Friday, January 23, 2026
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13 जिलों के रंग विरंगे फूलों से सजी मुख्यमंत्री व राजभवन की देहरी । 

देहरादून (हि. डिस्कवर)
हिमालयी पर्व फूलदेई के अवसर पर आज रंगोली आंदोलन एक रचनात्मक मुहिम के तहत उत्तराखंड के सभी तरह जिलों से रंग विरंगे फूलों से सजी टोकरियों को नौनिहालों द्वारा राजभवन व मुख्यमंत्री आवास तक ले जाया गया । इस बार गढ़वाल मण्डल से रुद्रप्रयाग व कुमायूँ मण्डल से अल्मोड़ा को प्रतिनिधित्व दिया गया था ।
राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने समस्त उत्तराखंडवासियों को फूल देई/फूल सक्रांति की बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं।  अपने संदेश में राज्यपाल ने कहा कि कामना है कि प्रकृति का यह लोकपर्व समस्त प्रदेशवासियों के जीवन में सुख-शांति, समृद्धि और खुशहाली लेकर आएगा। उत्तराखंड सांस्कृतिक दृष्टि से एक अत्यंत समृद्ध प्रदेश है। राज्य की अनूठी परंपराएं जीवंत संस्कृति तथा सुंदर लोकपर्व अपनी एक अलग पहचान रखते हैं। उत्तराखंड का लोक पर्व फूलदेई प्रकृति प्रेम तथा पर्यावरण संरक्षण का संदेश देता है। वर्तमान में इस पर्व की प्रासंगिकता और भी अधिक बढ़ गई है। आज संपूर्ण विश्व को हमारी पर्यावरण हितैषी परंपराओं और प्रकृति प्रेम की संस्कृति को जानने की आवश्यकता है। विशेषकर उत्तराखंड की युवा पीढ़ी को अपने लोकपर्वां एवं संस्कृति के संरक्षण तथा प्रचार-प्रसार के लिए पहल करनी चाहिए। हमें ऐसे प्रयास करने होंगे कि पूरी दुनिया हमारी संस्कृति को देखने आए। हमें उत्तराखंड को वैश्विक मानचित्र पर कल्चरल हब के रूप में विकसित करना है। नए उत्तराखंड का निर्माण यहाँ की   समृद्ध संस्कृति एवं परंपराओं की नींव पर ही होगा।
राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने कहा कि राज्य के लोकपर्व ही यहाँ की संस्कृति के संरक्षक है। नई पीढ़ी को उत्तराखंड की संस्कृति एवं परंपराओं से परिचित कराने में यह पर्व संवाहक की भूमिका निभाते हैं। फूलदेई बच्चों से जुड़ा पर्व है, इसलिए उत्तराखंड का प्रत्येक बालक-बालिका बचपन से ही अपनी संस्कृति और परंपराओं से जुड़ जाता है तथा उनमें प्रकृति के प्रति सम्मान का भाव विकसित हो जाता है। राज्यपाल ने उत्तराखंड के लोक परंपराओं तथा संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए प्रयासरत समस्त संस्थाओं, संगठनों एवं व्यक्तिगत प्रयासों की सराहना की है तथा उन्हें शुभकामनाएं दी है।
हिल फाउंडेशन स्कूल, इंडियन एकेडमी, दून इंटर नेशनल स्कूल, मैपल बियर के बच्चों की पारंपरिक वस्त्रों में सजी धजी टोली रुद्रप्रयाग के घोगा माता की फूल डोली व अल्मोड़ा से माँ नन्दा की फूल टोकरी लेकर सबसे पहले सुबह राजभवन पहुंचे हालांकि इस बार राजभवन के द्वार पर महामहिम नहीं आ सके फिर भी ढ़ोल दमाऊं व मशक बाजे के साथ पहुंचे फुलारियों ने महामहिम के मुख्य प्रवेश द्वार पर खूब फूल बरसाए ।
राजभवन के बाद फुलारियों कि टीम मुख्यमंत्री आवास पहुंची जहां पहले से अपने द्वार पर बच्चों के स्वागत में खड़े मुख्यमंत्री पुष्कर धामी ने फुलारियों का स्वागत किया और उन्हें परंपरानुसार गेहूं, चावल, गुड़ के अलावा अन्य उपहार भेंट किए ।
मुख्यमंत्री ने सराहा 18 वर्षों से चली आ रही मुहिम को : 
मुख्यमंत्री पुष्कर धामी ने रंगोली आंदोलन के संस्थापक व समाजसेवी शशि भूषण मैठाणी व उनकी पूरी टीम को फूलदेई संरक्षण अभियान के 18 वर्ष पूरे हो जाने पर अपनी ओर से वीडियो संदेश भी दिया जिसमें उन्होंने मैठाणी द्वारा निरंतर चलाई जा रही मुहिम को सराहा उन्होंने कहा कि आज इनके प्रयासों से फूलदेई एक बार फिर से जीवंत हो उठी है । और अब न सिर्फ पहाड़ों में बल्कि देश विदेश में भी फूलदेई मनाई जाने लगी है ।
◆ प्रेसक्लब ने किया फूलदेई टीम को आमंत्रित : 
प्रेस क्लब में फूलदेई के फूल्यारों की टीम पहुंची जहां क्लब के पदाधिकारियों व अन्य सदस्यों द्वारा बच्चों का स्वागत किया गया । प्रेस क्लब द्वारा शशि भूषण मैठाणी के इस मुहिम की प्रशंसा की और कहा कि अब हर वर्ष प्रेस क्लब भी इस परंपरा को आगे बढ़ाएगा ।
18 वर्ष पूरे 19 वें वर्ष से एक और अभियान किया आरंभ :
फूलदेई संरक्षण अभियान के 18 वर्ष पूरे हो गए हैं । और अब 19वें वर्ष में प्रवेश किया इसके साथ अब एक और नए अभियान को इस पर्व से जोड़ दिया है । मुहिम के संरक्षक शशि भूषण मैठाणी ने कहा कि मनुष्य और प्रकृति के बीच के पारस्परिक सम्बन्धों के खूबसूरत पर्व को सामाजिक, सांस्कृतिक माध्यमों के साथ आर्थिक पक्ष से भी जोड़ना अनिवार्य है । उन्होंने बताया कि हर वो त्यौहार धूम धाम से मनाया जाता है जिसमें बाजार जुड़ा हुआ है । ऐसे में फूलदेई को भी बाजार से जोड़ना है जिसके लिए फूलदेई संध्या मुहिम भी शुरू कर दी गई है । इससे फूलों की खेती करने वाले किसानों, व टोकरी बनाने वाले हस्त शिल्पियों के अलावा आने वाले समय में उत्तराखंड के लोक गायकों व संगीत से जुड़े लोगों को भी बड़े स्तर पर रोजगार सृजित हो सकेगा ।  इसी क्रम में कल भव्य फूलदेई आह्वान संध्या का आयोजन किया गया जिसमें 4 परिवारों ने वर्ष 2023 की फूलदेई से पूर्व फूलदेई संध्या आयोजित करने का निर्णय लिया गया है ।
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35 बर्षों से पत्रकारिता के प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक व सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक, धार्मिक, पर्यटन, धर्म-संस्कृति सहित तमाम उन मुद्दों को बेबाकी से उठाना जो विश्व भर में लोक समाज, लोक संस्कृति व आम जनमानस के लिए लाभप्रद हो व हर उस सकारात्मक पहलु की बात करना जो सर्व जन सुखाय: सर्व जन हिताय हो.
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