Saturday, July 13, 2024
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पॉल्यूशन के कारण आंखों में हो रही है जलन और खुजली तो जानें कैसे करें दूर?

अक्टूबर के महीने में हवा की गुणवत्ता तेजी से खराब होने लगती है जिससे प्रदूषण का स्तर बढ़ जाता है. बढ़ते प्रदूषण से सांस संबंधी तकलीफें और आंखों में जलन जैसी दिक्कतें होने लगती हैं। ज्यादातर लोगों को इस मौसम में आंखों में खुजली, जलन और लाली जैसी समस्याएं होने लगती हैं। यदि आप भी प्रदूषण के कारण आंखों की ऐसी ही समस्याओं से परेशान हैं तो कुछ बातों का ध्यान रखकर इससे राहत पाई जा सकती है। आइए जानते हैं इससे राहत पाने के लिए क्या करें..

आंखों को पानी से धोएं
आंखों को ठंडे पानी से धोना प्रदूषण से होने वाली आंखों की जलन और खुजली से राहत दिलाने का एक प्रभावी तरीका है।प्रदूषण के कारण आंखों में जमा हुआ धूल-मिट्टी और अन्य कण आंखों को इरिटेट करते हैं। ठंडे पानी से आंखें धोने से ये कण बाहर निकल जाते हैं और आंखों को ताजगी मिलती है। दिन में 2-3 बार आंखों को ठंडे पानी से अच्छी तरह धोना चाहिए।

चश्मे का प्रयोग करें
चश्मे का प्रयोग प्रदूषण से आंखों की रक्षा करने का एक अच्छा तरीका है। चश्मे के ग्लास आंखों को प्रदूषण कणों से बचाते हैं। बाहर निकलते समय चश्मा पहन लेना बेहतर होगा चश्मे के ग्लास आंखों तक पहुंचने वाले प्रदूषण कणों को रोक देते हैं। इससे आंखों को काफी हद तक बचाया जा सकता है।

लैपटॉप और फोन से बनाएं दूरी
मोबाइल, कंप्यूटर, लैपटॉप या टीवी जैसी स्क्रीन डिवाइसेस का इस्तेमाल करने से आंखों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। पहले से ही प्रदूषण आंखों को प्रभावित कर रहा हो तो स्क्रीन टाइम कम करना बेहतर होता है। इसलिए, प्रदूषण वाले दिनों में मोबाइल/लैपटॉप का उपयोग कम से कम करें। टीवी देखने का समय भी कम कर दें। आंखों को आराम देने से प्रदूषण के कम होंगे।

आंखों में आइस क्यूब का इस्तेमाल करें
आंखों पर आइस क्यूब इस्तेमाल करने से भी जलन की समस्या में राहत मिल सकता है. कॉटन के कपड़े में आइस क्यूब को रख लें, अब इससे आंखों की सिकाई करें. ऐसा करने से आंखों की परेशानी दूर हो सकती है।

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35 बर्षों से पत्रकारिता के प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक व सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक, धार्मिक, पर्यटन, धर्म-संस्कृति सहित तमाम उन मुद्दों को बेबाकी से उठाना जो विश्व भर में लोक समाज, लोक संस्कृति व आम जनमानस के लिए लाभप्रद हो व हर उस सकारात्मक पहलु की बात करना जो सर्व जन सुखाय: सर्व जन हिताय हो.
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