देहरादून (हि. डिस्कवर)
जिस दिन लोग अपने घरों में लक्ष्मी पूजा के लिए पूरे तन-मन से लगे रहते हैं ताकि इस दिवाली माँ लक्ष्मी का आशीर्वाद उन्हें प्राप्त हो व वे साल भर तक धन-धान्य सुख समृद्धि से भरे रहे उस दिन उत्तराखंड का एक अधिकारी ऐसा भी करता है कि अनाथ, बेसहारा, कूड़ा बीनकर पेट पालने वाली उन मासूम बेटियों के पास जा पहुँचता है जिन्हें भारत सरकार की योजना के तहत नेता जी सुभाष चंद्र बोस आवासीय बालिका छात्रावास में मुफ़्त शिक्षा, भोजन वस्त्र व आवासीय सुविधा उपलब्ध है। यह अधिकारी ऐसी बेटियों के पास पहुँचकर माँ लक्ष्मी की पूजा कर सभी बेटियों को उपहार में मिठाई, ड्राई फ्रूट, चॉकलेट, जूस इत्यादि देकर उन मासूमों को दिवाली की शुभकामनाएँ देते हैं।
महानिदेशक सूचना, महानिदेशक शिक्षा, निदेशक पंचायतीराज, मैनेजिंग डायरेक्टर गढ़वालमंडल विकास निगम जैसे महत्वपूर्ण पदों की अहम ज़िम्मेदारी का निर्वहन करने वाले ऐसे व्यक्तित्व के लिए कहाँ कहाँ से क्या क्या गिफ़्ट आए होंगे यह सभी समझ सकते हैं लेकिन यह समझना हर किसी के वश के बाहर है कि वही गिफ़्ट लाकर इन बेसहारा, निर्धन बेटियों को देकर ख़ुशियाँ साझे करने वाले यह अधिकारी बंशीधर तिवारी कैसे सैकड़ों घरों में सच्ची ख़ुशहाली बाँटकर एक नयी मिशाल पेश कर गए।
विगत शनिवार को दोपहर बाद एक इनोवा भर कर सामान लेकर वे बनियावाला स्थित नेताजी सुभाष चंद्र बोस आवासीय बालिका छात्रावास पहुंचते हैं। यहां 107 छोटी छोटी बच्चियों के चेहरे इन गिफ्ट, मिठाई, चॉकलेट, फुलझड़ी को देखते ही खिल उठते हैं। उनकी सहजता तो देखिए। इन बेटियों को खड़े रख अपने आप नीचे ज़मीन पर जा बैठे। सीधा सा संदेश था कि इन्हीं बेटियों में कहीं ना कहीं माँ लक्ष्मी का स्वरूप विद्धमान है।
वे सिर्फ़ इस स्कूल में इसलिए नहीं जाते कि वे महानिदेशक शिक्षा हैं अपितु वह राजधानी देहरादून के कई अन्य ऐसे ही स्थानों पर कई दिनों से ऐसे ही सामान लेकर पहुंच रहे हैं, जहां गरीब निर्धनों के आवास व उपेक्षित वर्ग की बेटियाँ दिख जाएँ।
पत्रकार रवि नेगी सोशल साइट पर अपनी पोस्ट में इसका ज़िक्र करते हुग़े लिखते हैं की इन तमाम चीजों का जिक्र यहां इसीलिए किया जा रहा है, क्योंकि यहीं इस राज्य में कई आईएएस, इंजीनियर और कई अहम पदों पर बैठे ऐसे अफसर भी हैं, जो दिवाली पर मिलने वाले इन उपहारों को दोबारा बाजार में बेचने के लिए भी कुख्यात रहे हैं।
रवि नेगी का कहना है कि कुछ आईएएस और अन्य अफसर तो ऐसे रहे, जो उनके घर आने वाले मिठाई के डिब्बों को अपने ड्राइवर के जरिए फिर उन्हीं दुकानों तक पहुंचा देते थे। इन मिठाई के डिब्बों को बेचने के बाद जो भी मिलता था, उसे लेने में कोई संकोच नहीं करते थे। ऐसे में बंशीधर तिवारी जी की ये पहल हर उस असरदार शख्स के लिए सीख है, जिसके घरों में तोहफों की बारिश होती है। ऐसा नहीं है कि उनकी ओर से ऐसा पहली बार किया गया हो। बल्कि पीसीएस के रूप में एसडीएम पद से अपनी सेवाएं शुरू करने के समय से ही वे हर दिवाली पर अपने यहां आने वाले सामान को अनाथ आश्रम, सरकारी स्कूलों के छात्रावास में बांटते आए हैं। काश उनकी इस मुहिम को देख कर बाजार में तोहफों को बेचने वाले कुछ सीख ले सकें। उनकी ये मुहिम असल मायनों में दिवाली जैसे महापर्व को बेहद खास बना देती है।



