देहरादून (हि. डिस्कवर)
उत्तराखंड शिक्षा मंत्री डॉ धन सिंह रावत की शिक्षक संगठनों की साथ पहली बैठक से पहले ही संगठनों में जमकर रार शुरू हो गई है।शिक्षा मंत्री डॉ धन सिंह रावत ने आज विभानसभा स्थित सभागार में प्रदेशभर के विभिन्न शिक्षक संघों के पदाधिकारियों के साथ बैठक कर उनकी मांगों पर चर्चा की। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिये कि विभिन्न शिक्षक संगठनों की निदेशालय स्तर की मांगों का निराकरण एक माह के भीतर किया जाय तथा शासन स्तर से संबंधित मांगों पर कार्यवाही में तेजी लाई जाय।
वहीं राजकीय शिक्षक संघ से जुड़े निवर्तमान और पूर्व पदाधिकारियों ने बैठक के औचित्य पर सवाल उठाए हैं। अधिकतर का कहना था कि जब संगठन ही नहीं है तब कौन पदाधिकारी व कौन शिक्षक संघ के नेता?
संघ से जुड़े ज्यादात्तर शिक्षकों का मानना है कि वर्तमान कार्यकरिणी अस्तित्व में नहीं है। केवल दरबारी प्रतिनिधियों को बुलाने से शिक्षक की वास्तविक समस्याओं पर चर्चा होना मुश्किल है। दूसरी तरफ सरकारी स्कूल शिक्षकों के प्रदेश के सबसे बड़े संगठन प्राथमिक शिक्षक संघ को अब तक बैठक की सूचना ही नहीं दी गई।
वहीं एक ओर राजकीय शिक्षक संघ के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राम सिंह चौहान और भीम सिंह ने कहा कि मंत्री जी की पहल स्वागतयोग्य है। लेकिन उन्हें हकीकत भी समझनी होगी। इस वक्त संघ में शिक्षकों का वास्तविक कोई प्रतिनिधि नहीं है। यह कार्यकारिणी वर्ष 2019 में भंग हो चुकी है और कुछ तत्व इसे अपने हितों को पूरा करने के लिए इसे अस्तित्व में होना प्रचारित कर रहे हैं। राम सिंह चौहान का कहना है कि जो लोग अपने आप को वर्तमान पदाधिकारी मान रहे हैं वे अवैध ढंग से विगत पांच वर्षों से संगठन पर गलत ढंग से काबिज हैं व मनमाने तरीक़े से संगठन को हांकने की कोशिश में लगे हुए हैं।
उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि इन लोगों ने पिछले पांच वर्षों से शिक्षक शिक्षिकाओं के सदस्यता शुल्क में अनियमितता की हुई है। निदेशक- माध्यमिक शिक्षा के शुल्क का लेखा-जोखा प्रस्तुत करने को लिखित आदेश के बावजूद भी आज तक शुल्क का लेखा-जोखा स्पष्ट नहीं किया गया। ऐसे में ये लोग सन्देह के घेरे में हैं।
हिंदुस्तान अखबार के पत्रकार चंद्रशेखर बुडाकोटी ने हिंदुस्तान के लिए खबर में लिखा कि चौहान ने कहा कि राजकीय शिक्षक संघ उत्तराखण्ड के अस्तित्व को समाप्त करने के लिए इन तथाकथित पदाधिकारियों के साथ साथ विभाग भी जिम्मेदार है। इससे अच्छा तो विभाग संयोजक मंडल गठित करवा कर तत्काल राजकीय शिक्षक संघ उत्तराखण्ड के चुनाव संपन्न करवाता और एक मान्यता प्राप्त कार्यकारिणी अच्छे ढंग से शिक्षक शिक्षिकाओं संदर्भित लंबित प्रकरणों के निराकरण हेतु मजबूती से सरकार शासन के समक्ष पक्ष रखती ।
निवर्तमान प्रदेश उपाध्यक्ष मुकेश प्रसाद बहुगुणा ने कहा कि सोशल मीडिया पर खबर पढ़ी कि आज कहीं किसी स्थान पर किन्ही शिक्षक संगठन के प्रतिनिधियों की शिक्षा मंत्री के साथ वार्ता होने जा रही है। लेकिन वार्ता का एजेंडा क्या होगा? पता नहीं। वार्ता में प्रतिनिधित्व किस आधार पर होगा? पता नहीं। बहुगुणा ने कहा कि सामान्य रूप से किसी भी मान्यता प्राप्त संगठन का प्रतिनिधि वे होते हैं जिन्हे निर्वाचित किया गया हो, या निर्वाचित सदस्यों द्वारा आधिकारिक रूप से नामित किया गया हो। किंतु जब कोई निर्वाचित कार्यकारिणि अस्तित्व में ही न तो प्रतिनिधि कौन होगा? यह किसने तय किया? बहुगुणा ने तंज कसते हुए कहा कि दरबारी प्रतिनिधि ये मान चुके हैं कि वही प्रतिनिधि बनने का दैवी अधिकार रखते हैं?
उन्होंने अपनी फेसबुक वाल पर भी इस सम्बंध में लिखा कि दरबारी प्रतिनिधि ? सोशल मीडिया पर खबर पढ़ी कि आज कहीं किसी स्थान पर किन्ही शिक्षक संगठन के प्रतिनिधियों की वार्ता होने जा रही है , माननीय शिक्षा मन्त्री जी के साथ…
वार्ता का एजेंडा क्या होगा? पता नहीं… वार्ता में प्रतिनिधित्व किस आधार पर होगा? पता नहीं..सामान्य रूप से किसी भी मान्यता प्राप्त संगठन का प्रतिनिधि वे होते हैं जिन्हे निर्वाचित किया गया हो, या निर्वाचित सदस्यों द्वारा आधिकारिक रूप से नामित किया गया हो…किंतु जब कोई निर्वाचित कार्यकारिणि अस्तित्व में ही न तो प्रतिनिधि कौन होगा? यह किसने तय किया?
या दरबारी ये मान चुके हैं कि वही प्रतिनिधि बनने का दैवी अधिकार रखते हैं?
शिक्षक अनिल बडोनी ने कहा कि संगठन की कार्यकारिणी को अध्यक्ष द्वारा भंग किया जा चुका है। इसलिए आज होने वाली वार्ता संगठन की वार्ता के बजाए व्यक्तिगत वार्ता हो जाएगी। बेहतर है पहले चुनाव हों फिर चुनी हुई कार्यकारिणी से सांगठनिक वार्ता हो।
दूसरी तरफ, प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष दिग्विजय सिंह चौहान ने कहा कि उन्हें अब तक बैठक की सूचना नहीं मिली है। प्राथमिक शिक्षक संघ प्रदेश के प्रतिष्ठित शिक्षक संघ है। बिना विधिवत निमंत्रण के संघ इस बैठक में भाग नहीं लेगा।


