(मनोज इष्टवाल)।
अंतिम समय तक संघर्ष…और उसके बाद फिर जीत! भाई किसी को भी अपना मुरीद बनाने की कोई कला डॉ हरक सिंह रावत से सीखे। वे राजनीति के साम दाम दंड भेद के कौन से गुण नहीं जानते, यह उन्होंने आज साबित कर दिया कि वे सर्वगुण सम्पन्न हैं। इधर पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की जिद की पहले हरक सिंह जनता से माफी मांगे, उधर नेता प्रतिपक्ष व पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह की जिद व वर्तमान कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल का सॉफ्ट कॉर्नर ने डॉ हरक सिंह रावत को पार्टी में शामिल करने को लेकर पार्टी आलाकमान के मध्य असमंजस की स्थिति बनाये रखी थी। पार्टी न हरीश रावत जुट को नाराज करना चाहती थी न प्रीतम जुट को..! चार दिन से चल रहे इस राजनीतिक ड्रामा का पटाक्षेप भी बेहद कूटनीति के साथ हुआ। जैसे ही सोशल मीडिया व अन्य मीडिया तंत्रों में खबर फैलाई गई कि हरक सिंह रावत को भाजपा में सम्मिलित करने पर चला मंथन..कांग्रेस असहज हुई और एकदम से हरक सिंह रावत को लपक लिए।
इस लपका-लपकी के बाद डॉ हरक सिंह रावत का यह बयान आना कि वे सोनिया गांधी का एहसान नहीं भूलेंगे जिन्होंने उन्हें बिना शर्त पार्टी में शामिल किया, दुधारी तलवार जैसा है। जो जताता है कि वे स्पष्ट रूप से पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत को यह संदेश देना चाहते हैं कि आप अपने माफी के फार्मूले पर बने रहिये, जिसकी मुझे जरूरत नहीं यहां सोनिया गांधी ने उन्हें बिना कुछ लिए दिए बिना शर्त पार्टी में शामिल कर दिया है। न सिर्फ उन्हें बल्कि उनकी पुत्र वधु को भी पार्टी में शामिल किया गया है।
यह देखने वाली बात थी कि जैसे ही डॉ हरक सिंह रावत व उनकी पुत्रवधु अनुकृति गुसाईं रावत को कांग्रेस संगठन व आलाकमान ने वर्चुअल माध्यम से कांग्रेस में शामिल करने की जानकारी दी व प्रदेश के वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं ने शुभकामनाएं दी, अनुकृति गुसाईं रावत ने जाकर प्रीतम सिंह के पैर छुवे, जो दर्शाता है कि डॉ हरक सिंह रावत व अनुकृति गुसाई की कांग्रेस में शामिल करने के लिए प्रीतम सिंह कितने सक्रिय रहे हैं।
सूत्र बताते हैं कि प्रीतम सिंह वर्तमान में राहुल गांधी के करीबियों में समझे जाते हैं व प्रदेश स्तर पर प्रीतम सिंह के विचारों व फैसलों को आलाकमान गंभीरता से लेता है, ऐसे में डॉ हरक सिंह रावत व अनुकृति गुसाई को कांग्रेस में शामिल करने का श्रेय भी इस घटनाक्रम के अनुसार प्रीतम सिंह को ही जाता दिखाई दे रहा है जिसमें मौन स्वीकृति प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल की भी साफ-साफ उनके चेहरे की चमक बयां कर रही है।
जहां हरीश रावत धड़े के लिए हरक सिंह रावत की कांग्रेस में एंट्री असहज कर देने वाली है वहीं प्रीतम सिंह धड़े के लिए यह खबर खुशी की लहर जैसी यही क्योंकि यह तय मानिए कि अगर चुनाव के बाद कांग्रेस सरकार बनाने की स्थिति में आती है तब हरीश रावत स्वघोषित मुख्यमंत्री तो हो सकते हैं लेकिन मुख्यमंत्री बनने के लिए उन्हें काफी पसीना बहाना पड़ेगा क्योंकि जोड़ तोड़ की राजनीति के महारथी डॉ हरक सिंह रावत तब तक इस स्थिति में अवश्य आ जायेंगे कि वह ‘बिहाइंड द कर्टेन’ उनकी राह का रोड़ा बने व गणेश गोदियाल व प्रीतम सिंह धड़े से ही कोई मुख्यमंत्री का उम्मीदवार बन जाय।
बहरहाल डॉ हरक सिंह रावत की विल पावर, सूझबूझ, कूटनीति की प्रशंसा करनी होगी कि उनकी एक हल्की सी पलटी ने उन्हें पुनः मेन स्टीम में ला दिया है। ये तो समुद्र व राम जैसा प्रकरण हो गया कि
विनय ना मानत जलध जड़ गए तीन दिन बीति।
बोले राम सकोप तब भय बिनु होय ना प्रीति।
मीडिया में फैली ख़बरों ने कि हरक सिंह रावत पर पुनः भाजपा ने मंथन करना शुरू कर दिया है, ने हरक सिंह की कुछ ही घण्टों में कांग्रेस में शामिल किए जाने की राह आसान कर दी। और उसी का प्रतिफल है कि हरक सिंह रावत व अनुकृति गुसाई को डॉ हरक सिंह रावत के कहे अनुसार बिना शर्त कांग्रेस में शामिल कर लिया गया है।

