काकभुसन्डी ताल यानि पूरे विश्व के कौवों का कब्रगाह।
(मनोज इष्टवाल)
देवभूमि उत्तराखंड वास्तव में कई विविधताएं और विषमताओं का अद्भुत मिश्रण है। इस देवभूमि में देह त्यागना स्वर्ग समान सिर्फ मनुष्य ही नहीं मानते बल्कि पक्षी भी अपने को धन्य समझते हैं।
जोशीमठ से जैसे ही आप सामने की पहाड़ियों पर नजर डालते हैं तब बिष्णु प्रयाग पर आपके दाहिने ओऱ काक भुसन्डी पर्वत श्रृंखला दिखाई देती है। उन्हीं के पार जब आप इन पर्वत श्रृंखलाओं पर विचरण करते हुए पहुँचते हैं तब आप हिमालय भूभाग के उस अतुलनीय क्षेत्र में पहुँचते हैं जहाँ बर्फीले पहाड़ों के बीच में लंबी नीली झील दिखाई देती है जिसके एक सिरे से रिसता पानी ऐसे लगता है मानों चांदी पिघल रही हो।
जब आप ताल के समीप जॉयेंगे तो पाएंगे हजारों हजार कौवे वहां अपनी देह त्यागे हुए हैं। यहाँ देह त्यागने वाले कौवे सत्कर्मों के आधार पर ही यहाँ तक का सफर करते हैं। इसे कागः स्वर्ग भी कहा जाता है और कागः कब्रगाह भी। धरोहर के सुप्रसिद्ध फोटोग्राफर चन्द्रशेखर चौहान बताते हैं क़ि काक भुसन्डी तक पहुंचने के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग 58 पर जोशीमठ से आगे गोविन्द घाट से भ्युंडार और फिर भ्युंडार से रूपढून्गा, कर्गिला, सेमारतोली, डांग खरक, राज खरक, काक भुशंडी खाल होते हुए यहाँ पहुंचा जा सकता है……।
