घरजवैं, कौथिग, बेटी-ब्वारी, बंटवारू, चक्रचाल जैसी सुप्रसिद्ध फिल्मों के गीतकार व गायक
उत्तराखंड लोक संस्कृति व संगीत को 50 से अधिक बर्ष दिए
हॉउस ऑफ़ लार्ड्स में मिला “डिस्टिंग्विश्ड लीडरशिप इन इंडियन फोक सिंगिंग” अवॉर्ड
(मनोज इष्टवाल)
उत्तराखंड के परिवेश में राजनीतिक दृश्य पटल पर अगर पद्म श्री, पद्मविभूषण जैसे पुरस्कारों की बात की जाए तो सरकारों के लिए वे सिर्फ “घर का जोगी जोगड़ा, आण गाँव के सिद्ध” ही साबित हुए। पूरे 50 बर्षों से उत्तराखंड के जनमानस के दिलों में लोक संस्कृति की अलख जगाकर लोक की स्वर लहरी बिखेरकर राज करने वाले लोकगायक गढ़ रत्न नरेन्द्र सिंह नेगी आज 78वें बर्ष में प्रवेश कर चुके हैं। उन्हें गढ़वाल का बॉब डायलन कहा जाता है। बॉब डायलन यानि बॉब डायलन (Bob Dylan) अमेरिकी गायक-गीतकार, संगीतकार और कवि हैं। उनका असली नाम रॉबर्ट एलन ज़िमरमैन है। वे 20वीं सदी के सबसे प्रभावशाली संगीतकारों में से एक माने जाते हैं। अब अगर लोकगायक नरेंद्र सिंह नेगी की तुलना विश्व के सबसे शक्तिशाली गीतकार, गायक व संगीतकार से होती है तो आप ही बताइये, उनके लिए सरकारी तमगे क्या मायने रखते होंगे।
सुप्रसिद्ध संगीतकार, गीतकार, कवि व लोकगायक नरेन्द्र सिंह नेगी जन्म 12 अगस्त 1949 में उत्तराखंड़ के पौड़ी गढ़वाल के पौड़ी गाँव में हुआ है। पिता उमराव सिंह नेगी भारतीय सेना में नायब सूबेदार थे।
उनका संगीत करियर 1974 से शुरू हुआ। 1976 में पहला कैसेट गढ़वाली गीतमाला रिलीज हुआ। उन्होंने 1000 से अधिक गीत गाए और लिखे हैं। गढ़वाली के अलावा कुमाऊँनी और जौनसारी में भी गाते हैं। जागर, मंगल, बसंती, खुदेड़, छोपती, चौंफुला, झुमैलो जैसी लोक विधाओं में काम किया है।
उनके लेखन में प्रेम, दर्द, पलायन, पर्यावरण, सामाजिक मुद्दे और राजनीतिक व्यंग्य पर गीत शामिल रहे हैं । उत्तराखंड राज्य आंदोलन पर गाये उनके गीत आज भी लोगों को उस आंदोलन की याद दिलाते हैं। उन्होंने यूँ तो कई गढ़वाली फिल्मों के गीत गाये, लिखे व उन्हें संगीत दिया है लेकिन घरजवैं, कौथिग, बेटी-ब्वारी, बंटवारू, चक्रचाल इत्यादि फिल्मों के गीत आज भी उतने ही लोकप्रिय हैं। वे पहले ऐसे लोक गायक हैं जिन्हें हर पीढ़ी के लोग सुनते हैं व उनकी कालजयी रचनाओं पर चर्चा करते हैं।
पुरस्कार और सम्मान
उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार (2022), उत्तराखंड गौरव सम्मान, 2024 में लंदन के हाउस ऑफ लॉर्ड्स में “डिस्टिंग्विश्ड लीडरशिप इन इंडियन फोक सिंगिंग” अवॉर्ड सहित देश के विभिन्न राज्यों में दर्जनों पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है। फिर भी जाने क्यों हर साल उनके लिए पद्मश्री व पद्म विभूषण पुरस्कार की मांग होती रहती है।
वे उत्तराखंड की लोक संस्कृति के जीवंत प्रतीक माने जाते हैं। उनके गीत पहाड़ी जीवन, महिलाओं के संघर्ष, प्रकृति और सामाजिक यथार्थ को दर्शाते हैं। लोकगायक नरेन्द्र सिंह नेगी के गीतों का जादू आज भी लोगों के सिर चढ़कर बोलता है।
उत्तराखण्ड लोक समाज द्वारा हिमालयी सरोकारों के लिए प्रदान किया जाने वाला नरेन्द्र सिंह नेगी संस्कृति सम्मान इस वर्ष अरुणाचल प्रदेश के सुपरस्टार अभिनेता, रंगकर्मी, भाषाविद श्री ताई तुगुंग जी को प्रदान किया जा रहा है। अप्रतिम कवि-लोक गायक नरेन्द्र सिंह नेगी जी के जन्मदिन पर यह संस्कृति सम्मान माननीय मुख्यमंत्री जी के हाथों प्रदान किया जाएगा।
इस अवसर पर उत्कर्ष भट्ट द्वारा नेगी जी के चुनिंदा गीतों की अनुवादित पुस्तक Mountain Melodies of Narendra Singh Negi का लोकार्पण होगा।

