Sunday, March 22, 2026
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शासकीय प्रवक्ता व संसदीय कार्यमंत्री गुस्साए! कुम्भ बैठक में नहीं पहुँचे कोई भी नौकरशाह।

देहरादून 22 जुलाई 2020 (हि.डिस्कवर)।

क्या सिर्फ मुख्यमंत्री की बैठकों में ही शिरकत करते हैं सचिव स्तरीय नौकरशाह..? आज संसदीय कार्यमंत्री व शासकीय प्रवक्ता मदन कौशिक ने जिस तरह पूरे गुस्से में भरकर भरी बैठक में अफसरों को लताड़ लगाकर बैठक छोड़ दी, उससे स्पष्ट नजर आ रहा है कि कहीँ न कहीं मंत्रियों व उच्चस्तरीय नौकरशाहों में इस दौर में एक दरार सी है जो भरने का नाम नहीं ले रही है।

यहां लगता तो यही है कि सचिव स्तरीय अधिकारी किन्हीं विशेष निर्देशों का ही पालन कर रहे हैं वरना संसदीय कार्यमंत्री इस तरह आग बबूला नहीं होते। उन्होंने कहा उन्होंने कुम्भ समीक्षा बैठक इसी कारण हरिद्वार के स्थान पर सचिवालय में आयोजित करवाई ताकि सभी सचिव स्तरीय अधिकारी जनता की बातों का संज्ञान ले सकें, लेकिन जो मुख्य-मुख्य विभाग हैं उन्हीं के सचिव नदारद हैं। सुनिए क्या बोले मदन कौशिक:-

उत्तराखंड में अधिकारियों की मनमानी रुकने का नाम नहीं ले रही है । वह भी तब जब कुछ दिनों पहले मुख्य सचिव के द्वारा सभी विभागों के आला अधिकारियों को जनप्रतिनिधियों का सम्मान करने को लेकर आदेश जारी की गए थे, लेकिन जनप्रतिनिधियों की छोड़ें उत्तराखंड के शासकीय प्रवक्ता मदन कौशिक के द्वारा बुलाई गई कुम्भ समीक्षा बैठक में कई विभागों के सचिव ना पहुंचने से शासकीय के प्रवक्ता मदन कौशिक ने कुंभ के दौरान होने वाले निर्माण कार्यों की महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक को स्थगित कर दिया ।

मदन कौशिक ने बैठक को इसलिए स्थगित कर दिया क्योंकि स्वास्थ्य, ऊर्जा, पीडब्ल्यूडी, पेयजल जैसे विभागों के सचिव उनके द्वारा बुलाई गई समीक्षा बैठक में नहीं आए। इतना ही नहीं मदन कौशिक ने मुख्य सचिव को फोन कर फटकार लगाते हुए कहा उनका समीक्षा बैठक लेने का क्या औचित्य है जब सचिव उनकी बैठक में न हो। मुख्य सचिव को फोन पर मदन कौशिक ने यह भी जानकारी दी कि उन्होंने एक हफ्ते पहले बैठक का एजेंडा तय कर विभागों को भेज दिया था लेकिन विभागीय सचिव बैठक में नहीं पहुंचे ।

संसदीय कार्यमंत्री एवं शहरी विकास मंत्री व शासकीय प्रवक्ता मदन कौशिक का कहना था कि जिस बैठक में सचिवों को मौजूद होना चाहिए उसमें विभागों कि छोटे अधिकारी भेजे गए हैं जिस वजह से वह बैठक नहीं ले पाएंगे। वही मदन कौशिक ने अधिकारियों को बैठक छोड़ने के बाद यह तक कह दिया कि यदि सचिव उनकी बैठक में नहीं आना चाहते हैं तो फिर वह बैठक नहीं ले पाएंगे और मुख्यमंत्री या मुख्य सचिव की बैठक लें।

बहरहाल जिन विभागों के सचिव बैठक से लापता थे वे सभी मुख्यमंत्री के विभाग थे, ऐसे में मदन कौशिक का यह कहना कि अगर ये सचिव उनकी बैठक में न आना चाहते हैं तो मुख्यमंत्री व मुख्य सचिव ही बैठक लें, कहीं न कहीं इस बात की ओर इशारा करते हैं सरकार व शासन में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है।

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