लखनऊ/देहरादून (हि. डिस्कवर)
फ्लैग कॉड ऑफ इंडिया 2002 में सेक्शन ।v में वर्णित है कि
No other flag or bunting shall be plced higher than than or above, expect as hereinafter provides, side by side with the nation flag; nor shall any object including glowers or garlands or emblem be placed on or above the flag-mastfrom which the is flown.
(कोई अन्य ध्वज या बंटिंग राष्ट्र ध्वज के साथ कंधे से कंधा मिलाकर, अपेक्षा से अधिक या ऊपर नहीं लगाया जाएगा, जैसा कि इसके बाद प्रदान किया गया है; न ही कोई वस्तु, जिसमें चमक या माला या प्रतीक भी शामिल है, उस ध्वज-मस्तूल पर या उसके ऊपर नहीं रखा जाएगा, जिससे वह फहराया जाता है।)
ऐसे में प्रश्न यह उठता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदर मोदी व भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा की मौजूदगी में कहीं भाजपा ने यह बड़ी चूक तो नहीं कर दी कि तिरंगे के एक कोने में ही सही तिरंगे के ऊपर पार्टी ध्वज भाजपा के हिंदूवादी नेता कल्याण सिंह के पार्थिक शरीर के पैरों के छोर में रख दिया।
बहरहाल भारतीय राजनीति में हिन्दुत्व के पुरोधा रहे पूर्व राज्यपाल व पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के निधन से रविवार को राजधानी लखनऊ में सर्वत्र शोक की लहर रही। उनके पार्थिव शरीर को जहां भी ले जाया गया श्रद्धांजलि देने वालों का हुजूम उमड़ा। जिन राहों से पार्थिव शरीर गुजरा लोगों ने जयश्री राम के नारों से उन्हें श्रद्धांजलि दी। माल एवेन्यू स्थित उनके सरकारी आवास, विधानभवन तथा भाजपा कार्यालय में बड़ी संख्या में राजनीतिक हस्तियों और शुभचिंतकों ने उनका अंतिम दर्शन किया।
यहां यह बात सोचने व समझने वाली है कि क्या राजनेताओं को “फ्लैग कॉड ऑफ इंडिया” की क्या कभी भी जानकारी नहीं दी जाती? क्या कभी राजनेताओं ने यह जानने की कोशिश नहीं की होगी कि तिरंगे पर लिपटे शहीदों के शव पर कभी भी आर्मी अपना फ्लैग नहीं लगाती और ना ही तिरंगे के ऊपर अन्य कोई चिह्न रखती है।
ऐसे में प्रश्न यह भी उठता है कि क्या राजनेताओं को मिले अधिकारियों ने भी तिरंगे अर्थात “फ्लैग कॉड ऑफ इंडिया” के सेक्शन IV के कॉलम 3.16 का अध्ययन नहीं किया है। यह मानवीय भूल हो सकती है, और किसी से भी हो सकती है।
जहां एक कैमरे में अलग अलग एंगल से फोटो सामने आई हैं उसमें तिरँगे के अशोक चक्र से काफी दूर या फिर तिरंगे के एक छोटे से छोर के ऊपर भाजपा का प्रतीक चिह्न दिखाई देता है। तो क्या ऐसा किया जा सकता है या फिर यह सब मानवीय भूल समझी जा सकती है। इस सम्बंध में विधि सम्मत राय के बिना कुछ भी अधिक कहना कठिन होगा फिर भी सोशल साइट पर चर्चाओं का बाजार गर्म है। मुझे तो लगता है कि यह मात्र मानवीय भूल हो सकती है जो पार्टी के एक कद्दावर नेता को पार्टी ने सम्मान के तौर पर अर्पित करने की कोशिश की है।



