Friday, March 6, 2026
Homeलोक कला-संस्कृतिआस्था!-- सर्द हवा, खुशगवार मौसम और हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में बंद...

आस्था!– सर्द हवा, खुशगवार मौसम और हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में बंद हुये बैकुंठधाम के कपाट, 6 माह देवता करेंगे धाम में पूजा..।

आस्था!– सर्द हवा, खुशगवार मौसम और हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में बंद हुये बैकुंठधाम के कपाट, 6 माह देवता करेंगे धाम में पूजा..।

(ग्राउंड जीरो से संजय चौहान।)

आखिरकार चार धामों के कपाट बंद होने की प्रक्रिया के तहत सबसे अंत में आज हिंदुओं की आस्था के सर्वोच्च तीर्थ बैकुंठ धाम बद्रीनाथ के कपाट विधि विधान के साथ कुछ देर पहले शायंकाल 6 बजकर 45 मिनट पर शीतकाल के लिए बंद दिये गये। अब आगामी 6 माह तक धाम में देवता स्वयं भगवान की पूजा करेंगे। बैकुंठधाम में कपाट बंदी के अवसर पर 10 हजार से भी अधिक तीर्थयात्री साक्षी बनें।

इस साल लगभग 2 लाख तीर्थयात्री बदरीनाथ धाम के दर्शन हेतु पहुँचे। कपाट बंदी के अवसर पर गढ़वाल स्काउट के बैंड की धुनों और हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में पूरी बद्रीशपुरी भगवान बद्रीविशाल के नारों से गुंजयमान हो गयी। कपाट बंद होने के उपरांत बद्रीशपुरी में चारों ओर सन्नाटा पसर गया है। अब 6 महीने के बाद ही धाम में पसरा सन्नाटा टूटेगा। इस साल लगभग 2 लाख के करीब तीर्थयात्री बद्रीनाथ धाम पहुंचे। कपाट बंद होने के अवसर पर बद्रीनाथ मंदिर को 20 कुंतल गेंदें के फूलों से भव्य रूप से सजाया गया था।

आज अतिम दिन कुछ इस तरह से हुये कपाट बंद होने की प्रक्रिया..।

आज भगवान बद्रीविशाल के कपाट बंद होने के अवसर पर भगवान का श्रृंगार हजारों फूलों से किया गया। जबकि पूरे गर्भग्रह को भी फूलों से सजाया गया। फूलों के बीच भगवान श्याम वर्णीय पदमासन में बैठे हैं। फूलों से सजे भगवान आकर्षक रुप मे अलौकिक नजर आये। कपाट बंद से पूर्व बद्रीश पंचायत अर्थात भगवान के सानिध्य में विराजमान उद्धव जी, कुबेर जी महाराज को गर्भग्रह से बाहर लाया गया। जैसे ही उद्वव जी कुबेर जी का विग्रह बाहर लाया गया वैसे ही बदरीनाथ जी के रावल स्त्री वेश में लक्ष्मी जी की सखी बनकर लक्ष्मी जी के विग्रह को गोदी में लेकर बदरीनाथ मंदिर में भगवान के सानिध्य में विराजमान हुये। तत्पश्चात भगवान को घृत कम्बल पहनाया गया। ये ऊनी कंबल भारत के आखिरी गांव माणा की बहनों द्वारा बुनकर दिया गया। बद्रीनाथ के रावल नें इस पर घी लगाया। और भगवान को घृत कम्बल ओढाया। तत्पश्चात हजारों श्रद्धालुओं, खुशगवार मौसम और सर्द हवाओं के बीच बैकुंठधाम के कपाट शायंकाल 6 बजकर 45 मिनट पर आगामी शीतकाल के लिए बंद कर दिये गये।

कुछ ऐसे होती है बद्रीनाथ के कपाट बंद होने की प्रक्रिया..

बद्रीनाथ धाम के कपाट बंद होने की प्रक्रिया के अंतर्गत पंच पूजायें 16 नवंबर से शुरू हो गयी थी। 16 नवंबर को प्रातः श्री गणेश जी की पूजा आराधना एवं देर शाम को भगवान गणेश जी के कपाट बंद हुए। 17 नवंबर को श्री बद्रीनाथ मंदिर में भोग लगने के पश्चात दिन में रावल ईश्वर प्रसाद नम्बुदरी द्वारा पूजा-अर्चना की भगवान आदि केदारेश्वर को अन्नकूट अर्थात पके चावलों का भोग चढ़ाया गया। आरती एवं दीप प्रज्वलन के पश्चात दिन में 2 बजे आदिकेदारेश्वर एवं आदि गुरू शंकराचार्य मंदिर के कपाट शीतकाल हेतु बंद हुए। 18 नवंबर को वेदों एवं धार्मिक पुस्तकों की पूजा के बाद देर शाम से श्री बद्रीनाथ धाम में वेद ऋचाओं का पाठ बंद कर दिया गया। 19 नवम्बर को रावल द्वारा भगवान बद्रीविशाल को भोग लगाने के पश्चात पूजा-अर्चना कर मां लक्ष्मी को न्यौता दिया गया। आज 20 नवंबर को प्रात:काल भगवान का श्रृंगार एवं एवं रावल द्वारा स्त्री भेष धारण कर मां लक्ष्मी को भगवान बद्रीविशाल के सानिध्य में विराजमान किया गया। अपराह्न के पश्चात भगवान बद्रीविशाल को घृतकंबल पहनाया गया। रावल जी द्वारा कपाट बंद करने की प्रक्रिया के साथ शांय 6 बजकर 45 मिनट पर भगवान बदरीनाथ के कपाट शीतकाल के लिए आम श्रद्धालुओं के लिए बंद कर दिये गये। कल 21 नवंबर को उद्धव और कुबेर की डोली पांडुकेश्वर तथा आदि गुरू शंकराचार्य की गद्दी नृसिंह मंदिर जोशीमठ हेतु प्रस्थान करेंगी एवं रात्रि विश्राम योग-ध्यान बदरी पांडुकेश्वर में होगा। 22 नवंबर आदि गुरू शंकराचार्य की गद्दी के साथ रावल नृसिंह मंदिर जोशीमठ पहुंचेगी जहां से शीतकालीन पूजाएं शुरू हो जाएंगी। अब 6 महीने बद्रीनाथ की पूजा खुद देवता करेंगे। कपाट बंद होने के अवसर पर देवस्थानम बोर्ड के अधिकारी-कर्मचारी, हक-हकूकधारी एवं हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं मौजूद रहे। हाईकोर्ट के निर्णय के बाद चार धामों में तीर्थयात्रियों के आने पर लगी पाबंदी हटने के बाद लगभग 5 लाख से अधिक तीर्थयात्रियों नें चार धामों के दर्शन किये। बद्रीनाथ में 2 लाख से अधिक तीर्थयात्री पहुंचे। चमोली जिले में 20 नवम्बर के सार्वजनिक अवकाश के कारण काफी संख्या में लोग बद्रीनाथ धाम पहुंचे थे। अब 6 माह के उपरांत ही चार धामों के कपाट खुलेंगे।

इस साल इन तिथियों को हुये बंद चार धामों के कपाट!

गंगोत्री- 5 नवम्बर 2021
यमुनोत्री- 6 नवम्बर 2021
केदारनाथ- 6 नवम्बर 2021
बद्रीनाथ- 20 नवम्बर 2021

2021 में महज दो महीनों में चार धाम में पहुंचे 5 लाख तीर्थ यात्री, सबसे ज्यादा केदारनाथ पहुंचे श्रद्धालु..
गंगोत्री– 33,166
यमुनोत्री– 33136
केदारनाथ– 239592
हेमकुंड साहिब — 9165
बदरीनाथ– 2 लाख (लगभग)

चार धामों में पिछले 10 सालों में पहुंचे श्रद्धालुओ की संख्या–

वर्ष 2012 – 27,23,311
… 2013 – 11,88,073
… 2014- 3,33,088
… 2015 – 8,72,529
… 2016 – 15,13,345
… 2017 – 23,22,611
… 2018 – 27,81,428
… 2019 – 34,10,035
… 2020 – 3,30,196
.. . 2021- 5 लाख से अधिक

जय बद्रीविशाल, अपनी कृपा बनाये रखना…।

Himalayan Discover
Himalayan Discoverhttps://himalayandiscover.com
35 बर्षों से पत्रकारिता के प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक व सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक, धार्मिक, पर्यटन, धर्म-संस्कृति सहित तमाम उन मुद्दों को बेबाकी से उठाना जो विश्व भर में लोक समाज, लोक संस्कृति व आम जनमानस के लिए लाभप्रद हो व हर उस सकारात्मक पहलु की बात करना जो सर्व जन सुखाय: सर्व जन हिताय हो.
RELATED ARTICLES