(मनोज इष्टवाल)
सचमुच आज का दिन उत्तराखंड राज्य निर्माण के बाद 22 बर्षों के उत्तराखंड के राजनीतिक इतिहास में आज नया अध्याय जोड़ गया है क्योंकि अब विधान सभा के सदन की कार्यवाही चलाती एक महिला दिखाई देंगी। कोटद्वार विधान सभा क्षेत्र से विधायक बनने के बाद श्रीमति ऋतु भूषण खंडूरी अब उत्तराखंड विधान सभा अध्यक्ष पद हेतु शपथ लेंगी।
इससे पूर्व पहाड़ी इकार्ट्स की श्रीमती मंजू टम्टा ने उन्हें “पहाड़ी स्टॉल” ओढ़ाकर अपने प्रोडक्ट की लांचिंग भी की। इस दौरान उनके साथ रवाई घाटी की सामाजिक कार्यकर्ता आशिता डोभाल भी मौजूद रही।
कोटद्वार विधायक ऋतु भूषण खण्डूरी ने किया विधानसभा अध्यक्ष पद पर नामांकन दाखिल करने के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि दलगत राजनीति से ऊपर उठकर काम करेंगी।
उत्तराखंड राज्य की पांचवीं विधानसभा में विधानसभा अध्यक्ष पद पर गुरुवार को बीजेपी से कोटद्वार विधायक ऋतु खंडूडी भूषण ने नामांकन किया। इस दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर धामी, कैबिनेट मंत्रियों में प्रेमचंद अग्रवाल, सुबोध उनियाल, रेखा आर्य सहित कई विधायक मौजूद थेद्य
कोटद्वार विधानसभा से विधायक ऋतु खंडूडी भूषण ने उत्तराखंड विधानसभा के इतिहास में पहली महिला प्रत्याशी के रूप में विधानसभा अध्यक्ष के पद के लिए नामांकन भरा। विधानसभा सचिव के कार्यालय में नामांकन प्रक्रिया पूर्ण की गई । बता दें कि विधानसभा अध्यक्ष पद के लिए 24 एवं 25 मार्च नामांकन की तिथि रखी गई है जबकि 26 मार्च को सदन में विधानसभा अध्यक्ष पद के लिए निर्वाचन किया जाएगा। इस दौरान मुख्यमंत्री सहित मंत्रियों और विधायकों द्वारा ऋतु खंडूडी भूषण को बधाई एवं शुभकामनाएं दी गई।
नामांकन के दौरान प्रस्तावक में खजान दास, मुन्ना सिंह चौहान, सरिता आर्या, दुर्गेश लाल, चंदन राम दास, प्रमोद नैनवाल, सविता कपूर, उमेश शर्मा, विनोद कंडारी, महेश जीना, भरत चौधरी, भोपाल राम टम्टा, बिशन सिंह चुफाल, सतपाल महाराज, मदन कौशिक, कैलाश चंद्र गहतोडी, वहीं समर्थक में सुरेश गढ़िया, बृज भूषण गैरोला, राम सिंह केड़ा, शैला रानी, सुरेश चौहान, मोहन सिंह बिष्ट, शक्ति लाल, रेणु बिष्ट, शिव अरोड़ा, अनिल नौटियाल, सौरभ बहुगुणा, रेखा आर्य, सुबोध उनियाल, दीवान सिंह बिष्ट मौजूद रहे।
नामांकन भरने के बाद ऋतु खंडूडी भूषण ने केंद्रीय नेतृत्व का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें खुशी है कि उत्तराखंड राज्य में महिलाओं के सम्मान करते हुए विधानसभा अध्यक्ष पद के लिए उन्हें प्रत्याशी बनाया गया। उन्होंने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष बनने के बाद वह प्रदेश की जनता की अपेक्षाओं एवं आकांक्षाओं के अनुरूप कार्य करेंगी साथ ही सदन की संसदीय परंपराओं के निर्वहन के लिए प्रतिबद्ध रहेंगी। उन्होनें कहा की वह दलगत राजनीति से ऊपर उठकर काम करेंगे। साथ ही पद की गरिमा का पालन करेंगी।
मंजू टम्टा का पहाड़ी स्टॉल।
Pahadiekart’s के नाम से कुमाऊनी पिछौडी को बाजार में उतारने वाले श्रीमती मंजू टम्टा व उनकी टीम लंबे समय से गढ़वाल कुमाऊं के हस्त शिल्प पर काम कर रही हैं। उन्होंने बातचीत के दौरान बताया कि सच मायने में आज “पहाड़ी स्टॉल” की लांचिंग हुई है, क्योंकि यह सम्पूर्ण पहाड़ का प्रतिनिधित्व करने वाली एक ऐसी स्टॉल है जिसे साड़ी, शूट व जीन्स सभी के ऊपर महिलायें धारण कर सकती हैं। उन्होंने कहा जब उन्होंने इसे लांच करने की बात की तब कुमाऊनी समाज के कई संस्कृति के चितेरों ने इसे पिछौड़ा की संज्ञा देकर इसे अपवाद समझा। मैं उन सभी लोगों का सम्मान करते हुए जानकारी देना चाहती हूं कि “पिछौडी स्वास्तिक चिह्न, घन्टा, शंख, सूरज व चांद के चिन्हों के बिना कभी पिछौडी नहीं कहलाई जा सकती। और पिछौडी मूलतः बिशेष आयोजन में पहनी जाती है।”
श्रीमति मंजू टम्टा बताती हैं कि पहाड़ी स्टॉल इस सबसे भिन्न है। उनकी सोच है कि हम जमाने के साथ अपने वस्त्राभूषणों में खूबसूरती के बिम्ब प्रयोग में लाकर उन्हें आकर्षक बनाने के लिए कुछ ऐसा रुचिकर तो कर ही सकते हैं जिसे नई जनरेशन प्रयोग में ला सके। विश्व के हर समुदाय के लोक समाज व लोकसंस्कृति में कुछ अभूतपूर्व प्रयोग होते हैं जो आने वाली बहुत सम्मान के साथ अपनाती है। “पहाड़ी स्टॉल” के फैब्रिक में पोल्का डॉट्स का खूबसूरत प्रयोग किया गया है। इसमें लड्डू ऑरेंज के ऊपर लाल रंग का खूबसूरत डिज़ाइन कर इसे आकर्षण दिया गया है ताकि इसे सम्पूर्ण पहाड़ी समाज अंगीकार कर सके व विश्व पटल पर कुमाउनी हस्तशिल्प चर्चित हो सके।
उन्होंने कहा कि यूँ तो उनका मूल कार्य “पिछौडी” पर केंद्रित रहा है लेकिन पब्लिक डिमांड के बाद अब उनका रुझान ट्रेडिशनल ज्वेलरी की ओर भी बड़ा है जो सम्पूर्ण उत्तराखंड के लोकसमाज का प्रतिनिधित्व करती है। श्रीमति मंजू टम्टा ने खुशी जताते हुए कहा कि पूर्व मंत्री व वर्तमान में पुनः कैबिनेट मंत्री बनी श्रीमती रेखा आर्य ने भी श्रीमती ऋतु खण्डूरी की तरह इस स्टॉल की प्रशंसा करते हुए हमारे कार्य को सराहा है। उम्मीद है यह “पहाड़ी स्टॉल” आगामी समय में बाजार में हमारी संस्कृति का प्रतिनिधित्व करती नजर आयेगी।
ज्ञात हो कि “पिछौडी” या पहाड़ी स्टाल मूलतः जॉर्जेट, कॉटन, मलमल के कपड़े से बनाया जाता है जिसमें सजावट के लिए साउथ का मुग्गम, मोती का काम, दबका वर्क, चिकनकारी व ब्यूटीफाइ जैसे विभिन्न कार्य किये जाते हैं। यकीनन पहाड़ के लोक समाज व लोकसंस्कृति के पुरातन हस्तशिल्प को पुनः जीवंत बना रही मंजू टम्टा व उनकी सहयोगी महिलाओं की प्रशंसा की जानी चाहिए।


