मेलन में स्वास्थ्य महानिदेशक उत्तराखण्ड डॉ. विनीता शाह अति विशिष्ट अतिथि एवं एम्स ऋषिकेश की निदेशिका डा मीनू सिंह अति के रूप में ऑनलाइन रूप से उपस्थित रही। यूसर्क की निदेशक अनीता रावत, स्वास्थ्य निदेशक डॉ. सुनीता चुफाल रतूड़ी, हेमवती नंदन बहुगुणा उत्तराखण्ड चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. हेम चन्द्र पांडे, यूकेपीएससी की पूर्व अध्यक्ष प्रो. जे. एम. एस. राणा अति विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में सीआईएमएस एंड यूआईएचएमटी ग्रुप ऑफ कॉलेज के चेयरमैन एडवोकेट ललित मोहन जोशी ने संस्थान में सभी अतिथियों का स्वागत किया और नर्सिंग शिक्षक एसोशिएसन को सम्मेलन के सफल आयोजन के लिए बधाई एवं शुभकामनाएं प्रेषित की।

कार्यक्रम के समापन के अवसर पर मुख्य अतिथि डॉ. गीता खन्ना ने दो दिवसीय सम्मेलन के सफल आयोजन के लिए नर्सिंग शिक्षक एसोशिएसन व सीआईएमएस कॉलेज को अपनी शुभकामनाएं दी। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि उत्तराखण्ड के लिए यह बहुत बड़ी उपलब्धि है। आज मेडिकल सुविधाओं का विस्तार हुआ, लेकिन इन सबमें क्वालिटी सर्विस ही हमारे नर्सिंग ही उपलब्ध कराते हैं, नर्सिंग एक अलग स्तर की कला है। हमारी एजुकेशन, ट्रेनिंग, मरीजों की देखभाल सभी जगह क्वालिटी कंट्रोल की जरूरत है, इस तरह का सम्मेलन एक शानदार पहल है, और इसके शानदार परिणाम सामने आएंगे।

वहीं स्वास्थ्य महानिदेशक उत्तराखण्ड डॉ. विनीता शाह ने उत्तराखण्ड में इस तरह की क्रांफ्रेस आयोजित करने के लिए नर्सिंग शिक्षक एसोशिएसन ऑफ इंडिया व सीआईएमएस कॉलेज को बधाई दी, उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि यह नर्सिंग की सेवा को विस्तार करने के लिए एक अच्छी पहल है, हमें क्वालिटेटिव रिसर्च की ओर जाना है जो आज के समय अनुसार बेहद आवश्यक है।
एम्स ऋषिकेश की निदेशिका डा० मीनू सिंह ने समापन समारोह में ऑनलाइन प्रतिभाग करते हुए सभी रिसर्च स्कॉलर को नर्सिंग के क्षेत्र में शोध कार्य को बढ़ावा देने के लिए बधाई दी और सीआईएमएस कॉलेज को उत्तराखंड पहली बार सफल राष्ट्रीय सम्मेलन करने हेतु अपनी शुभकामना प्रेषित की।

नर्सिंग शिक्षक एसोशिएसन ऑफ इंडिया दिल्ली एनसीआर शाखा की अध्यक्ष प्रो.डॉ पिटी कॉल ने बताया कि नर्सिंग शिक्षक एसोशिएसन ऑफ इंडिया एक रजिस्टर्ड गैर सरकारी संगठन है, जो कि कॉमनवेल्थ ऑफ नर्सिंग एसोसिएट यूके से सम्बद्ध है। एसोशिएसन की स्थापना 2019 में हुई और आज इसके सदस्यों की संख्या 500 से अधिक हो चुकी है। एसोशिएसन लगातार शिक्षा के संबंधित कार्यक्रम आयोजित करता है। नर्सिंग शिक्षकों की समस्याओं के समाधान हेतु एसोशिएसन कार्य करता रहा है।

सम्मेलन में रूपा रावत सिंघवी, डॉ. रिंपल शर्मा, डॉ. शशि मनवार, उर्मिला भारद्वाज, डॉ. मुनीरा काचरू द्वारा संक्षिप चर्चा की औऱ अपने अनुभवों को साझा किया। वहीं डॉ. लिली पोदार, प्रियंका जोशी, नीतू, तुंगछाबेनी जुंग, रिबाका, डॉ. रेनुका, दीया भारद्वाज ने पेपर प्रजेंटेशन के माध्यम से अपने अनुभव साझा किए।

कार्यक्रम में सीआईएमएस कॉलेज की प्रधानाचार्या डॉ. सुमन वशिष्ठ, उप प्रधानाचार्य रबीन्द्र कुमार झा, असिस्टेंट प्रोफेसर रंजीत कुमार झा, दीपिका विश्वास, रश्मि व्यास, दीक्षा रावत, शिवानी नौटियाल, नेहा पंवार, दीप्ति, रूपाली बिष्ट, सोनी रावत, शिप्रा, कंचन रावत, खुशबू बहुगुणा, पूजा, कार्यक्रम संचालक शिवानी बिष्ट सहित विभिन्न राज्यों के 300 से अधिक निदेशक, प्रिंसिपल नर्सिंग प्रोफेसर, शिक्षाविद ,छात्र-छात्राएं व सीआईएमएस कॉलेज के छात्र-छात्राएं एवं ऑनलाइन मॉड में 1000 से अधिक छात्र छात्रायें पूरे देश से उपस्थित रहे। संस्थान के विद्यार्थियों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्य से विभिन्न राज्यों से आए अतिथियों को उत्तराखण्ड की संस्कृति से रूबरू करवाया।

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35 बर्षों से पत्रकारिता के प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक व सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक, धार्मिक, पर्यटन, धर्म-संस्कृति सहित तमाम उन मुद्दों को बेबाकी से उठाना जो विश्व भर में लोक समाज, लोक संस्कृति व आम जनमानस के लिए लाभप्रद हो व हर उस सकारात्मक पहलु की बात करना जो सर्व जन सुखाय: सर्व जन हिताय हो.
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