देहरादून (हि. डिस्कवर)।
कय्यासबाजी तो यह लगाई जा रही थी कि भला एक सचिव पर जांच बैठाने के लिए दूसरे सचिव को नियुक्त कर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सचिव स्वास्थ्य एवं सूचना पंकज कुमार पांडे से कौन सा रिश्ता निभा रहे हैं। विपक्षी खेमे ने तो यहां तक कह दिया था कि अज्जी.. क्या बात कर रहे हैं, पंकज पांडे तो खटीमा से ही उनके नजदीकी रहे हैं! मतलब आरोप आकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सिर मढ़ दिए। मीडिया जगत भी कानाफूसी करता हुआ यही कह रहा था कि कुछ नहीं होने वाला..! अगर ऐसा ना हुआ तो पुष्कर सिंह धामी को मध्यावधि चुनाव में विपक्ष निशाना बना सकता है जो कि प्रदेश हित और मुख्यमंत्री के हित में कतई नहीं जाएगा।
सच कहें तो इस बार के आईएएस ट्रांसफर बहुत सूझ-बूझ और बहुत सारे समीकरणों को एक साथ बिठाकर किये गए हैं। अपर प्रमुख सचिव राधा रतूड़ी को अपर प्रमुख सचिव गृह व मुख्यमंत्री दिए जाने के बाद जनता के बीच यह संदेश तो भेजा ही गया है कि मुख्यमंत्री अपने आस पास ईमानदार छवि के लोगों को देखना पसंद करते हैं।
सचिव स्वास्थ्य के पद पर रहते हुए पंकज कुमार पांडे का अहम उनसे उनके दोनों ही महत्वपूर्ण विभाग छीन लिया। अपनी धर्मपत्नी को डॉ पंकज कुमार पांडे खुश करने के कारण मीडिया, सोशल मीडिया में इतने ट्रॉल हुए कि क्या स्वास्थ्य सचिव व क्या मुख्यमंत्री…! दोनों की असहजता इस बात से लगाई जा सकती है कि उन्हें दून मेडिकल विश्वविद्यालय की प्रोफेसर डॉ निधि सेमवाल के ट्रांसफर को यथावत रख जांच बिठानी पड़ी। रही सही कसर को मिटाने के लिए स्वास्थ्य मंत्री डॉ धन सिंह रावत की धर्मपत्नी को पंक्ति में खड़े होकर स्वास्थ्य मंत्री के चेकअप का पर्चा बनाना पड़ा। यह तो तभी तय हो गया था कि जांच में जो भी पाया गया वह डॉ पंकज कुमार पांडे के पक्ष में नहीं होगा।
आखिरकार उन्हें स्वास्थ्य व सूचना जैसे मलाईदार विभागों से हाथ धोना पड़ा। बहरहाल उनके ट्रांसफर से मुख्यमंत्री प्रदेश की जनता को यह संदेश देने में कामयाब रहे कि जांच कोई भी करे, निष्पक्ष होगी और उनके निर्णय सभी पारदर्शी होंगे।देखिए कैसे कैसे हुए आईएएस के स्थानांतरण-

