न्यूज़ डेस्क हि. डिस्कवर/ स्रोत विभिन्न टीवी न्यूज़
चीन के तियानजिन शहर में SCO समिट 2025 शुरू हो चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीनी राष्ट्रपति के सामने क्रॉस बॉर्डर टेररिज्म का मुद्दा उठाया और चीन ने भी माना कि कुछ तो गड़बड़ी हो रही है। यह पाकिस्तान के लिए झटका है।
SCO समिट में 10 सदस्य देश जिनमें चीन, रूस, भारत, पाकिस्तान, ईरान, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान, बेलारूस हैं, के अलावा तुर्की, अजरबैजान, नेपाल, वियतनाम, मंगोलिया आदि संवाद साझेदार या पर्यवेक्षक देशों से, जिससे कुल 20+ देश कवर होते हैं, के प्रतिनिधि भी शामिल हुए हैं। इसके अलावा भी 10 अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के प्रमुख, जैसे संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस इत्यादि भी इसमें शामिल हुए हैं।
पीएम मोदी-जिनपिंग मुलाकात में किन मुद्दों पर बनी सहमति
एससीओ समिट में एक मंच पर पीएम मोदी, पुतिन और जिनपिंग समेत दुनिया के दिग्गज नेता नजर आए। चीन के तियानजिन में 25वां शंघाई सहयोग संगठन (SCO) समिट शुरू हो चुका है। इस समिट से अलग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की रविवार को हुई द्विपक्षीय मुलाकात ने सबका ध्यान खींचा, जो 2020 की गलवान झड़प के बाद रिश्तों को सामान्य करने की दिशा में अहम कदम है।
मीटिंग में सीमा विवाद, डायरेक्ट फ्लाइट, मानसरोवर यात्रा और आपसी संबंध बढ़ाने पर बातचीत हुई। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और अन्य नेताओं की मौजूदगी में यह समिट क्षेत्रीय सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था को बढ़ावा देने का मंच बन गया है। सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सीमा-पार आतंकवाद को प्रमुख मुद्दे के तौर पर उठाया। उन्होंने साफ कहा कि इसका असर न सिर्फ भारत बल्कि चीन पर भी पड़ता है। इसलिए दोनों देशों के लिए यह जरूरी है कि इस चुनौती से निपटने में समझ और सहयोग को मजबूत किया जाए। प्रधानमंत्री ने जोर दिया कि क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए आतंकवाद से लड़ाई को प्राथमिकता देनी होगी। इस संदर्भ में भारत को चीन की ओर से सकारात्मक समझ और समर्थन भी मिला है, जिसे बड़ी कूटनीतिक सफलता माना जा रहा है। यह पाकिस्तान के लिए बड़े झटके की तरह है, जो सीमा पार आतंकवाद को लगातार बढ़ावा देता रहा है और कई बार चीन ने उसे बचाया है।इसके अलावा और कई मुद्दों पर सहमति बनी है।
भारत चीन के बीच किन मुद्दों पर सहमति बनी
दोनों देशों ने माना कि उनका मुख्य ध्यान घरेलू विकास लक्ष्यों पर है, वे प्रतिद्वंद्वी नहीं बल्कि साझेदार हैं।
स्थिर और सौहार्दपूर्ण संबंध 2.8 अरब लोगों के हित में बताए गए।
साझा हित, मतभेदों से अधिक महत्वपूर्ण माने गए।
मतभेदों को विवाद में न बदलने पर सहमति।
“एशियाई शताब्दी” और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था के लिए सहयोग और विकास पर ज़ोर।
कजान बैठक के बाद द्विपक्षीय संबंधों में आई सकारात्मक प्रगति पर संतोष।
लोगों के बीच संपर्क (People-to-People Connect) बढ़ने पर खुशी।
द्विपक्षीय संबंधों के सिद्धांतों पर साझा समझ को भविष्य की दिशा का मार्गदर्शक माना गया।
सीमा मुद्दे पर सहमति।
सफल डिसएंगेजमेंट और सीमा पर बनी शांति पर संतोष व्यक्त किया गया।
पीएम मोदी ने ज़ोर दिया कि संबंधों के विकास के लिए सीमा पर शांति आवश्यक है।
मौजूदा तंत्र का उपयोग कर सीमाओं पर स्थिरता बनाए रखने पर सहमति बनी।
राष्ट्रपति शी जिनपिंग के चार सुझाव
रणनीतिक संवाद को मज़बूत करना और आपसी विश्वास को गहरा करना।
आदान-प्रदान और सहयोग का विस्तार करना।
परस्पर लाभ और साझा सफलता प्राप्त करना।
एक-दूसरे की चिंताओं का ध्यान रखना और बहुपक्षीय सहयोग को सुदृढ़ करना।
भारत-चीन रिश्तों में नई चाल… 2.8 अरब लोगों के हित में साझेदारी, प्रतिद्वंद्विता नहीं
तिआनजिन में पीएम मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात से साफ हुआ कि अब भारत-चीन रिश्ते टकराव नहीं, साझेदारी की ओर बढ़ रहे हैं। दोनों नेताओं ने माना कि स्थिर और सौहार्दपूर्ण संबंध 2.8 अरब लोगों के हित में हैं। मतभेदों को विवाद में न बदलने और साझा हितों को प्राथमिकता देने पर सहमति बनी। “एशियाई शताब्दी” और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था में सहयोग की अहमियत पर जोर दिया गया। कजान बैठक के बाद संबंधों में सकारात्मक प्रगति और खासतौर पर लोगों के बीच संपर्क बढ़ने पर संतोष जताया गया। यह भारत के लिए बड़ी कूटनीतिक उपलब्धि है।
शी जिनपिंग बोले– क्षेत्रीय शांति बनाए रखने की बड़ी जिम्मेदारी एससीओ पर
तिआनजिन में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन के दौरान चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा कि संगठन पर क्षेत्रीय शांति और स्थिरता बनाए रखने की बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में एससीओ देशों को एकजुट होकर सुरक्षा, विकास और आपसी सहयोग को प्राथमिकता देनी चाहिए। शी ने यह भी कहा कि संगठन केवल आर्थिक और राजनीतिक साझेदारी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य क्षेत्रीय देशों के बीच विश्वास बढ़ाना और संघर्षों को रोकना भी है। उनके बयान को सम्मेलन का अहम संदेश माना जा रहा है।
रणनीतिक संवाद को मज़बूत करना और आपसी तिआनजिन में एससीओ नेताओं की ग्रुप फोटो ट्रंप की टेंशन बढ़ा देगी।
तिआनजिन में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन की औपचारिक शुरुआत से पहले सदस्य देशों के शीर्ष नेताओं ने एक साथ मिलकर फैमिली फोटो खिंचवाई। इस दौरान चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने मेज़बान की भूमिका निभाई और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत सभी राष्ट्राध्यक्षों और प्रधानमंत्रियों का स्वागत किया। फोटो सेशन ने सम्मेलन के महत्व को और बढ़ा दिया, जिसे ऐतिहासिक माना जा रहा है। विभिन्न देशों के नेताओं का एक साथ मंच साझा करना वैश्विक सहयोग और क्षेत्रीय साझेदारी की दिशा में अहम संदेश देता है। यह तस्वीरें अब सम्मेलन की प्रतीक बन गई हैं। यह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टेंशन बढ़ाने वाली है।
मिस्र के प्रधानमंत्री पीएम मोदी से मिले
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तिआनजिन में एससीओ शिखर सम्मेलन के दौरान मिस्र के प्रधानमंत्री मोस्तफा मदबौली से मुलाकात की। इस दौरान मोदी ने कुछ साल पहले हुए अपने मिस्र दौरे को याद किया और उसे बेहद खास बताया। उन्होंने कहा कि भारत और मिस्र की दोस्ती लगातार नई ऊंचाइयों को छू रही है और दोनों देशों के बीच सहयोग हर क्षेत्र में मज़बूत हो रहा है. यह मुलाकात इसलिए भी अहम है क्योंकि मिस्र अफ्रीका और मध्य-पूर्व में भारत का अहम रणनीतिक साझेदार है और दोनों देशों के बीच रक्षा, ऊर्जा और व्यापारिक सहयोग तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।
भारत-चीन प्रतिस्पर्धी नहीं बल्कि साझेदार हैं
31 अगस्त 2025 को तियानजिन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात के बाद चीन के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी किया। शी ने कहा कि भारत और चीन प्रतिस्पर्धी नहीं, बल्कि सहयोगी साझेदार हैं और एक-दूसरे के लिए खतरा नहीं, बल्कि विकास के अवसर हैं। उन्होंने पिछले साल कजान की सफल बैठक का जिक्र करते हुए कहा कि इससे रिश्तों को नई शुरुआत मिली. दोनों देश, जो प्राचीन सभ्यताएँ और ग्लोबल साउथ के महत्वपूर्ण सदस्य हैं, को अच्छे पड़ोसी और मित्र बनकर ‘ड्रैगन और हाथी’ का संगम साकार करना चाहिए।
रिश्तों में दीर्घकालिक दृष्टिकोण जरूरी -शी जिनपिंग
शी जिनपिंग ने इस साल भारत-चीन कूटनीतिक संबंधों की 75वीं वर्षगांठ पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों को रिश्तों को रणनीतिक और दीर्घकालिक दृष्टिकोण से संभालना चाहिए। शी ने बहुपक्षवाद, बहुध्रुवीय विश्व और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में अधिक लोकतंत्र को बढ़ावा देने की जिम्मेदारी पर बल दिया। उन्होंने भारत और चीन से एशिया और विश्व में शांति व समृद्धि के लिए मिलकर काम करने का आह्वान किया।
चीन में हो रहे इस एससीओ समिट 2025 में भाग लेने वाले प्रमुख नेताओं चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग (मेजबान), भार के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूस: व्लादिमीर पुतिन, ईरान: मसूद पेजेश्कियन, पाकिस्तान: शहबाज शरीफ, बेलारूस: अलेक्जेंडर लुकाशेंको, कजाकिस्तान: कासिम-जोमर्त टोकायेव, उज्बेकिस्तान: शावकत मिर्जियोयेव किर्गिस्तान: सदिर जापारोवता, जिकिस्तान: एमोमाली रहमान प्रमुख हैं।




