Wednesday, June 19, 2024
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जैव-विविधता!– प्रकृति और पर्यावरणीय के प्रति जागरूकता, जबाबदेही और जिम्मेदारी का सबको बखूबी करना होगा निर्वहन..।

जैव-विविधता!– प्रकृति और पर्यावरणीय के प्रति जागरूकता, जबाबदेही और जिम्मेदारी का सबको बखूबी करना होगा निर्वहन..।

(अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस विशेष)
ग्राउंड जीरो से संजय चौहान!

आज अंतरराष्ट्रीय जैव-विविधता दिवस है। यह हर साल 22 मई को दुनियाभर में एक साथ मनाया जाता है। जिसका मुख्य उद्देश्य लोगों को जैव विविधता के प्रति जागरूक करना है। इस साल के अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस की थीम ‘हम समाधान का हिस्सा है’ (we are the part of solution)। एक रिपोर्ट की मानें तो आने वाले समय में पौधों और जानवरों की प्रजातियों में से 25 फीसदी विलुप्त अवस्था के कगार पर है। वर्तमान कोरोना काल में ऑक्सीजन की कमी नें लोगों को पर्यावरण के प्रति सजग किया है। बदलते परिवेश में पर्यावरण संतुलन के लिए हमें प्रकृति और पशु पक्षियों का संरक्षण करना भी बेहद जरूरी है।

— क्या है जैव विविधता दिवस !

प्राकृतिक एवं पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में जैव-विविधता का महत्व देखते हुए ही जैव-विविधता दिवस को अंतरराष्ट्रीय दिवस के रूप में मनाया जाता है। हमारे जीवन में जैव-विविधता का काफी महत्व है। हमें एक ऐसे पर्यावरण का निर्माण करना है, जो जैव- विविधता में समृद्ध, टिकाऊ और आर्थिक गतिविधियों के लिए हमें अवसर प्रदान कर सकें। जैव-विविधता के कमी होने से प्राकृतिक आपदा जैसे बाढ़, सूखा और तूफान आदि आने का खतरा और अधिक बढ़ जाता है अत: हमारे लिए जैव-विविधता का संरक्षण बहुत जरूरी है। लाखों विशिष्ट जैविक की कई प्रजातियों के रूप में पृथ्वी पर जीवन उपस्थित है और हमारा जीवन प्रकृति का अनुपम उपहार है। अत: पेड़-पौधे, अनेक प्रकार के जीव-जंतु, मिट्टी, हवा, पानी, महासागर-पठार, समुद्र-नदियां इन सभी प्रकृति की देन का हमें संरक्षण करना चाहिए, क्योंकि यही हमारे अस्तित्व एवं विकास के लिए काम आती है।

— भारत में जैव विविधता!

जैवविविधता का संरक्षण और उसका निरंतर उपयोग करना भारत के लोकाचार का एक अंतरंग हिस्सा है। अभूतपूर्व भौगोलिक और सांस्कृतिक विशेषताओं ने मिलकर जीव जंतुओं की इस अद्भुत विविधता में योगदान दिया है जिससे हर स्तर पर अपार जैविक विविधता देखने को मिलती है। भारत में दुनिया का केवल 2.4 प्रतिशत भू-भाग है जिसके 7 से 8 प्रतिशत भू-भाग पर विश्व की विभिन्न प्रजातियां पाई जाती हैं। प्रजातियों की संवृधि के मामले में भारत स्तनधारियों में 7वें, पक्षियों में 9वें और सरीसृप में 5वें स्थान पर है। विश्व के 11 प्रतिशत के मुकाबले भारत में 44 प्रतिशत भू-भाग पर फसलें बोई जाती हैं। भारत के 23.39 प्रतिशत भू-भाग पर पेड़ और जंगल फैले हुए हैं। दुनियाभर की 34 चिह्नित जगहों में से भारत में जैवविविधता के तीन हॉटस्पॉट हैं- जैसे हिमालय, भारत बर्मा, श्रीलंका और पश्चिमी घाट। यह वनस्पति और जीव जंतुओं के मामले में बहुत समृद्ध है और जैव विविधता को पालने का कार्य करता है।

–कब मनाया जाता है जैव विविधता दिवस!

संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 20 दिसम्बर 2000 को 55/201 प्रस्ताव पारित करके 22 मई को अन्तराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस के रूप में मनाये जाने का संकल्प लिया। इस दिवस का उद्देश्य 22 मई 1992 को पारित किये गये नैरोबी एक्ट का पालन करना तथा इस संबंध में लोगों को जागरुक करना है। अधिकारिक घोषणा से पहले 29 दिसम्बर को अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस मनाया जाता था।

वास्तव में देखा जाए तो बढ़ते पर्यावरणीय असंतुलन के इस दौर में पर्यावरण के अहम मुद्दों में से आज जैवविविधता का संरक्षण एक अहम मुद्दा है, विश्व की जैवविविधता को कई कारणों से चुनौती मिलती है। आज जैव विविधता के संवंर्धन और उसके संरक्षण की बड़ी चुनौती सबके सामने है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को जैव विविधता के संरक्षण और संवर्धन हेतु लिए अपना अमूल्य योगदान देना होगा।

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35 बर्षों से पत्रकारिता के प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक व सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक, धार्मिक, पर्यटन, धर्म-संस्कृति सहित तमाम उन मुद्दों को बेबाकी से उठाना जो विश्व भर में लोक समाज, लोक संस्कृति व आम जनमानस के लिए लाभप्रद हो व हर उस सकारात्मक पहलु की बात करना जो सर्व जन सुखाय: सर्व जन हिताय हो.
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