Monday, February 16, 2026
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वाह रे इंटर कॉलेज जखेटी…! 37 सदस्यीय टीम में सम्पूर्ण पट्टी कफोलस्यूं के चार सदस्य! विद्यालय देने वाले संस्थापक परिवार थापली से कोई नहीं।

(मनोज इष्टवाल)

वाह मेरे शिक्षा के मंदिर…जिस पर नजर पड़ते ही उसकी माटी को माथे लगा उस धरती को चूमने का मन करता है। जिस कॉलेज का नाम सुनते ही सम्पूर्ण गढ़वाल मंडल के शैक्षणिक संस्थानों की आंखे फैल जाती थी व नजरों में वहां से अध्ययन कर रहे या करने के बाद विभिन्न संस्थानों में नौकरी प्राप्त कर रहे छात्रों व नौकरीपेशा लोगों के लिए सभी की नजरों में एक इज्जत उभर आती थी, व जहां के छात्र गर्व से कहा करते थे कि मैं इंटर कॉलेज से पढ़ा हुआ हूँ आज वही सरस्वती का मन्दिर आये दिन विवादों में दिखाई देता है।

सबसे बड़ा आश्चर्य तो तब होता है जब इसके मैनेजमेंट में कफोलस्यूं से मात्र दो काबिल सदस्य ही हैं बाकी कफोलस्यूं में एक भी व्यक्ति शायद इस लायक नहीं कि वह स्कूल की कार्यकारिणी का सदस्य बन सके क्योंकि अगर आप इंटर कॉलेज जखेटी के आजीवन सदस्यों या संरक्षकों की सूची तलाशेंगे तो आपको 37 नामों में मात्र 04 नाम ही ऐसे दिखेंगे जो कफोलस्यूं पट्टी से सम्बन्धित हैं। जिनमे पहला नाम विमल नेगी ग्राम ढांग कफोलस्यूँ दिखेगा तो दूसरा नाम देवेंद्र सिंह ग्राम तोली कफोलस्यूं व तीसरा नाम उत्तम सिंह व श्रीमती शकुंतला देवी ग्राम पल्ली पौड़ी गढ़वाल दिखेगा। और तो और विकास खण्ड कल्जीखाल तक भी इस लिस्ट में ये चार नाम ही हैं।

सबसे ज्यादा आश्चर्य की बात तो यह है कि इस लिस्ट से स्कूल संस्थापकों के नाम गायब हैं जिनमें जनरल शेरू थपलियाल व उनके परिवार के सदस्य शामिल थे। जिस गांव की थाती-माटी में यह स्कूल स्थापित है उस थापली गांव का यहां कोई नाम लेऊ भी नहीं है।

यकीन मानिए आज की तारीख में यह स्कूल अपने चरम के बाद इसके पतन की आख़िरी सांसे गिनता दिखाई दे रहा है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण यह है कि जिस स्कूल में कभी 500 तक छात्र संख्या हुआ करती थी आज वही छात्र संख्या सैकड़े के इर्द-गिर्द मंडरा रही है। यह अब विद्यां ददाति विनयं,विनयाद् याति पात्रताम् । पात्रत्वात् धनमाप्नोति, धनात् धर्मं ततः सुखम् ॥ के सिर्फ एक गुण एक नियम धन कमाने का साधन बनता नजर आ रहा है। पिछले कुछ बर्षों से इस विद्यालय ने जो रिकॉर्ड बनाये है व चर्चाओं में रहा है उससे तो यही आभास होता है कि मेरा यह विद्यालय भले ही भवन से मजबूत हो गया हो लेकिन शिक्षा पद्धति में यह जीर्ण शीर्ण हो गया है।

धन्य है शिक्षा विभाग पौड़ी जिसकी आंखों के समक्ष कई घटनाएं घटित होती हैं व वह दृष्टराष्ट्र बना रहता है। धन्य है सम्पूर्ण प्रदेश का शिक्षा विभाग व इस से सम्बंधित मंत्री गण व वह मुख्यमंत्री भी जिसने बड़े करप्शन की जांच दबाने के लिए अपने जमीर का सौदा करोड़ रुपये में ही कर दिया। यह सब मैं मजाक समझ रहा था लेकिन आये दिन नए-नए प्रकरण देखकर लगता है कि अब मैं इस पर गहनता से काम करुं व जान पाऊं कि इस मंदिर को मिटाने की कसम खाने वाले पर्दे के पीछे कितने व्यक्ति हैं व वे आजतक बेनकाब क्यों नहीं किये जा सके।

वर्तमान में घटित सारे घटनाक्रम को देखकर तो सीधे सीधे अंगुली शिक्षा विभाग पौड़ी व प्रबन्ध संचालक इंटर कॉलेज जखेटी पर उठती है। जब 19 अप्रैल 2022 को डॉ आनन्द भारद्वाज मुख्य शिक्षा अधिकारी के चुनाव संबन्धी निर्देश व 18 अप्रैल 2022 को प्रबन्ध संचालक द्वारा जारी चुनाव स्थगित करने सम्बन्धी विज्ञापन जारी होता है व 21 को बहुत ही अनोखे अंदाज में फिर से मैनेजमेंट के चुनाव हो जाते हैं।

37 सदस्यीय मैनेजमेंट में जहां 04 सदस्य ही कफोलस्यूं से हैं वहीं सबसे अधिक सदस्य ग्राम गडरी दमदेवल से हैं। यह बात भी कुछ अटपटी है। क्योंकि इससे प्रश्न  यही उठता है कि क्या मैनेजमेंट में आजीवन सदस्य व संरक्षक किसी एक व्यक्ति के रिश्तेदार हैं या फिर किसी एक ने ही अपनी पसंद पर इन्हें रखा है। सवाल यह भी पैदा होता है कि क्या पूरे क्षेत्र में मैनेजमेंट सम्बन्धी जानकारी स्कूली छात्र-छात्राओं के माध्यम से पहुंचाई जाती रही है कि कौन से गांव से कौन मैनेजमेंट में शामिल होने का इच्छुक है।

प्रश्न बहुत से हैं लेकिन उत्तर एक का भी सही मायने में आईने की तरह चमकता सामने नहीं दिखाई देता है। उम्मीद है जल्द ही इस सब पर तस्वीर साफ होगी क्योंकि अब इसकी पड़ताल करने का मन तो हमने बना ही लिया है। दोषी चाहे विभाग हो या व्यक्ति उसे आईना दिखाना भी जरूरी है। अगर कहीं विद्यालय को सिर्फ धन कमाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है व पुख्ता सबूत हाथ लग गए तो स्पष्ट है कि इस पर पीआईएल दर्ज जरूरी होगी। मुझे लगता है कि अपने इस विद्या मंदिर को बचाने के लिए पूर्व सभी उन छात्रों को आगे आना चाहिए जिन्हें यह पीड़ा सालती होगी।

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35 बर्षों से पत्रकारिता के प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक व सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक, धार्मिक, पर्यटन, धर्म-संस्कृति सहित तमाम उन मुद्दों को बेबाकी से उठाना जो विश्व भर में लोक समाज, लोक संस्कृति व आम जनमानस के लिए लाभप्रद हो व हर उस सकारात्मक पहलु की बात करना जो सर्व जन सुखाय: सर्व जन हिताय हो.
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