(मनोज इष्टवाल)
कोरोना महामारी ने जहां पूरे देश की देशकाल परिस्थितियां सब बदल के रख दी हैं। देश की राजधानी दिल्ली व मुम्बई की स्थिति किसी से छुपी नहीं है और उत्तराखंड में आते दिन कोरोना केसों का रेशों व मृत्यु दर घट बढ़ रहा है। ऐसे में क्या यह फैसला सही है कि सचिवालय बन्द रहे व कामकाज ठप्प!
यह समय हम सबके लिए बेहद संवेदनशील है व इस दौर में हर कदम को फूंक फूंककर रख देने जैसी बात। हर अंगुली उठकर मुख्यमंत्री की कार्यप्रणाली की तरफ बढ़ जाती है लेकिन कोई ये नहीं पूछता कि आखिर आपदाओं से लड़ने वाले पूरे तंत्र का संचालन करने वाला सचिवालय क्यों बन्द कर दिया गया है?
नए मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने अपनी कार्यभार ढंग से ग्रहण भी नहीं किया था कि पहले वनाग्नि, फिर कुम्भ और अब कोरोना जैसे महामारी ने उनके आगे पहाड़ जैसी समस्याएं रख दी हैं। हम सब घरों में कैद हैं या फिर हाथ में मोबाइल लेकर सिस्टम को कोस रहे हैं लेकिन सिस्टम के उस अंग के बारे में कोई सवाल खड़े नहीं कर रहा है जिससे सम्पूर्ण प्रदेश चलता है। सिर्फ आईएएस लॉबी में नोडल अधिकारी नियुक्त कर दिये जाने से प्रशासनिक काम काज का ढर्रा नहीं चलाया जा सकता है। इस बात को सिर्फ सचिवालय कर्मचारी संघ या अधिकारी संघ ही नहीं जानता बल्कि आम जनता भी जानती है। ऐसे में स्वयं अधिकारी व कर्मचारी संगठनों को स्वयं पहल करते हुए आगे आना चाहिए ताकि कोरोना महामारी के दौरान चरमरा रही व्यवस्थाएं सम्भाली जा सकें।
मुख्यमंत्री, मंत्रिमंडल व मुख्यसचिव को कार्यमंत्रणा करते हुए पूरा दिन न सही आधे दिन के लिए सचिवालय खुलवा देना चाहिए ताकि जरूरी काम-काज प्रोसेसिंग में लाये जा सकें व आपदा प्रबंधन सहित सभी सम्बंधित विभाग गतिशील किये जा सके।

