(पार्थसारथि थपलियाल)
गत वर्ष अप्रैल में “आप” पार्टी में कर्नल अजय कोठियाल (सेनि) शामिल हुए। देहरादून में एक शानदार और जानदार प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई। उस समाचार पर आम प्रतिक्रियाएं बहुत ठंडी थी। बल्कि ये कहना चाहिए कि घोषित मुख्यमंत्री अजय कोठियाल के अनुकूल नही थी।
कर्नल कोठियाल ने उत्तरकाशी में कम समय रहते हुए जितना नाम कमाया, केदारनाथ विभीषिका के समय उन्होंने जो काम किया, वह सब बेकार चला गया। फर्क इतना सा संगत गलत हो गई। जिस आम आदमी पार्टी को उत्तराखंड के लोग दिलबर नेगी का हत्यारा मानते हैं उस पार्टी को कर्नल कोठियाल गले क्यों लगा रहे थे। जो व्यक्ति देवभूमि उत्तराखंड का रोहिंग्याकरण करना चाहता है क्या उसे उत्तराखंड के लोग स्वीकार कर पाएंगे। यह सही है कि हर एक व्यक्ति की राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं होती हैं, लेकिन लक्ष्य प्राप्ति के साधन भी तो शुद्ध हों। उस समय उत्तराखंड के बुद्धिजीवी वर्ग को भी लगा कि एक हीरा कांच के टुकड़ों के साथ अपना अवमूल्यन क्यों कर रहा है? बल्कि उस प्रेस कांफ्रेंस के अगले दिन बहुत से लोगों का मत कि अगर भाजपा या कांग्रेस में जाना उचित न लग रहा हो तो कोठियाल जी को उत्तराखंड क्रांति दल से चुनाव लड़ना चाहिए। एक विकल्प यह भी दिया था कि अपनी पार्टी बनाकर पहला चुनाव निर्दलीय कंडीडेट की तरह लड़े हो सकता कि निर्दलीय बहुमत स्थापित कर लेते।
जो पार्टी जनरल विपिन रावत को अभद्र शब्दों में बोली, जिस पार्टी ने फौज पर प्रश्न चिन्ह लगाए, उस पार्टी को उत्तराखंड कभी सहन नही कर सकता। समाजवादी पार्टी इस दर्द को जान गई। पहाड़ को 1994 का अपमान याद रहता है। कर्नल कोठियाल अब समझ चुके हैं कि दिल्ली का मुख्यमंत्री पूर्ण राज्य के मुख्यमंत्री बराबर नही हो सकता। दिल्ली सरकार का हेड उपराज्यपाल होता है न कि मुख्यमंत्री। फिर दिल्ली में 3 नगर निगम तो हैं ही, नई दिल्ली नगर पालिका परिषद (NDMC) भी है। ज्यादातर काम नगर निगम कर देते हैं। बिजली, पानी, स्वास्थ्य व शिक्षा मुख्य कार्य है जो दिल्ली सरकार के पास हैं। सड़क निर्माण कुछ केंद्रीय लोक निर्माण विभाग के पास है, तो स्वास्थ्य और आवास का काफी बड़ा भाग केंद्र सरकार के पास है। दिल्ली सरकार को करों से बहुत राजस्व मिलता है। काम उतना नही जितना राज्यों में होता है। “आप” को पंजाब में शासन मिला। जो वादे किए थे क्या वे पूरे कर लिए ? आटे डाल का भाव मालूम पड़ेगा। आप सरकार ने दिल्ली में शराब को घर घर तक पहंचा दिया। पंजाब तो इसके लिए पहले ही जाना जाता है अब दिल्ली उठती नही, डूबती नज़र आएगी। जो लोग प्रतिक्रिया में राजनीति करते हैं वे विध्वंसक होते हैं।
इसलिए कर्नल कोठियाल को बधाई कि उन्होंने वक्त रहते ही नफरत के दाग धो दिए हैं। राजनीति से पहले राष्ट्रनीति की आवश्यकता है। जो धीर गंभीर न हों उन्हें राजनीति में अवसर नही दिया जाना चाहिए। इसलिए आप पार्टी से त्यागपत्र देने पर कर्नल कोठियाल को बधाई व शुभकामनाएं।

