Friday, May 1, 2026
Homeउत्तराखंडदून विश्वविद्यालय में डॉ ईशान पुरोहित के काव्य संग्रह "मैं क्यों हारूँ"...

दून विश्वविद्यालय में डॉ ईशान पुरोहित के काव्य संग्रह “मैं क्यों हारूँ” का लोकार्पण।

एसडीएफपी ट्रस्ट और विनसर प्रकाशन ने किया आयोजन।

देहरादून (हि. डिस्कवर)।

दून विश्वविद्यालय के रंगमन्च, लोक व प्रदर्शनकारी कला विभाग, एसडीएफपी ट्रस्ट और विनसर प्रकाशन के संयुक्त तत्वावधान में विश्वविद्यालय के सीनेट हॉल में ‘पहल’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता पदमश्री प्रो. आदित्यनारायण पुरोहित ने की जबकि प्रख्यात लोकगायक व कवि नरेंद्र सिंह नेगी इस अवसर पर मुख्य अतिथि थे।

कार्यक्रम की मुख्य वक्ता दून विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल ने उत्तराखण्ड के संदर्भ में उध्य्मिता के भाव के प्रसार पर बल देते हुए क्षेत्र् की अस्मिता का बोध कराया।युकोस्ट के महानिदेशक, डा. राजेंद्र डोभाल, प्रो. डी. आर. पुरोहित और प्रो. के. सी. पुरोहित थे।

ईशान पुरोहित के नए काव्य संग्रह मैंं क्यों हारु की समीक्षा श्रीमती बीना बेजवाल, श्री गिरीश सुंदरीयाल व डा. अंजू भट्ट ने की। कार्यक्रम के प्रस्तोता गढ़वाल के ख्यातिप्राप्त कवि गणेश खुगशाल ‘गणी’ रहे।
अपनी तरह के इस विशिष्ट कार्यक्रम के आयोजक डा. ईशान पुरोहित, डा. गुंजन पुरोहित और कीर्ति नवानी थे।
इस अवसर पर उत्तराखण्ड के परिप्रेक्ष्य में उध्य्मिता के कुछ सफल प्रयास शीर्षक से आयोजित सत्र में विनय के.डी. व अखिलेश डिमरी ने ग्रामीण पर्यटन पर अरन्य रंजन ने सत्कार्,मंजू टम्टा ने लोक संस्कृति, प्रकाशन् क्षेत्र् में कीर्ति नवानी, पारम्परिक पहनावा पर कैलाश भट्ट और स्थानीय उत्पाद पर प्रस्तुतिकरण देते हुए अपनी जीवन यात्रा और उध्यमिता से अवगत कराया। कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल ने प्रतिभागियो को स्मृति चिह्न् देकर सम्मनित किया।

डा. ईशान पुरोहित के काव्य संग्रह ”मैंं क्यों हारु” का लोकार्पण प्रो. आदित्य नारायण पुरोहित डा. नरेंद्र सिंह नेगी, प्रो. डी. आर. पुरोहित, प्रो. सुरेखा डंगवाल, प्रो, के. सी. पुरोहित ने किया।

अंत में कवियत्री सम्मेलन सत्र की अध्य्क्षता श्रीमती बीना बेंजवाल ने की जबकि डा. अंजू भट्ट, ज्योत्सना जोशी, प्रेमलता सजवाण, मधुर वदिनी तिवारी, कान्ता घिल्डियाल, सुनीता चौहान एवं गीता गैरोला ने काव्य पाठ कर श्रोताओ को मन्त्रमुग्ध किया। गौरतलब है कि डा. ईशान पुरोहित का यह तीसरा काव्य संग्रह प्रकाशित हुआ है। इससे पूर्व उनके दो काव्य संग्रह ‘ जीवन तो चलता रहता है’ और ‘बाकी हूँ अभी ‘ प्रकाशित हो चुके हैं।

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