Sunday, March 15, 2026
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फिल्म अभिनेत्री उर्मी नेगी जिसने गढवाली सिनेमा के ब्लैक होल को किया बंद! अपने जन्मदिन पर नए अंदाज में दिखी!

*यूट्यूब पर लांच की अपनी गढवाली फिल्म “सुबेरो घाम”!

(मनोज इष्टवाल)

करीब -करीब 40 बर्ष पूर्व पौड़ी गढवाल के पौड़ी गाँव से एक 16 बर्षीय लड़की मुंबई फिल्म इंडस्ट्री की ओर रुख करती है! शायद तब मुंबई फिल्म इंडस्ट्री में दक्षिण भारतीय अभिनेता कमल हासन व रति अग्निहोत्री अभिनीत फिल्म एक दूजे के लिए का गीत  “सोलह बरस की बाली उमर को सलाम, प्यार की पहली नजर को सलाम” या फिर ऋषि कपूर टीना मुनीम अभिनीत फिल्म कर्ज का गीत  “तू कितने बरस की मैं 16 बरस की!” गीत रिलीज ही हुआ था फिल्म रिलीज होने में समय था, क्योंकि यह भी ठीक वही अस्सी के दशक का अंतिम दौर था, और उसी दौर में  इस सोलह बरस की बागडोर संभाले यह पौड़ी गाँव पौड़ी गढवाल उत्तराखंड की बेटी अपना भाग्य आजमाने बॉलीवुड पहुँच चुकी थी! क्योंकि 1982 में इन्होने अपनी पहली हिंदी फिल्म में एक किरदार निभाया था जिसका नाम था- स्वामी दादा!  जिसके मुख्य कलाकार देव आनंद, मिथुन चक्रवर्ती, रति अग्निहोत्री, नसीरुद्दीन शाह, पद्मिनी कोल्हापुरे, जय किशन श्राप उर्फ़ जैकी श्राफ, कुलभूष्ण खरबंदा, शक्ति कपूर, ए.के. हंगल, उर्मिला भट्ट उर्फ़ उर्मी नेगी, सुधीर दलवी, सुषमा सेठ व भरत कपूर थे!

इसी दौर में गढवाली सिनेमा के पितामह कहे जाने वाले पाराशर गौड़  की  1981 से बन रही गढवाली फीचर फिल्म “जग्वाळ” भी 1983 में रिलीज हुई! तब शायद उर्मी नेगी मुंबई पहुँच चुकी थी व उनकी व पाराशर गौड़ की मुलाक़ात नहीं हुई थी वरना वह इस गढवाली फिल्म में बतौर अभिनेत्री काम कर चुकी होती! 

यह शायद ही उत्तराखंड का बिरला व्यक्ति जानता होगा कि मुंबई  फिल्म इंडस्ट्री में रहते हुए आपने कई बड़ी हिंदी फिल्मों में लगातार किरदार निभाएं हैं जिनमें सह अभिनेत्री व सहायक कलाकारा, पटकथा लेखिका/संवाद लेखिका  (कसम धंधे की, दादा, हवेली के पीछे) व भोजपुरी, राजस्थानी व नेपाली फिल्मों में मुख्य अभिनेत्री का किरदार निभाया है! उर्मी नेगी ने स्वामी दादा, जेवर, आग के शोले, धरती की कसम, मान मर्यादा, हत्यारा, हवेली के पीछे, दादा,  कसम धंधे की  इत्यादि कई फ़िल्में अभिनीत की तो वहीँ उल्लंघन, सपने अपने-अपने, सुनहरे जैसे टीवी सीरियल में भी अभिनय किया! 

कमाल की बात तो यह थी कि उर्मि नेगी फिल्म इंडस्ट्री में अपने को स्थापित कर रही थी व पौड़ी में उर्मि के जानने वाले कय्यासबाजी लगाते थे कि जाने फ़िल्मी दुनिया की अँधेरी गलियों में उर्मी नेगी कहाँ खो गयी! उधर दूसरी ओर उर्मि नेगी ने कई भोजपुरी, राजस्थानी व नेपाली फिल्मों में भी काम किया और खूब शोहरत दौलत भी हासिल की! 

(फ़िल्म अभिनेत्री उर्मि नेगी नए लुक में)

इस दौरान उर्मि नेगी ने गढवाली फीचर फिल्म “घरजवै” (1986), कौथीग (1987) में  कार्य किया! कौथीग फिल्म में बतौर मुख्य अभिनेत्री उनके काम को बहुत पसंद किया गया! नब्बे का दशक में यकीनन गढवाली सिनेमा का स्वर्णिम काल माना जाएगा क्योंकि इस दौरान पाराशर गौड़ की 5 मई 1983 में पहली गढवाली फीचर फिल्म ” जग्वाळ” रिलीज हुई! फिर  बिन्देश नौडियाल की ‘कभी सुख कभी दुःख ‘ (1985)   विशेश्वर नौटियाल  की “घरजवै” (1986) शिव नारायण रावत की  “प्यारो रुमाल” (1986),जय देव शील निर्मित व चरण सिंह चौहान निर्देशित फिल्म ‘कौथीग’ (1987), सुरेन्द्र बिष्ट की उदंकार (1987), कुमाउनी भाषा की पहली फीचर फिल्म जीवन बिष्ट द्वारा निर्मित  ‘मेघा आ’ (1987), किशन पटेल की रैबार (1990) इत्यादि एक दशक में आठ फ़िल्में बनी लेकिन जग्वाळ, घरजवै, कौथिग जैसी फिल्मों ने औसत कारोबार किया जबकि बाकी बॉक्स ऑफिस पर लुढक गयी! जिसके कारण किसी भी निर्माता ने दुबारा गढ़वाली फिल्म बनाने का दुस्साहस नहीं किया! 

सन 2000 के दशक में कुल 6 फीचर फिल्म बनी जिनमें निर्माता सीताराम भट्ट की बंटवारों (1992), उर्मि नेगी की फ्योंली (1993) में रिलीज हुई! पटकथा व निर्देशन अच्छा होने के बावजूद भी फ़िल्में दर्शक नहीं जुटा पाए और दोनों ही फ़िल्में घाटे का सौदा साबित हुई! अब किसी गढवाली बिजनेसमैन के पास इतना साहस नहीं था कि वह गढवाली फिल्म के लिए आगे आ सके! ऐसे में तीन साल तक लगातार विरक्ति के बाद ग्वाळ दम्पत्ति द्वारा बेटी (1996), नरेंद्र गुसाईं द्वारा चक्रचाल (1997), सूर्य प्रकाश शर्मा की ब्वारी होत इनि (1998) व पंवार कृत सतमंगल्या (2000) में बनी! चक्रचाल अपने गीतों व फिल्म पटकथा व सुंदर चित्रन के कारण सबसे सुपरहिट रही लेकिन फिर भी वह फिल्म पर लगाईं रकम वापस लाने में असफल रही! 

इसके बाद वीडी,डीवीडी फिल्मों का दौर शुरू हुआ और लगभग 100 के आस-पास इन 20 बर्षों में फीचर फिल्म व वीडिओ फिल्म बाजार में आई ! इनमें से कुछ ही फीचर फिल्म ऐसी रही जो अपना कारोबार नहीं भी दे पाई होंगी लेकिन अपना नाम जरुर कमा गयी! इनमें गढ़ रामी बौराणी, तेरी सौं, “भुली ए भुली” “सुबेरो घाम”  मेजर निराला,  याद आली तेरी टिहरी इत्यादि मुख्य हैं! 

(उत्तराखण्ड फ़िल्म फेस्टिवल में मसूरी के होटल सवाय में)

इतना काम होने के बावजूद भी 1993 से लेकर 2015-16 तक उर्मि नेगी नैपथ्य में कहाँ खोई रही कोई नहीं जानता, लेकिन जब प्रकट हुई तो उनके साथ काम करने वाले बड़े कलाकारों में जैसे फिल्म अभिनेता बलराज नेगी, बलदेव राणा आदि ने कहा कि जरुर कुछ नया धमाल होने वाला है! इस दौरान उर्मि जहाँ विदेशों में रहकर डिस्कवरी चैनल में एंकर की जिम्मेदारी निभा रही थी वहीँ स्वलिखित एक हिंदी सीरियल को अपने प्रोडक्शन हाउस के माध्यम से बना भी रही थी जिसके जल्दी ही दूरदर्शन पर प्रसारित होने की सम्भावना से इनकार नहीं किया जा सकता! यह बड़ी बात थी कि कोई महिला 1993 में सशक्त फिल्म पटकथा लिखकर जाने माने फिल्म निर्देशक चरण सिंह चौहान के नेतृत्व में अपनी लाखों की समस्त जमा पूँजी अपनी होम प्रोडक्शन की फिल्म “फ्योंली” पर खर्च कर देती है व अन्य निर्माताओं की तरह औसत व्यवसाय कर घाटा उठाती है वही फिर दुबारा 2015-16 में अपनी नयी पटकथा के साथ हाजिर होती है और “सुबेरो घाम” जैसी फीचर फिल्म उस दौर में गढवाली सिनेमा के रुपहले परदे पर लाती है जब गढवाली सिनेमा मरणासन्न पर लेटा अंतिम साँसे ले रहा था! यह सचमुच अपने आप में बड़ा दुस्साहस था क्योंकि अब तक जितने भी फिल्म निर्माताओं ने गढवाली फ़िल्में बनाई उनका दुबारा साहस नहीं हुआ कि वह झांककर गढवाली सिनेमा की ओर देख सकें!  “भुली ए भुली” के निर्माता निर्देशक नरेश खन्ना ने जितनी खूबसूरत फिल्म उत्तराखंड को दी थी उन्हें विश्वास था कि वह इससे जरुर लाभांश अर्जित करेंगे लेकिन हाय रे उत्तराखंडी कर्णधारों आप भला अपने बच्चों को बर्गर मोमो के साथ मल्टीप्लेक्स सिनेमा हाल में विदेशी फिल्म या बॉलीवुड की फिल्म के अलावा और दिखाने का साहस भला जुटा भी कैसे सकते हो क्योंकि यहाँ आकर कहीं कोई ये न कह दे या समझ ले कि अच्छा तो ये भी गढवाली है! बेचारे खन्ना साहब सदमे में आये और एक दिन यही गढवालवासियों का गढवाली प्रेम उन्हें स्वर्ग की अनंत यात्रा पर ले गया! अब एक और चौंका देने वाली खबर यह भी है कि जाने माने निर्देशक नरेश खन्ना की धर्मपत्नी ज्योति खन्ना भी गढवाली मूवी बनाने की फिराक में हैं।

उर्मी नेगी का साहस देखिये, न सिर्फ उन्होंने फिल्म बनायी बल्कि उसे भी उसी हाल में दिखाया जिसमें आजतक अन्य गढवाली फ़िल्में चलती रही हैं! धैर्य परीक्षा व बिजनेस करने के तरीके में उन्होंने हल्का सा बदलाव किया! शायद वह गढवाली सिनेमा में कदम रखने से पहले मार्केट का सर्वे व गढवाली मेंटलिटी भांप चुकी थी, उन्हें आभास हो गया था कि यूँ तो गढवाली कौम अपनी ही फिल्म देखने अआने से रही इसलिए उन्होंने उन्हें बहुत अच्छे से टैकल कर हाल तक का रास्ता दिखाया! जो कोर कसर रह गयी थी वह उन्होंने विदेशों में जाकर पूरी की व 40 बर्ष के गढवाली सिनेमा की पहली ऐसी निर्माता बनी जिसने अपनी फिल्म “सुबेरो घाम” को सुपर-डुपर ही नहीं बनाया बल्कि उससे लाभांश भी कमाया और उसी का प्रतिफल है कि वह पुनः “बथौंs” नामक गढवाली फीचर फिल्म शुरू करने जा रही हैं, जोकि इसी फिल्म का सीक्वेल है! 

उर्मि नेगी ने अपने जन्मदिन पर आज सभी उत्तराखंड वासियों के लिए अपने युट्यूब चैनल उर्मी नेगी पर “सुबेरो घाम” अपलोड़ की है व पूरे समाज से मिल रही शुभकामनाओं पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए अपने उदगार शेयर किये हैं! उर्मि नेगी को हिमालयन डिस्कवर न्यूज़ पोर्टल की ओर से जन्मदिन की ढेरों शुभकामनाएं! 

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35 बर्षों से पत्रकारिता के प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक व सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक, धार्मिक, पर्यटन, धर्म-संस्कृति सहित तमाम उन मुद्दों को बेबाकी से उठाना जो विश्व भर में लोक समाज, लोक संस्कृति व आम जनमानस के लिए लाभप्रद हो व हर उस सकारात्मक पहलु की बात करना जो सर्व जन सुखाय: सर्व जन हिताय हो.
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