Tuesday, February 24, 2026
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नूँह मेवात से इन्सपेक्टर सकलानी तीन सिपाहियों सहित धर दबोच लाये थे हत्या आरोपी को। देखते रह गए एसएचओ नूँह…।

नूँह मेवात से इन्सपेक्टर सकलानी तीन सिपाहियों सहित धर दबोच लाये थे हत्या आरोपी को। देखते रह गए एसएचओ नूँह…।

(मनोज इष्टवाल)

ऐसा कोई सरफिरा ही कर सकता है या फिर उत्तराखंड पुलिस…। यह मित्र पुलिस के रूप में जितनी विनम्र है उतनी ही अपराधियों के दिलों की दहशत। जिस नूंह मेवात में हरियाणा की पुलिस को घुसने के लिए कम से कम 500 पुलिस जवानों की आवश्यकता पड़ती है वहाँ उत्तराखंड का पहाड़ी शेर इंस्पेक्टर आर के सकलानी मात्र तीन सिपाहियों के साथ जा धमकते हैं और सियारों के झुंड से चील की भाँति अपराधी को ले आते हैं। जब वह अपराधी को लेकर थाना नून्ह मेवात पहुँचते हैं तो तत्कालीन थाना एसएचओ पलकें झपकना बंद कर देते हैं उन्हें विश्वास ही नहीं होता कि कोई इतना साहस भी कर सकता है।

आज नूंह फिर से चर्चाओं में है। चर्चाओं में इसलिए क्योंकि विगत दिनों बृजमंडल जलाभिषेक यात्रियों पर मोर्टार, गैस सिलेंडर व तबाडतोड़ गोलाबारी मुस्लिम बाहुल्य इसी गाँव के अपराधियों द्वारा अरावली पर्वत से की गई थी।इस हिंसा में अब तक 7 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें 2 होमगार्ड गुरसेवक और नीरज, नूंह के शक्ति, पानीपत के अभिषेक, गुरुग्राम के इमाम, बादशाहपुर के प्रदीप शर्मा व एक अन्य व्यक्ति शामिल हैं।

राज्य में पुलिस ने कुल 93 केस दर्ज किए हैं। 186 लोगों को गिरफ्तार और 78 को हिरासत में लिया है। नूंह हिंसा की जांच के लिए स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की 8 और 3 स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीमें बनाई गई हैं।

नूंह में 46, गुरुग्राम में 23, पलवल में 18 और रेवाड़ी-फरीदाबाद में 3-3 एफआईआर दर्ज हुई हैं। नूंह में 139 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। नूंह में गिरफ्तार किए गए 4 लोग पलवल और 6 लोग भरतपुर-अलवर के हैं।

नूंह जिले के पुलिस अधीक्षक (SP) वरुण सिंघला का ट्रांसफर कर दिया। वह हिंसा के दिन छुट्‌टी पर थे। उन्हें अब भिवानी जिले का चार्ज दिया गया है।

हिंसा के चलते 4 जिलों- नूंह, पलवल, फरीदाबाद और गुरुग्राम में हालात तनावपूर्ण हुए हैं। चारों जिलों में पैरामिलिट्री फोर्सेज की 20 कंपनियां तैनात की गई हैं। राज्य के 9 जिलों में धारा 144 लागू है।

इसी नूंह में जहां पुलिसकर्मी वर्दी छोड़िये बिना वर्दी के भी जाना पसंद नहीं करता उसके हलक में हाथ डालकर उत्तराखंड पुलिस के इंस्पेक्टर आर के सकलानी अपराधी को उठा लेट हैं। अपने संस्मरण में आर के सकलानी लिखते हैं कि मेवात का नूह्न आजकल चर्चाओं में है ।मैं 2011 में हरिद्वार में सिडकुल प्रभारी था मेरे यहाँ एक ट्रक चालक की हत्या हुई थी जो उसी के क्लिनर ने की थी ।आरोपी नुह्न का रहने वाला था लिहाज़ा मैं 3 सिपाही लेकर नूह्न थाने पहुँचा।जब मैंने आरोपी को पकड़ने के लिये वहाँ के SHO को फ़ोर्स देने के लिए कहा तो उन्होंने हाथ खड़े कर दिए और कहा की उस गाव में घुसने के लिए कम से कम 500 पुलिस वाले चाहिए आप अपने यहाँ से अतिरिक्त फ़ोर्स मंगाइये तब मैं साथ में अपने थाने का फ़ोर्स दूँगा।
अब मैं भी कहाँ पीछे हटने वाला था वहाँ थाने में हमने उस गाव के एक उसी समुदाय के होम गार्ड की मदद से आरोपी के घर की लोकेशन और पहचान ले ली ।

इंस्पेक्टर सकलानी अपनी सोशल साईट पर लिखते हैं कि उस होम गार्ड ने वास्तव में गाव और धर्म से ऊपर उठाकर अपने राष्ट्र धर्म को निभाया ।मात्र 3सिपाही साथ लेकर गाव में घुस गये ।गाव की आबादी क़रीब 10हज़ार रही होगी।अंदर घुस कर वास्तव में नयी दुनिया लग रही थी ।हम होमगार्ड के बताये अनुसार उस घर में घुस गये ।मजे की बात है की बेख़बर आरोपी अपने घर के आँगन में ही बैठा था उसकी नज़र हम पर पड़ते ही उसने भागने की कोशिश की पर हमने दबोच लिया गाड़ी के ड्राइवर को हमने पहले ही गाड़ी बैक करने के लिए कह दिया था । आरोपी को बिना किसी देरी के गाड़ी में ठूँसा तब तक आस पास के लोगो और उसके घर वालों ने हमे घेरने का प्रयास किया पर सफल नहीं हो पाये उसे लेकर जब हम नूह्न थाने पहुँचे और वहाँ के SHO को हमने सीना ठोककर बताया कि हम आरोपी को ख़ुद ही उठा ले आये है।SHO साहब की आँखें फटी की फटी रह गई उन्हें विश्वास नहीं हो रहा था।

पुलिस चाहे मेवात में हो या उत्तराखंड में या कहीं भी..! जनसंख्या की तुलना में वह अपने क्षेत्र के आबादी का .01%होती होगी परंतु हमारी ट्रेनिंग और आत्मविश्वास हमे ये हिम्मत देती है की अपराधी को उसके बिल से खींच कर ले आयें ।इस घटना से मुझे लगा कि वहाँ पर पुलिस को अवधारणा के बजाय आत्मविश्वास की ज़रूरत है ।

आपको सौ सौ सैल्यूट सकलानी जी। आपने पुलिस महकमे के साथ साथ उत्तराखंड का नाम भी रोशन किया है। आप जैसे निष्ठावान अधिकारी पर हमें गर्व है।

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35 बर्षों से पत्रकारिता के प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक व सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक, धार्मिक, पर्यटन, धर्म-संस्कृति सहित तमाम उन मुद्दों को बेबाकी से उठाना जो विश्व भर में लोक समाज, लोक संस्कृति व आम जनमानस के लिए लाभप्रद हो व हर उस सकारात्मक पहलु की बात करना जो सर्व जन सुखाय: सर्व जन हिताय हो.
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