Tuesday, February 24, 2026
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पौड़ी लोक निर्माण विभाग या नगर निगम के अभियंता बस स्टैंड पर बने लोह-ब्रिज कटघरे में।

पौड़ी लोक निर्माण विभाग या नगर निगम के अभियंता बस स्टैंड पर बने लोह-ब्रिज कटघरे में।

(मनोज इष्टवाल)

पौड़ी के पालिकाध्यक्ष यशपाल बेनाम का नाम यूँ तो हर निर्माण कार्य में ही विवादों से जुड़ा रहता है लेकिन विगत बर्ष से अब तक चाहे उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि पर बेटी के विवाह का होहल्ला रहा हो। एक करोड़ की लागत में सर्किट हाउस के कांजी हाउस निर्माण, हो या फिर एक करोड़ का देवप्रयाग मोटर मार्ग पर बस स्टैंड व विकास खंड कल्जीखाल के पट्टी कफोलस्यूँ के सिलेथ गाँव के क्यारकेश्वर में बिना ग्राम सभा की अनुमति के बनाये जाने वाले कांजी हॉउस और अब नौ करोड़ की लागत से बन रहे अनियंत्रित व अपरिपक्व इंजिनियरिंग का पौड़ी बस अड्डा…। हर विवाद में एक ही नाम और वह भी पालिकाध्यक्ष यशपाल बेनाम! तो क्या यशपाल बेनाम की दशा खराब चल रही है?

आइये यहाँ से शुरू करते हैं। वर्ष 2002 में पौड़ी के देवप्रयाग मोटर मार्ग पर सर्किट हाउस से कुछ दूरी पर नगरपालिका ने करीब एक करोड़ की धनराशि से बस अड्डे का निर्माण कार्य शुरू करवाया था। मंशा थी कि शहर में दो-दो बस स्टेशन होने से वाहनों के पार्किग की समस्या से निजात मिल सकेगी और आवागमन भी सुगम होगा।

जिला मुख्यालय पौड़ी में वर्ष 2006 को बहुमंजिला बस अड्डे के निर्माण का खाका तैयार किया गया। बस अड्डे के निर्माण की लागत 4.52 करोड़ थी। तत्कालीन प्रदेश सरकार ने निर्माण कार्य के लिए 2.26 करोड़ रुपए जारी किए। निर्माण कार्य वर्ष 2011 में जाकर शुरू हुआ। अड्डे के भूतल का निर्माण होने के बाद वर्ष 2012 में प्रदेश सरकार ने फिर 2.26 करोड़ की राशि पालिका प्रशासन को प्रदान की। इसके बाद अड्डे के प्रथम तल की छत का लेंटर डाले जाने के साथ अन्य कार्य किए गए। लेकिन बाद में प्रदेश सरकार से धनराशि न मिलने पर वर्ष 2014 से वर्ष 2017 तक निर्माण कार्य नहीं हो पाया। मई 2019 में प्रदेश सरकार ने 1.57 करोड़ की धनराशि की घोषणा पर 57 लाख अवमुक्त किए। जिसके बाद अड्डे के द्वितीय तल की छत का लेंटर डाला गया। अब तक यह राशि नौ करोड पार कर चुकी है लेकिन बस अड्डे के निर्माण को देखकर लगता है कि इसके निर्माण का ज्यादात्तर कार्य ने नगर पालिका की कागजी फाइलों में ही निर्माण किया है। इस दौरान तीन पांच मुख्यमंत्री पौड़ी जिले के बन चुके हैं लेकिन पौड़ी बस अड्डा हम सबका मुंह चिढ़ाता ही नजर आ रहा है।

जिला मुख्यालय पौड़ी में बहुप्रतीक्षित बहुमंजिला बस अड्डा जल्द अस्तित्व में आ जाएगा। क्योंकि पालिकाध्यक्ष यशपाल बेनाम इसकी दोनों सड़कों को मिलाने वाले पुल के माध्यम से छत्त के ऊपर 80 गाड़ियों की पार्किंग 15 दिनों में अपना मूर्त रूप लेलेगी। उनका कहना है कि बस अड्डा निर्माण के शेष कार्य को शासन ने स्वीकृति प्रदान कर दी है। नौ करोड़ की लागत से अड्डे का अवशेष निर्माण कार्य पूरा किया जा चुका है। बस अड्डे में 200 वाहनों की पार्किग व्यवस्था के साथ-साथ 53 दुकानों का शॉपिंग कांप्लेक्स भी बनाया गया है। पालिकाध्यक्ष यशपाल बेनाम ने बताया कि अवशेष कार्य को स्वीकृति मिल गई है। आगामी 15 दिनों में मॉडल तैयार कर जल्द ही निर्माण कार्य शुरू कर लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि बस अड्डा डेढ़ वर्ष के भीतर तैयार हो जाएगा। अवशेष निर्माण कार्य 9 करोड़ की लागत से पूर्ण किया जाएगा।

यह सब तो ठीक है कि एक बस अड्डा निर्माण कार्य डेढ़ बर्ष बाद पूरा हो जायेगा, लेकिन अगर हम फ़्लैश बैक जाएंगे तो पता चलेगा कि एक कार्य पूरा करने में हमें लगभग 18 बर्ष छ माह का समय लग गया और तब भी यह निर्माण पूर्ण रूप से विवादों में है। जिसके तकनीकी पक्ष पर पढ़े लिखे तो दूर ठेठ ग्रामीण भी अंगुली उठाते नजर आ रहे हैं। निर्माण कार्य पौड़ी बस अड्डे का हो रहा है और उसे टारगेट सचिवालय के चौथे व पांचवें मंजिल पर बने पुल पर केंद्रित कर ट्रॉल किया जा रहा है। सारे इंजिनियरिंग के एक्सपर्ट अपनी राय में इसे लोक निर्माण विभाग पौड़ी व नगर पालिका पौड़ी के अभियंताओं की तकनीकी सोच पर खामियों पर केंद्रित कर जमकर कोस रहा है। यहाँ अभियंताओं के तकनीकी दृष्टिकोण की खामियों में भी पालिकाध्यक्ष यशपाल बेनाम ही लपेटे में हैं, तभी कह रहा हूँ कि पालिकाध्यक्ष यशपाल बेनाम की गृहदशा कहीं न कहीं खराब चल रही है।

अजय बिष्ट जो कि आईआरसी, आईसीए व आईईआई जैसे नामी संस्थानों के मध्यस्थ नामांकित पैनल में हैं व जी बी पी यू ए टी कॉलेज ऑफ़ टेक्नोलॉजी पंतनगर से इंजिनियर की शिक्षा ले चुके हैं, पौड़ी बस स्टेशन के निर्माण पर राय देते हुए सोशल साइट पर ट्वीट करते हैं कि – “बहु-प्रतीक्षित पौड़ी बस स्टैंड का विहंगम दृश्य।

माना कि पुराने सचिवालय की चौथी मंजिल और बगल के नये सचिवालय की पांचवी मंजिल को जोड़ने हेतु जिल्ले इलाही ने 29 लाख में एक अदद पुल बनवा डाला था, पर वह तो उन्हीं के उपयोग के लिए था।
पर मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि लोनिवि पौड़ी के अभियंतागण ऐसे अविश्वसनीय पुल का निर्माण कर बैठेंगे, जिसके आधार ही नहीं है। माना कि पुल के डील-डाल के आधार पर मान लिया जाय कि यह मोटर पुल की भारवहन क्षमता रखता है, पर यह भी तो देखा जाय कि किस आधार पर रखा जा रहा है। एक तरफ आधार का अता-पता नहीं, और दूसरी ओर बीम के ऊपर छत पर। क्या पता, पुल की स्लैब का लोड पड़ते ही कहीं छत धराशायी ना हो जाये। और जब उपयोग कर्ताओं का लोड आयेगा, तो ईश्वर ही मालिक है। पुल पर चलने वाले तो अलग, नीचे खड़ी बसें और पैदल चलने वाले भी काल कलवित हो जायेंगे।
निश्चित रूप से यह प्रकरण जिलाधिकारी पौड़ी के सम्मुख उठाया जाना चाहिये। उन्हें जनता की चिंता रहती है, अवश्य ही ध्यान देंगे। अन्यथा पौड़ी के माथे पर एक कलंक सुनिश्चित है। ईश्वर रक्षा करे।”

बहरहाल कुछ भी कहो विवादों के लपेटे में पालिकाध्यक्ष पिछले बर्ष से लगातार बने हुए हैं जबकि उत्तराखंड राज्य आंदोलन में सक्रिय जननेता के रूप में उभरे यशपाल बेनाम की किसी दौर में पौड़ी के जनमानस के मध्य अच्छी पैठ रही है।

मेरा मानना है कि पौड़ी के बस अड्डा निर्माण वाले इंजिनियर्स की टीम लेकर पालिकाध्यक्ष यशपाल बेनाम को अल्मोड़ा की वाह आठ मंजिली पार्किंग देखनी चाहिए जिसका निर्माण महिला पालिकाध्यक्ष श्रीमति शोभा जोशी के कार्यकाल में हुआ व इसे एशिया की बेहतरीन पार्किंग में से एक गिना गया। सन 2007 में अल्मोड़ा के 143 बर्ष के इतिहास में पहली बार महिला नगर पालिकाध्यक्ष बनी श्रीमति शोभा जोशी के आठ मंजिला पार्किंग निर्माण कार्य को देखकर सब आज भी दाँतों तले अंगुली दबाते हैं। अल्मोड़ा की नगर पालिका पार्किंग अपने आप में एक बेहतर तकनीक का जीता जागता उदाहरण है। पूरी तरह से वेंटीलेटेड इस पार्किंग की आखिर 8वीं मंजिल सड़क पर आकर मिलती है।  8.01 करोड़ की लागत से निर्मित इस अद्भुत पार्किंग की टेकनालोजी मलेशिया की है। इसमें 43 दुकानें हैं जिनमें से 23 दुकानें किराए व बिक्री उसी समय हो गई थी। इस पार्किंग की गुणवत्ता को देखकर पूर्व पालिकाध्यक्ष श्रीमति शोभा जोशी को कई राष्ट्रीय अवार्ड मिल चुके हैं।

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35 बर्षों से पत्रकारिता के प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक व सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक, धार्मिक, पर्यटन, धर्म-संस्कृति सहित तमाम उन मुद्दों को बेबाकी से उठाना जो विश्व भर में लोक समाज, लोक संस्कृति व आम जनमानस के लिए लाभप्रद हो व हर उस सकारात्मक पहलु की बात करना जो सर्व जन सुखाय: सर्व जन हिताय हो.
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