◆ आर्मी जैसी ड्रेस पहनकर बांट रहे सरकारी दवा, कंपनी डायरेक्टर इस्तेमाल करता है अशोक चिन्ह।
(गुणानंद जखमोला)
यदि किसी की सांस की समस्या हो और उसे दर्द या बुखार की गोली दे दी जाए। या पैदल चलते हुए पैरों में सूजन आ जाएं और एंटीबायोटिक दवा दी जाएं तो क्या वह राहत महसूस करेगा। शायद नहीं, लेकिन आरोप है कि केदारनाथ में तीर्थयात्रियों के साथ कुछ ऐसा ही हो रहा है।
यहां प्रशासन ने सिक्स सिग्मा कंपनी को अनुमति दी है कि वह केदारनाथ आने वाले तीर्थयात्रियों को हेल्थ सर्विसेज दे। खेल क्या है ये समझ से बाहर है। इस कंपनी के स्टाफ की योग्यता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि कंपनी ने यहां अनस्किल्ड स्टाफ की तैनाती की है और वार्ड ब्यॉय टाइप कर्मचारी यहां आने वाले तीर्थयात्रियों को अनाप-शनाप दवाएं दे रहे हैं। जबकि सिक्स सिग्मा ने दावा किया था कि वह हाई एल्टीटयूट हेल्थ मैनेजमेंट में एक्सपर्ट हैं और विशेषज्ञ डाक्टरों की यहां तैनाती होगी।
हालांकि केदारनाथ में एक सरकारी डाक्टर, फार्मासिस्ट और अन्य स्टाफ भी तैनात है लेकिन केदारनाथ धाम में रोजाना वीवीआईपी आ रहे हैं। प्रोटोकाल के हिसाब से डाक्टर को वीवीआईपी डयूटी पर जाना होता है। ऐसे में यहां आने वाले मरीजों को सिक्स सिग्मा के अकुशल स्टाफ के हवाले रहना पड़ रहा है। सिक्स सिग्मा के सभी कर्मचारी वहां डाक्टर बने बैठे हैं। सिक्स सिग्मा के ये कर्मचारी आर्मी टाइप ड्रेस पहने होते हैं। ऐसे में तीर्थयात्री आंख मूंदे दवाई ले रहे हैं। यह भी उल्लेखनीय है कि सिक्स सिग्मा के ये कर्मचारी सरकारी अस्पताल, सरकारी संसाधन और सरकारी दवाई का इस्तेमाल कर रहे हैं। जबकि धाम में ही तैनात विवेकानंद हेल्थ मिशन के अस्पताल में अच्छे डाक्टर, मशीनें और उनकी अपनी दवाएं तीर्थयात्रियों को दी जा रही हैं।
यह वही सिक्स सिग्मा हेल्थकेयर कंपनी है जिसने 2019 में त्रिवेंद्र चचा को देश का सर्वश्रेष्ठ सीएम का पुरस्कार देने की घोषणा की थी। उधर, केदारनाथ यात्रा में अब तक 15 तीर्थयात्रियों की मौत हो चुकी है। अधिकांश को हार्ट अटैक की शिकायत थी।
इस संबंध में मैने डीजी हेल्थ डा. शैलजा भट्ट से सवाल किया कि क्या सिक्स सिग्मा का स्टाफ प्रशिक्षित है? क्या तैंनात किये गये उनके कर्मचारियों के दस्तावेजों की जांच की गयी? उन्होंने कहा कि ‘मैंने अभी कार्यभार संभाला है। पता करती हूं।‘ वहीं, रुद्रप्रयाग के सीएमओ डा. बी के शुक्ला ने बताया कि सिक्स सिग्मा को इस शर्त पर अनुमति दी गयी थी कि वह केदारनाथ में प्रशिक्षित स्टाफ उपलब्ध कराएंगे लेकिन अब तक कंपनी ने वहां तैनात स्टाफ की एजूकेशन और जॉब संबंधी दस्तावेज नहीं दिये हैं। सीएमओ के अनुसार उन्होंने कंपनी को आज शाम पांच बजे तक सभी जानकारी मांगी हैं। यदि ऐसा नहीं हुआ तो उनको दी गयी अनुमति को निरस्त कर दिया जाएगा।
गौरतलब है कि सिक्स सिग्मा कंपनी विवादों में है। इन्होंने जो डाक्टरों की लंबी चौड़ी सूची प्रशासन को सौंपी है, बताया जा रहा है कि उनमें से एक भी डाक्टर केदारनाथ नहीं पहुंचा। सिक्स सिग्मा का डायरेक्टर प्रदीप भारद्वाज ने 2019 में दावा किया था कि रुद्रप्रयाग में 750 करोड़ का हेल्थ प्रोजेक्ट लगाएंगे। प्रोजेक्ट की पूरी जानकारी नहीं है लेकिन कंपनी के डायरेक्टर प्रदीप भारद्वाज के कोट और बैग पर अशोक चिन्ह लगा होता है। पता नहीं ऐसा चिन्ह लगाने की अनुमति होती है या नहीं।
3 मई 2022 को केदारनाथ के शुरुआती दिन सिग्मा सिक्स के निदेशक डॉ भारद्वाज ने बड़े बड़े दावे किए थे। सिक्स सिग्मा हाई एल्टिट्यूड मेडिकल सर्विस के मेडिकल निदेशक डा. प्रदीप भारद्वाज ने बताया कि देहरादून से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस टीम को सोमवार को हरी झंडी दिखाकर केदारनाथ के लिए रवाना किया था। यहां पहुंचने पर उन्होंने बताया कि सिक्स सिग्मा हेल्थकेयर देश की एकमात्र ऐसी संस्था है, जो हाइ एल्टिट्यूड में फ्री मेडिकल सर्विस देती है। डा. प्रदीप भारद्वाज ने बताया कि इस बार मेडिकल टीम यात्रा के दौरान ज्यादातर पोर्टेबल मेडिकल इक्यूपमेंट का इस्तेमाल करेगी, जिससे यात्रियों को बेहतर स्वास्थ्य सेवा दी जा सके। इसके अतिरिक्त यात्रियों की सुविधा के लिए हापरबानिक चैंबर भी बनाया जाएगा और ईसीजी की भी सुविधा मिलेगी। इस बार यात्रा में मेडिकल सेवा देने के लिए सिक्स सिग्मा हेल्थकेयर की ओर से 130 से अधिक मेडिकल स्टाफ को लगाया जा रहा है, जिसमें क्रीटिकल केयर, कार्डियो, रेसप्रेटरी और ओबशन/ गाइनी के विशेषज्ञ भी अपनी सेवाएं देंगे। इसके अलावा आल इंडिया इंस्टिट्यूट आफ मेडिकल साइंस (एम्स-दिल्ली) के 20 से अधिक सुपर स्पेशलिस्ट डाक्टर की टीम भी सिक्स सिग्मा हेल्थकेयर के साथ मिलकर यात्रियों को सेवा देंगी। यात्रा के दौरान त्वरित संपर्क स्थापित करने के लिए सैटेलाइट फोन का उपयोग किया जाएगा।
नोट – फोटो सिक्स सिग्मा के डायरेक्टर प्रदीप भारद्वाज की है। कोट पर लगा अशोक चिन्ह देखिए। मुझे नहीं पता कि यह ‘द स्टेट एंबलम ऑफ इंडिया’ ((प्रिहेब्शन ऑफ इंप्रापर यूज)) एक्ट 2005 के दायरे में आता है या नहीं। यदि आता है तो इस पर तुरंत एफआईआर दर्ज होनी चाहिए। इस केस में सेक्शन तीन के तहत दो साल की सजा का प्रावधान है।

