Wednesday, March 11, 2026
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अब दुनिया भर के मार्केट में दिखेंगे हर्षिल के सेब। अडानी ग्रुप व ट्रूपिक कम्पनी ने दिखाई रुचि।

हर्षिल घाटी/उत्तरकाशी (हि. डिस्कवर)

यह वास्तव में सुखद अनुभूति है। स्वाभाविक भी है कि उत्तरकाशी जनपद के यमुना व गंगा घाटी के सेब काश्तकारों के चेहरे पर रौनक लौटी होगी। सेब जितना दिखने में खूबसूरत लगता है उतना ही अधिक उसे उगाने में भी मेहनत की आवश्यकता होती है। जितनी मेहनत उतनी अच्छी फसल भी।

इस बार हर्षिल घाटी में 16 किस्म के बेहतरीन सेबों की पैदावर भी जमकर हुई है। कल तक जो उत्तराखंड प्रदेश कश्मीर से आयात सेबों को खाया करता था अब वही उत्तराखंड अपने सेबों को विश्व भर के बड़े बाजार में बेचने जा रहा है। इस कार्य को करने के लिए अडानी ग्रुप ऑफ कम्पनीज व ट्रूपिक कम्पन

उत्तराखंड सहकारिता विभाग के अंतर्गत राज्य समेकित सहकारी विकास परियोजना के अधीन सेब फेडरेशन के कार्य जमीन पर दिखने लगे हैं।सेब के लिए मशहूर क्षेत्र उत्तरकाशी जनपद के हर्षिल में महत्वपूर्ण कोल्ड स्टोरेज को लेने की प्रक्रिया आरंभ हो गई है। इसमें सहकारिता मंत्री डॉ धन सिंह रावत, शासन सचिव श्री आर मीनाक्षी सुंदरम रुचि ले रहे हैं। इन्हीं के निर्देश पर सेब का काम गतिमान है। सेब उत्पादको को उचित मूल्य बाग में मिलने जा रहा है।

उत्तराखंड सेब उत्पादक एवं विपणन सहकारी संघ के सचिव विपिन पैन्यूली की अगुवाई मैं गुड़गांव से आई ट्रुपिक कंपनी के साथ झाला कोल्ड स्टोरेज का निरीक्षण एवं ट्रायल रन किया गया, इस स्टोरेज की क्षमता 12 सौ मीट्रिक टन है जिसमें से 1000 मीट्रिक टन सीए aaple के लिए कोल्ड है। साथ ही इसमें यह भी आदेश है कि इसमें से 200 मीट्रिक टन का एक चेम्बर एक रुपए 10 पैसे प्रति किलो के हिसाब से किसानों के लिए आरक्षित रखा जाएगा। जिस पर केवल किसान का ही अधिकार होगा अब बची 800 मीट्रिक टन की कैपेसिटी मैं से केवल 330 मीट्रिक टन ही यूज़ हो पायेगा, क्योंकि इस स्टोर मैं अभी केवल क्रेटस मैं ही माल रखा जा सकता है और दूसरा कोई ऑप्शन नही है, इस स्टोर को फुल कैपेसिटी पर चलाने के लिए इसमें बिन्स और वाटर ग्रेडिंग लाइन का इन्वेस्टमेंट करना पड़ेगा, जिसकी मिनिमम कॉस्ट रूपये 5 करोड़ होगी।

वर्तमान स्थिति में इस कोल्ड स्टोरेज की क्रेट्स में क्षमता केवल 400 मेट्रिक टन रह गई है। जो भी कंपनी या उत्तराखंड एप्पल फेडरेशन इस कोल्ड स्टोरेज को चलाता है तो उसकी कैपेसिटी 400 मीट्रिक टन ही होगी इसी क्रम मैं दूसरे दिन अदानी ग्रुप के टेक्निकल टीम के साथ इस कोल्ड स्टोरेज का फुल ट्रायल रन किया गया जिसमें उत्तराखंड एप्पल फेडरेशन के सचिव विपिन पैन्यूली द्वारा बताया गया कि इस 400 मीट्रिक टन की कैपेसिटी को भरने के लिए जो 24000 क्रेटस है, उसके अलावा भी मिनिमम 10000 क्रेटस और चाहिए होंगी, ताकि सेब की तुड़ान दुलान कार्ययोजना को स्मूथ बनाया जा सके।

विपिन पैन्यूली बताया गया कि इस स्टोर का ऑफ सीज़न इस्तेमाल भी केवल अप्रैल-मई और जून के माह में ही हो पायेगा क्योंकि जनवरी और फरवरी में यहां पर काफी बर्फबारी होती है जिसके कारण इस कोल्ड स्टोरेज को खोल पाना संभव नहीं है, इस मौके पर अदानी ग्रुप के टेक्निकल पर्सन पंकज मिश्रा के साथ उनकी पूरी ग्राउंड लेबल टीम सुखी, झाला, जसपुर, पुराली, हर्षिल, बगोरी, धराली और मुखवा सेब उत्पादक सहकारी समितियों के सभी पदाधिकारी एवं सदस्य व सेब उत्पादक मौजूद थे।

पैन्यूली ने बताया कि कंपनियां सेब खरीदने के आलवा कोल्ड स्टोर का संचालन भी खुद के हाथों में लेना चाहती हैं, ताकि वह सेब खरीदकर यहीं स्टोर कर सकें। इस सीजन में यह संभव नहीं है, टेंडर आदि की प्रक्रिया में समय लगता है।

उन्होंने बताया कि पिछले साल के मुकाबले इस साल सेब की फसल कम आई है। पिछले साल करीब दस हजार मीट्रिक टन सेब का उत्पादन हुआ था, जबकि इस बार करीब छह हजार मीट्रिक टन सेब उत्पादन का अनुमान है।

उन्होंने बताया कि सेब का तुड़ान और ढुलान 15 सितंबर के आसपास शुरू हो जाएगा, जो 30 अक्तूबर तक चलेगा। उन्होंने बताया कि जिस तरह से बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने सेब खरीदने में दिलचस्पी दिखाई है, उम्मीद है कि किसानों को गत वर्ष के मुकाबले इस बार अच्छे दाम मिलेंगे।

पिछले साल ए-ग्रेड का सेब 65 से 70 रुपये, बी-ग्रेड का सेब 30 से 35 रुपये जबकि सी-ग्रेड का सेब 10 से 15 रुपये बिका था। उम्मीद है इस बार इनके दामों में 10 से 15 रुपये की बढ़ोतरी होगी।

 

 

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35 बर्षों से पत्रकारिता के प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक व सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक, धार्मिक, पर्यटन, धर्म-संस्कृति सहित तमाम उन मुद्दों को बेबाकी से उठाना जो विश्व भर में लोक समाज, लोक संस्कृति व आम जनमानस के लिए लाभप्रद हो व हर उस सकारात्मक पहलु की बात करना जो सर्व जन सुखाय: सर्व जन हिताय हो.
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