एसटी, एससी के फर्जी मुकदमे में बेनक़ाब हुए पिथौरागढ़ के पूर्व कप्तान लोकेश्वर सिंह
पुलिस शिकायत प्राधिकरण के आगे झूठे साक्ष्य व दलील प्रस्तुत कर फंसे लोकेश्वर सिंह
न्यायमूर्ति एनएस धानिक अध्यक्ष पुलिस शिकायत प्राधिकरण, सदस्य पुष्पक ज्योति, अजय जोशी, मोहन चंद्र तिवाड़ी व दयाशंकर पांडे को बैंच ने केस पर सुनाया अभूतपूर्व निर्णय।
(मनोज इष्टवाल)
यह यकीनन पुलिस शिकायत प्राधिकरण द्वारा दिया गया अभूतपूर्व फैसला है, जिसमें एक आई पी एस को प्रताड़ना का दोषी करार दिया गया। पूर्व में पिथौरागढ़ के एस पी रहे लोकेश्वर सिंह ने कभी कल्पना भी नहीं की होगी कि पुलिस महकमें में बड़े पद पर रहते हुए उनके विरुद्ध ही पुलिस शिकायत प्राधिकरण ऐसा अभूतपूर्व निर्णय लेगा। लेकिन क़ानून को अपनी घरेलु बपौती समझने वाले ऐसे अधिकारी जिसने झूठे तर्क व झूठ के पुलिंदो से पहले अदालत और फिर राज्य पुलिस शिकायत प्राधिकरण को गुमराह किया आखिरकार उसी के लपेटे में फंस गया। अपने को फंसते देख लोकेश्वर सिंह ने त्याग-पत्र का दाँव खेला जो मंजूर भी हो गया लेकिन आम जन के बीच उनके बेनक़ाब होने से राज्य पुलिस शिकायत प्राधिकरण, पुलिस प्रशासन व धामी सरकार के प्रति जनता का विश्वास बढ़ा है।
ज्ञात हो कि अवैध रूप से हिरासत में रखने और नग्न करके पीटने के एक मामले में लक्ष्मी दत्त जोशी निवासी मंगलम गारमेंट्स पुराना बाजार, पिथौरागढ़ ने आठ फरवरी 2023 को जिला पुलिस शिकायत प्राधिकरण, नैनीताल को शिकायतपत्र दिया था। जिस पर पुलिस शिकायत प्राधिकरण द्वारा आईपीएस लोकेश्वर सिंह को अपना पक्ष रखने को बुलाया गया, लेकिन हर बार लोकेश्वर सिंह शपथ पत्र प्रस्तुत कर देते। लेकिन हर बार उनके शपथ पत्र में विविधता होती।
और तो और ज़ब कोई दाँव कारगर सिद्ध होता न दिखा तो लोकेश्वर सिंह ने पुलिस लाइन पिथौरागढ़ में तैनात दो सफाईकर्मियों के माध्यम से लक्ष्मी दत्त जोशी पर एस सी, एस टी एक्ट में मुकदमा भी दर्ज करवा दिया लेकिन गवाही के दौरान दोनों सफाईकर्मी मुकर गए जिससे लोकेश्वर सिंह के विरुद्ध मामला और अधिक पुख्ता हो गया।
दरअसल छ फ़रवरी 2023 को पुलिस विभाग के क्वार्टर से निकल रही गंदगी की शिकायत लेकर लक्ष्मी दत्त जोशी पिथौरागढ़ एस पी लोकेश्वर सिंह के पास गए थे। लक्ष्मी दत्त जोशी का आरोप था कि एस पी लोकेश्वर सिंह उन्हें अपने कार्यालय के बगल में एक ऐसे कमरे में ले गए जहाँ सीसीटीवी कैमरा नहीं लगा था। वहाँ उन्हें नंगा करके लोकेश्वर सिंह व पुलिसकर्मियों द्वारा बुरी तरह से पीटा गया। उनकी पिटाई के बाद उन्हें उसी कमरे के पिछले दरवाजे से बाहर कर दिया गया जिसके पश्चात वह जैसे तैसे सीधे अस्पताल पहुँचे और अपना मेडिकल व एक्सरे करवाया।
राज्य पुलिस शिकायत प्राधिकरण में दर्ज शिकायत पर जब पुलिस ने उन्हें अपना पक्ष रखने को बुलावा भेजा, तब लोकेश्वर सिंह ने अपना शपथ -पत्र देकर लक्ष्मी दत्त जोशी को आपराधिक किस्म का व्यक्ति बताते हुए कहा कि उनके विरुद्ध कई प्राथमिकियां दर्ज हैं। लेकिन जांच में यह सब झूठ पाया गया। अपने शपथ पत्र में उन्होंने लिखा कि 18अप्रैल 2023 को तत्कालीन पुलिस अधीक्षक लोकेश्वर सिंह ने शपथपत्र दिया कि लक्ष्मी दत्त जोशी आपराधिक किस्म का व्यक्ति है। उसके विरुद्ध कोतवाली पिथौरागढ़ में जुआ अधिनियम, चंपावत में राज्य पुलिस शिकायत प्राधिकरण ने सुनाया निर्णय, पूर्व अधिकारी के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की संस्तुति सरकारी काम में बाधा डालना व मारपीट, गुंडा अधिनियम एवं कोतवाली पिथौरागढ़ में आपराधिक धमकी देने में मुकदमा दर्ज है। गांव वालों से जमीन संबंधी विवाद में उनके विरुद्ध शांति भंग की कार्रवाई की गई है। कोतवाली पिथौरागढ़ क्षेत्र में वाहनों में आग लगाने की घटना के संबंध में उन्हें पूछताछ के लिए बुलाया गया था। लक्ष्मी दत्त ने उस घटना में शामिल होने से इन्कार कर दिया। छह फरवरी 2023 को उनके साथ कोई मारपीट नहीं की गई।
राज्य पुलिस शिकायत प्राधिकरण का अभूतपूर्व फैसला
राज्य पुलिस शिकायत प्राधिकरण ने बड़ा फैसला सुनाया है। प्राधिकरण ने आइपीएस अधिकारी रहे लोकेश्वर सिंह (तत्कालीन पुलिस अधीक्षक पिथौरागढ़) को दोषी करार देते हुए उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की संस्तुति उत्तराखंड शासन गृह विभाग को भेजी है। वहीं, पुलिस अधिकारी को सुनवाई का पर्याप्त अवसर प्रदान करने के भी आदेश जारी किए हैं। लोकेश्वर सिंह ने 14 अक्टूबर 2025 को पुलिस सेवा से त्यागपत्र दे दिया था। फिलहाल वह संयुक्त राष्ट्र से संबद्ध अंतरराष्ट्रीय संगठन में जिम्मेदारी निभा रहे हैं।
26 मई 2023 को शिकायतकर्ता लक्ष्मी दत्त जोशी ने शपथपत्र दिया कि लोकेश्वर सिंह ने अपने पद का दुरुपयोग कर और स्थानीय दलों के नेताओं से मिलीभगत कर उनके विरुद्ध झूठे मुकदमे दर्ज किए। सभी मुकदमों की सुनवाई कोर्ट में चल रही है। किसी भी मुकदमे में उन्हें दोषी घोषित नहीं किया गया है। एक शिकायतकर्ता तो पुलिस विभाग में तैनात सफाई कर्मचारी का बेटा है। छह फरवरी 2023 को झूठे वाहनों को आग लगाने के मामले में उन्हें पुलिस अभिरक्षा में रखकर मारपीट की गई। उनके खिलाफ कोई मुकदमा दर्ज नहीं किया गया।
आई पी एस लोकेश्वर सिंह दोषी करार/ पुलिस शिकायत प्राधिकरण का अभूतपूर्व निर्णय
करीब तीन साल राज्य पुलिस शिकायत प्राधिकरण में चली सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों को विभिन्न तिथियों को अपना अपना पक्ष रखने के लिए बुलाया गया। बुधवार को बैंच ने विवेचना में तत्कालीन पुलिस अधीक्षक लोकेश्वर सिंह को इस मामले में शिकायतकर्ता को अपने कार्यालय में बुलाकर उसे नग्न कर मारपीट करने और काफी देर तक कार्यालय में बैठाने का दोषी पाया।
न्यायमूर्ति एनएस धानिक की अध्यक्षता और पूर्व आईपीएस पुष्पक ज्योति व अजय जोशी, दया शंकर पांडे व मोहन चंद जोशी, सदस्यता वाली पीठ ने तत्कालीन पुलिस कप्तान लोकेश्वर सिंह के तथ्यों में कोई दम नहीं पाया। पीठ ने माना कि एसपी पिथौरागढ़ के तथ्य विश्वास योग्य नहीं हैं। जबकि, शिकायकर्ता लक्ष्मी दत्त जोशी के पास घटना के दिन ही कराया गया मेडिकल और एक्स-रे की रिपोर्ट है। इसमें चोट 12-24 घंटे के भीतर होना पाया है। लोकेश्वर सिंह ने इसके विरोध में अपना कोई साक्ष्य उपलब्ध नहीं कराया है। शिकायतकर्ता ने किसी थाने के कर्मचारी पर आरोप नहीं लगाए हैं। लिहाजा एसपी लोकेश्वर सिंह पर यह आरोप सिद्ध होते हैं जो कि पुलिस विभाग की छवि को भी धूमिल करने वाले हैं। सारी विवेचना और सुनवाई से यह सिद्ध हुआ है कि शिकायतकर्ता को नग्न बैठाकर उनके साथ नहीं मारपीट की गई। प्राधिकरण ने इस मामले में उत्तराखंड पुलिस अधिनियम की विभिन्न धाराओं में कार्रवाई की संस्तुति करते सरकार को निर्देशित किया है।
बहरहाल 14 अक्टूबर 2025 को लोकेश्वर सिंह ने पुलिस सेवा त्यागपत्र दे दिया, और अवकाश पर चले गए जबकि उनका चयन संयुक्त राष्ट्र से जुड़ी एक संस्था में हुआ था। लोकेश्वर सिंह ने उत्तराखंड कैडर में रहकर 11 साल अपनी सेवाएं दी हैं। विगत 28 नवंबर 2025 को केंद्र सरकार ने उनका इस्तीफ़ा मंजूर कर लिया है। फिर भी प्रश्न यह उठता है कि इस्तीफे की तहरीर के अनुसार क्या वह फिर से तीन या पांच साल बाद कहीं पोस्टिंग पा सकते हैं?
