नई दिल्ली/देहरादून (हि. डिस्कवर)
लगता है आम आदमी पार्टी ने अपने सर्वे से पहले ही उत्तराखंड में स्वास्थ्य, शिक्षा व रोजगार की कमियों को खंगालकर उत्तराखंड से चुनाव लड़ने का मन बना लिया है। एएनआई से बातचीत में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के इस खुलासे के बाद उत्तराखंड में अब त्रिकोणीय संघर्ष दिखने को मिल सकता है।
एएनआई से बात करते हुए अरविंद केजरीवाल ने खुलासा किया है कि उनकी पार्टी ने उत्तराखंड में चुनावी सर्वेक्षण में पाया है कि उत्तराखंड 62 प्रतिशत लोग चाहते चाहते हैं कि आम आदमी पार्टी उत्तराखण्ड से चुनाव लड़े।
उन्होंने बताया कि उत्तराखण्ड से तीन बातें चुनाव लड़ने में उन्हें सहायक सिद्ध होंगी जिनमें पहला रोजगार व पलायन रोकना, दूसरा शिक्षा व तीसरा स्वास्थ्य मुख्य है। उन्होंने कहा कि 20 बर्ष के इस राज्य में ये तीनों चीजें काफी कमजोर रही, जिससे लगातार पलायन हुआ और लोग गांव छोड़ते गए। वहां के युवा गांव रहना चाहते हैं लेकिन रोजगार न होने के कारण मजबूरन उन्हें पलायन करना पड़ रहा है।
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि उत्तराखंड में सरकारी स्कूलों का ढांचा बेहद दयनीय स्थिति में है व प्राइवेट स्कूलों की खुली लूट से वहां का आदमी शिक्षा के नाम पर शोषण का शिकार हो रहा है। वहीं आज भी पहाड़ों से बीमार को डंडी कंडी के माध्यम से देहरादून हॉस्पिटल लाया जाता है। उन्होंने कहा पहाड़ का बड़ा जनमानस दिल्ली में रहता है। उनसे चर्चा के बाद ज्ञात हुआ है कि उत्तराखण्ड के लोगों को दिल्ली सरकार यानि आम आदमी पार्टी का दिल्ली मॉड्यूल बड़ा पसन्द आया क्योंकि वहां का जनमानस भी दिल्ली जैसी स्वास्थ्य सुविधाएं, सरकारी स्कूलों के कायाकल्प इत्यादि के प्रति उत्तराखण्डी जनमानस काफी आश्वस्त है।
बहरहाल उत्तराखंड में विधान सभा चुनाव सिर पर हैं। मात्र डेढ़ साल बाद उत्तराखंड में विधान सभा चुनाव होने हैं। ऐसे में अगर सचमुच आम आदमी पार्टी का यह सर्वे 62 प्रतिशत असंतुष्ट दिखाता है तो यह वर्तमान भाजपा सरकार के लिए खतरे की घण्टी व चिंता का बिषय है।

