Sunday, May 10, 2026
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लैंसडाउन डीएफओ दीपक कुमार का लेटर बम। बोले- कैम्पा योजना का 251.31 लाख भुगतान न करने व लालढांग-चिल्लरखाल मोटर मार्ग की अनियमितताओं पर जांच है मुख्य वजह।

देहरादून (हि. डिस्कवर)

लैंसडाउन वन प्रभाग के डीएफओ पर वन मंत्री डॉ हरक सिंह रावत द्वारा मीडिया के सामने अवैध खनन में लिप्त के आरोप के बाद आज डीएफओ दीपक कुमार ने ऐसा लेटर बम फोड़ा जिसकी कल्पना न वन मंत्री ने की होगी और न विभाग ने। क्योंकि यह पत्र मीडिया के पास ठीक उसी तरह से वायरल हुआ जिस तरह से वन मंत्री ने मीडिया के आगे दीपक कुमार पर अवैध खनन में संलिप्तता के गम्भीर आरोप लगाकर उन्हें मुख्यालय अटैच करने के निर्देश जारी किये हैं।

मुख्य वन संरक्षक गढ़वाल को लिखे पत्र संख्या/ 2215/21-5 कोटद्वार दिनांक 11/12।2021 में उन्होंने  खनन सम्बन्धी शिकायतों पर विस्तृत रिपोर्ट नामक बिषय का उल्लेख करते हुए पत्रांक-1186/21-5 दिनांक 07-12-2021 वालेे पत्र का सन्दर्भ दिया है व स्पष्ट तौर पर लिखा है कि खो नदी में अवैध खनन मामले को झूठ व निराधार बताते हुए स्पष्ट किया है कि खो नदी क्षेत्र सिविल क्षेत्र है जोकि राजस्व विभाग के अधिकार क्षेत्र में है इसलिए इस पर वन मंत्री द्वारा लगाये गए सारे आरोप निराधार हैं। और मालन नदी में हो रहे खनन पर  उनके द्वारा की गयी कार्यवाही में माह अक्टूबर से लेकर नवम्बर तक 51 ट्रैक्टर ट्रॉली, 2 जेसीबी व 1 पोकलैंड जब्त की है। उन पर जिन्हें छुड़वाने का दबाब बनवाया गया क्योंकि इनमें कुछ पीआरओ की गाड़ियां थी।

वहीं मुख्य वन संरक्षक (Hoff) देहरादून को लिखे पत्र संख्या/ पत्रांक-2325/1-13 कोटद्वार दिनांक 18/12/2021  में उन्होंने स्थानांतरण/तैनाती आदेश के क्रम में मुख्यालय में सम्बद्ध किये जाने के सम्बंध में प्रश्न उठाते हुए उत्तराखण्ड वन अनुभाग-1 के पत्र संख्या -2146/X-I-2021-14(22) टीoसीo- 1 दिनांक 17-12-2021 कई गम्भीर आरोप लगाए हैं जिसमें उन्होंने सरेआम लिखा है कि उन पर की गई कार्यवाही बेहद अनैतिक है व उन्हें इसलिए मुख्यालय अटैच किया गया क्योंकि उन्होंने कैम्पा योजना की 251.31 लाख की धनराशि का अवैध तरीके से भुगतान करने से साफ इंकार कर दिया था।

डीएफओ दीपक कुमार यहीं नहीं रुके बल्कि उन्होंने पर्दे के पीछे हो रहे खनन के खेल का भी भंडाफोड़ किया व साथ ही लालढांग-चिल्लरखाल मोटरमार्ग के घटिया निर्माण व अनियमितताओं पर जांच बिठाने की बात की थी। उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा कि यह वन मंत्री का विधान सभा क्षेत्र है इसलिए उन्हें अवैध तरीके से धमकियां भी दी जाती थी। उन्होंने लिखा है कि उपनल के माध्यम तो छोड़िए नियम विरुद्ध अपने चहेतों को वन विभाग में भर्ती करवाने का दबाब, पीआरओ के खनन से जुड़े वाहनों के चालान निरस्त करने का दबाब हो या फिर बैम्बू हट निर्माण को लेकर लगातार बनाया जाने वाला दबाब ही उनकी हठधर्मिता का कारण बना व उन्हें जबरदस्ती मुख्यालय अटैच किया गया है।

इन पत्रों से तो यही स्पष्ट होता है कि डीएफओ दीपक कुमार न वन मंत्री के दबाब में आये न उनके कारिंदों के दबाब में, इसलिए उनकी लैंसडाउन वन प्रभाग से छुट्टी की गई व उन्हें मुख्यालय अटैच किया गया है।

उनके वायरल पत्रों पर वन मुख्यालय क्या निर्णय लेता है या फिर वनमंत्री डॉ हरक सिंह रावत किस एक्शन मॉड में दिखते हैं ये आने वाला समय ही बताएगा, फिलहाल डीएफओ दीपक कुमार के ये लेटर बम आज किसी विभाग के अंदर होने वाले खेला का एक बड़ा विस्फोट तो समझे ही जा रहे हैं।

 

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