(मनोज इष्टवाल)।
भारत बर्ष…एक ऐसा नाम जहां अपनी काबिलियत के दम पर एक चाय बेचने वाला व्यक्ति सिर्फ यहां का प्रधानमंत्री नहीं बनता बल्कि पूरे विश्व को अपना मुरीद बना देता है। एक ऐसी बेटी देश के सर्वोच्च पद “राष्ट्रपति” पद पर आसीन होती है जिसके गांव में अभी तक सड़क भी ढंग से नहीं पहुंची है। एक आदिवासी महिला जिसने गरीबी को बहुत निकट से देखा झेला और अब अपनी प्रतिभा के दम पर देश की राष्ट्रपति बन बैठी हैं। यही तो इस देश के लोकतंत्र की खूबसूरती है।
आज देश को 15वें राष्ट्रपति के रूप में आदिवासी जनजातीय महिला नेतृत्व मिल गया है। जो अब तक बने सभी राष्ट्रपतियों में सबसे युवा कही जा सकती हैं।द्रौपदी मुर्मू ने देश के 15वें राष्ट्रपति ( पद की शपथ ले ली है। संसद के केंद्रीय कक्ष में प्रधान न्यायाधीश एनवी रमण द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्रपति पद की शपथ दिलाई। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने चुनाव में विपक्षी उम्मीदवार यशवंत सिन्हा को हराया था। द्रौपदी मुर्मू आजादी के बाद पैदा होने वाली पहली और शीर्ष पद पर काबिज होने वाली सबसे कम उम्र की राष्ट्रपति हैं। इसके साथ-साथ वह राष्ट्रपति बनने वाली दूसरी महिला और पहली आदिवासी राष्ट्रपति भी हैं। मुर्मू ने पूर्व राष्ट्रपति नीलम संजीव रेड्डी का रिकॉर्ड तोड़ा है। नीलम संजीव रेड्डी ने जब पद ग्रहण किया था तब उनकी उम्र 64 साल 2 महीने 6 दिन थी। वहीं, द्रौपदी मुर्मू की उम्र भी 64 साल है, लेकिन शपथ ग्रहण यानी आज के दिन उनकी उम्र 64 साल एक महीना और चार दिन है।
संसद के केंद्रीय कक्ष में द्रौपदी मुर्मू ने आज सोमवार को देश के सर्वोच्चित पद की शपथ ली। राष्ट्रपति पद की शपथ लेने के साथ ही मुर्मू देश की सबसे युवा राष्ट्रपति बन गई हैं। उन्होंने अपने संबोधन में सभी देशवासियों का विनम्रता के साथ अभिनंदन किया। उन्होंने बताया कि वह देश की ऐसी पहली राष्ट्रपति हैं जिनका जन्म आजाद भारत में हुआ था। उन्होंने अपनी पृष्ठभूमि के बारे में बात करते हुए कहा है कि मैं एक ऐसी जगह से आती हूं जहां शिक्षा प्राप्त करना भी सपने जैसा था।
राष्ट्रपति पद की शपथ लेने के पश्चात उन्होंने संसद के केन्द्रीय कक्ष में संबोधित करते हुए कहा, ‘मैं भारत के समस्त नागरिकों की आशा-आकांक्षा और अधिकारों की प्रतीक इस पवित्र संसद से सभी देशवासियों का पूरी विनम्रता से अभिनंदन करती हूँ। आपकी आत्मीयता, आपका विश्वास और आपका सहयोग, मेरे लिए इस नए दायित्व को निभाने में मेरी बहुत बड़ी ताकत होंगे।’
‘भारत के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर निर्वाचित करने के लिए मैं सभी सांसदों और सभी विधानसभा सदस्यों का हार्दिक आभार व्यक्त करती हूं। आपका मत देश के करोड़ों नागरिकों के विश्वास की अभिव्यक्ति है। हमारे स्वाधीनता सेनानियों ने आजाद हिंदुस्तान के हम नागरिकों से जो अपेक्षाएं की थीं, उनकी पूर्ति के लिए इस अमृतकाल में हमें तेज गति से काम करना है. इन 25 वर्षों में अमृतकाल की सिद्धि का रास्ता दो पटरियों पर आगे बढ़ेगा- सबका प्रयास और सबका कर्तव्य।’
उन्होंने कहा की मुझे राष्ट्रपति के रूप में देश ने एक ऐसे महत्वपूर्ण कालखंड में चुना है जब हम अपनी आज़ादी का अमृत महोत्सव मना रहे हैं। आज से कुछ दिन बाद ही देश अपनी स्वाधीनता के 75 वर्ष पूरे करेगा।
ये भी एक संयोग है कि जब देश अपनी आजादी के 50वें वर्ष का पर्व मना रहा था तभी मेरे राजनीतिक जीवन की शुरुआत हुई थी। और आज आजादी के 75वें वर्ष में मुझे ये नया दायित्व मिला है।
ऐसे ऐतिहासिक समय में जब भारत अगले 25 वर्षों के विजन को हासिल करने के लिए पूरी ऊर्जा से जुटा हुआ है, मुझे ये जिम्मेदारी मिलना मेरा बहुत बड़ा सौभाग्य है।
मुर्मू ने कहा, ‘मैं देश की ऐसी पहली राष्ट्रपति भी हूँ जिसका जन्म आज़ाद भारत में हुआ है। मैंने अपनी जीवन यात्रा ओडिशा के एक छोटे से आदिवासी गाँव से शुरू की थी। मैं जिस पृष्ठभूमि से आती हूँ, वहां मेरे लिये प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त करना भी एक सपने जैसा ही था. लेकिन अनेक बाधाओं के बावजूद मेरा संकल्प दृढ़ रहा और मैं कॉलेज जाने वाली अपने गांव की पहली बेटी बनी।’
द्रोपदी मुर्मू ने अपने संबोधन में कहा कि ‘मैं जनजातीय समाज से हूँ, और वार्ड कौन्सिलर से लेकर भारत की राष्ट्रपति बनने तक का अवसर मुझे मिला है। यह लोकतंत्र की जननी भारतवर्ष की महानता है। ये हमारे लोकतंत्र की ही शक्ति है कि उसमें एक गरीब घर में पैदा हुई बेटी, दूर-सुदूर आदिवासी क्षेत्र में पैदा हुई बेटी, भारत के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंच सकती है।’
‘राष्ट्रपति के पद तक पहुँचना, मेरी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, ये भारत के प्रत्येक गरीब की उपलब्धि है। मेरा निर्वाचन इस बात का सबूत है कि भारत में गरीब सपने देख भी सकता है और उन्हें पूरा भी कर सकता है।’
अपने आदिवासी होने पर मुर्मू ने कहा, ‘मेरे लिए बहुत संतोष की बात है कि जो सदियों से वंचित रहे, जो विकास के लाभ से दूर रहे, वे गरीब, दलित, पिछड़े तथा आदिवासी मुझ में अपना प्रतिबिंब देख रहे हैं. मेरे इस निर्वाचन में देश के गरीब का आशीर्वाद शामिल है, देश की करोड़ों महिलाओं और बेटियों के सपनों और सामर्थ्य की झलक है।’


