Sunday, March 22, 2026
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गढ़वाल-कुमाऊँ ही नहीं बल्कि मध्यप्रदेश, सिक्किम, मणिपुर, बर्मा, त्रिपुरा व नेपाल में विभिन्न नामों से पूजे जाते हैं गोलज्यू देवता।

(मनोज इष्टवाल)

यह सचमुच अचम्भित करने वाली बात है क्योंकि बर्ष 2015 से जब मैंने गोलज्यू देवता पर एक डॉक्यूमेंट्री फ़िल्म बनाने के लिए शोध प्रारम्भ किया था तब मेरे जेहन में सिर्फ तीन नाम थे, जिनमें चम्पावत का गोरिल चौड़, अल्मोड़ा का चित्तई व नैनीताल का घोड़ाखाल। लेकिन जब इस पर बृहद शोध प्रारम्भ किया तो पाया यह सम्पूर्ण हिमालयी राज्यों तक फैला एक बृहद क्षेत्र है जहां गोरिल देवता की विभिन्न नामों से पूजा होती है।

सचमुच अगर हम किसी कार्य को पूरी ईमानदारी से करने का यत्न करते तो रास्ते खुद-ब-खुद खुल जाते हैं.। मैं गोल्जू देवता पर क्षणिक शोध करने का यत्न कर रहा था लेकिन अब इसका भव्य विस्तार देख लग रहा है कि हर क्षेत्र में गोल्जू ने अवतार लिया और न्याय के देवता के रूप में पूजे जाने लगे जैसे गढ़वाल में इन्हें कन्डोलिया देवता, वहीँ नेपाल व कुमाऊ में हुनैनाथ, मलैनाथ, गोलपाड़ा, बाला गोरिया, दूधाधारी गोरिया, कृष्ण अवतारी, ग्वल देवता, ग्वेल देवता, ग्वल्जू, भनारी ग्वल, बण ग्वल, चौधणी गोरिया, कुमरासी गोरिया, कुम्भरासी गोरिया, मामू को आगवानी, पंचनाम देवताओं का भाणज, गीर खेलणी गोरी, कलवंती गोरिया, गौर भैरब तथा मध्यप्रदेश के बुन्धेलखंड में “काग-बिड़ारिन को छोरा, मणिपुर, बर्मा, त्रिपुरा में राजा “पाम्हैबा” के नाम से जाने जाते हैं।
गोलज्यू देवता पश्चिमी नेपाल में जन्मे बताये बताये जाते हैं व उनका राज पिथौरागढ़ के राजा पिथौरा की सीमा से लगा धौली -धुमागढ़ जिसे भूलवश धुमाकोट लिखा गया है, बताया जाता है। चम्पावत वे तब आये जब चम्पावत के तत्कालीन वृद्ध राजा नागनाथ या नागेश्वर ने उनकी वीरता के बारे में सुनकर उन्हें अपने राज्य के राक्षस “जटिया मसाण यानि जल मसाण” को मारने के लिए बुलाया और बाद में उन्हें ही राज सिंहासन सौंप दिया।
अभी शोध जारी है। उम्मीद है यह शोध निकट भविष्य में पूरा हो जाएगा और हम गोरिल गाथा व उनकी जागरों में उनका वृहद स्वरूप ढूंढ निकालेंगे।

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35 बर्षों से पत्रकारिता के प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक व सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक, धार्मिक, पर्यटन, धर्म-संस्कृति सहित तमाम उन मुद्दों को बेबाकी से उठाना जो विश्व भर में लोक समाज, लोक संस्कृति व आम जनमानस के लिए लाभप्रद हो व हर उस सकारात्मक पहलु की बात करना जो सर्व जन सुखाय: सर्व जन हिताय हो.
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