देहरादून (हि. डिस्कवर)।
◆ यूनिफॉर्म सिविल कोड पर फैसला लेने वाला देश का पहला राज्य होगा उत्तराखंड।
◆ समान नागरिक संहिता ड्राफ्ट के लिए बनाई जाएगी उच्च स्तरीय कमेटी।
12वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने के एक दिन बाद ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की कैबिनेट ने एक ऐतिहासिक फैसला लेते हुए प्रदेश में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने का निर्णय ले लिया है।
ज्ञात हो कि मुख्यमंत्री ने जनता से किया अपना वादा पूरा करते हुए यूनिफॉर्म सिविल कोड को लेकर एक कमेटी बनाई है। जो यूनिफॉर्म सिविल कोड अर्थात समान नागरिक संहिता का ड्राफ्ट तैयार करेगी। इस पर राज्य मंत्रिमंडल ने इस प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है।
आपको याद होगा कि पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि 12 फरवरी 2022 को हमारी सरकार ने संकल्प लिया था कि राज्य में यूनिफार्म सिविल कोड लाएंगे। इसकी वजह बताते हुए धामी ने कहा कि उत्तराखंड की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत की रक्षा, पर्यावरण की रक्षा और राष्ट्र रक्षा के लिए उत्तराखंड की सीमाओं की रक्षा पूरे भारत के लिए अहम है, इसलिए यूनिफॉर्म सिविल कोड जैसे कानून की जरूरत थी।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री और भाजपा ने चुनाव से पहले जनता से वादा किया था कि सरकार आने के बाद वो राज्य में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करेंगे। हालांकि इस मुद्दे पर पहले भी कई बार बहस हुई है लेकिन हर बार कुछ नेता इस तरह मामलों पर अपनी सियासी रोटियां सेंकने के बाद ठंडे बस्तों में डाल देते हैं। अब ऐसे में अगर आपके मन में सवाल उठ रहा है कि आखिर यह ये बला है क्या? जिसका नाम बार-बार खबरों में देखने और सुनने को मिलता है।
क्या है समान नागरिक संहिता अर्थात यूनिफॉर्म सिविल कोड।
यूनिफॉर्म सिविल कोड को हिंदी भाषा में समान नागरिक संहिता कहा जाता है। इसका मतलब यह होता है कि देश के हर शहरी के लिए एक जैसा कानून लागू हो। इसके तहत एक शहरी किसी भी धर्म-मज़हब से संबंध रखता हो, सभी के लिए एक ही कानून होगा। इसको धर्मनिर्पेक्ष कानून भी कहा जा सकता है। इस कानून के बन जाने का सीधा सा मतलब है कि विवाह, तलाक और जमीन जायदाद के मामलों में सभी धर्मों के लिए एक ही कानून होगा। अर्थात अब पूरी सख्ती से साथ सभी धर्म अनुयायी जो भी उत्तराखंड में रहेगा बेवजह किसी भी धर्म या जाति का व्यक्तिगत कानून जो नागरिक हित में न हो लागू नहीं होगा व पूरे प्रदेश में प्रत्येक नागरिक पर समान नागरिक संहिता लागू होगी।
धामी ने कहा कि उत्तराखंड की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत की रक्षा, पर्यावरण की रक्षा और राष्ट्र रक्षा के लिए उत्तराखंड की सीमाओं की रक्षा पूरे भारत के लिए अहम है, इसलिए यूनिफॉर्म सिविल कोड जैसे कानून की जरूरत थी।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा, समान नागरिक संहिता के लिए हम एक उच्च स्तरीय कमेटी बनाएंगे, जिसमें शीर्ष अदालत के सेवानिवृत्त जस्टिस शामिल होंगे और यह कमेटी इस कानून का एक ड्राफ्ट तैयार कर सरकार को सौंपेगी जिसे जल्द से जल्द लागू किया जाएगा। इसको लेकर आज मंत्रिमंडल में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर दिया है। उत्तराखंड देश का पहला राज्य होगा जहां ये कानून लागू होगा। इस यूनिफॉर्म सिविल कोड का दायरा विवाह-तलाक, जमीन-जायदाद और उत्तराधिकार जैसे विषयों पर सभी नागरिकों के लिए समान कानून चाहे वे किसी भी धर्म में विश्वास रखते हों/ रखता होगा।
