(संजय चौहान)
आज राष्ट्रीय हथकरघा दिवस है। 7 अगस्त का दिन भारतीय इतिहास में विशेष महत्व है। इसी दिन 1905 में स्वदेशी आंदोलन शुरू हुआ था। आंदोलन का उद्देश्य घरेलू उत्पादों और उत्पादन इकाइयों को पुनर्जीवित करना था। 7 अगस्त को भारत सरकार द्वारा 29 जुलाई, 2015 की तारीख के राजपत्र अधिसूचना के माध्यम से राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के रूप में अधिसूचित किया गया था, जिसका उद्देश्य हथकरघा उद्योग के महत्व एवं आमतौर पर देश के सामाजिक आर्थिक योगदान में इसके योगदान के बारे में जागरूकता फैलाना और हथकरघा को बढ़ावा देना, बुनकरों की आय को बढ़ाना और उनके गौरव में वृद्धि करना था।
उत्तराखंड में हस्तशिल्प और हथकरघा का सालाना कारोबार ₹50 करोड़ है। यह उद्योग करीब 12 हजार परिवारों की आजीविका से जुडा हुआ है। यदि इस उद्योग और हस्तशिल्पयों को प्रोत्साहित किया जाय तो इससे रोजगार के अवसर बढेंगे। इसलिये जरूरी है हस्तशिल्प और हथकरघा से निर्मित ज्यादा से ज्यादा उत्पादों का इस्तेमाल करें ताकि हाथ के हुनरमंदों को ज्यादा काम मिले, उचित दाम मिले।
राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर केन्द्रीय कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी ने आज नई दिल्ली में छठे राष्ट्रीय हथकरघा समारोह का उद्घाटन किया। उन्होंने हथकरघा उद्योग को बढ़ावा देने से संबंधित एक मोबाइल एप की भी शुरूआत की। साथ ही माय हैंडलूम नाम से एक वैब पोर्टल की भी शुरुआत की। इस वैब पोर्टल पर कपड़ा मंत्रालय से जुड़ी सभी योजनाओं की जानकारी बुनकरों को आसानी से उपलब्ध हो सकेगी। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि सरकार की यह कोशिश है कि वह बुनकरों के साथ डिजीटल सम्पर्क भी स्थापित करे। वहीं, देहरादून में आज मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने राज्य के हथकरघा और हस्तशिल्प उत्पादों को ई-पोर्टल अमेजन के माध्यम से ऑनलाईन बिक्री किये जाने का शुभारम्भ किया। ई-पोर्टल अमेजन के माध्यम से उत्तराखण्ड हथकरघा एवं हस्तशिल्प विकास परिषद के अंतर्गत ‘हिमाद्री’ ब्रांड से अभी लगभग राज्य के प्रमुख 150 उत्पाद ऑनलाईन बिक्री के लिए उपलब्ध होंगे।

