मुजफ्फरनगर/देहरादून (हि. डिस्कवर टीम)।
देश भर में जहां भी गए सफेदपोशों के स्टिंग करने वाले व स्टिंगबाज के रूप में चर्चित समाचार प्लस न्यूज़ चैनल के सीईओ / एडिटर इन चीफ उमेश कुमार ने 02 अक्टूबर को उत्तराखण्ड आंदोलनकारी शहीद स्थल रामपुर के नजदीक राष्ट्रीय राजमार्ग पर 1 किमी. लम्बा राष्ट्रीय ध्वज फहरवाकर इतिहास रच दिया है।
उमेश कुमार ने इसका वीडियो जारी करते हुए सोशल साइट पर ट्वीट करते हुए लिखा कि “आज 2 Oct सुबह रामपुर तिराहे पर शहीद आंदोलनकारियों की याद में हवन और विशाल भंडारे का आयोजन किया उसके बाद रामपुर तिराहे के नज़दीक हाईवे पर 1 KM लम्बा तिरंगा झंडा फहरा कर इतिहास रचा गया , आप भी देखें और इस एतिहासिक पल को शेयर करें।”
कौन है उमेश कुमार ?
ज्ञात हो कि उमेश कुमार ने पत्रिकारिता की शुरुआत एनएनआई न्यूज़ एजेंसी के माध्यम से देहरादून उत्तराखंड से की तदोपरान्त उन्होंने उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती से जुड़े एक समाचार चैनल को देहरादून में लांच किया। बहुत जल्दी ही उन्होंने अपना न्यूज़ चैनल समाचार प्लस लांच कर सबको चौंका दिया।
राजनेताओं से करीबी सम्बन्धों का फायदा लेते हुए वे जिस तेजी के साथ शीर्ष पर चढ़े उतनी ही तेजी के साथ उनके राजनेताओं के खिलाफ स्टिंग ऑपरेशन्स ने उन्हें चर्चाओं में लाकर खड़ा कर दिया। उन्हें भू माफिया कहकर प्रचारित किया जाने लगा।
सबसे पहले डॉ. रमेश पोखरियाल “निशंक” के मुख्यमंत्री काल में उन पर केश दर्ज किया गया । गिरफ्तारी की तलवार लटकती देख उन्हें कुछ दिन भूमिगत रहना पड़ा। उनकी देहरादून स्थित तमाम सम्पत्ति को सीज किया गया व उनके विरुद्ध “रेड कॉर्नर नोटिस” जारी किया गया। इसके बाद उमेश कुमार पूरे देश की पत्रकारिता में चर्चित चेहरे हो गए। कहा जाता है कि ‘अ बेड मैन बेटर देन अ बेड नेम…!” इसी डायलॉग को फॉलो करते पत्रकारों ने उमेश जे कुमार उर्फ उमेश कुमार को पत्रकारिता में सबसे बुरा खिताब देना शुरू कर दिया। इस खिताब को देने के लिए उन्हें उमेश कुमार के खिलाफ खबरें लिखवाने व उन्हें माफिया तंत्र से जोड़ने की खबरें भी खूब प्रसारित हुई।
इतना कुछ होने के बाद भी उमेश कुमार ने केंद्र ही नहीं बल्कि देश की राज्य सरकारों के भी शीर्ष नेताओं से अपने सम्बन्ध खत्म नहीं किये व अपने विरुद्ध निशंक सरकार में जारी रेड कॉर्नर नोटिस वापस करवाकर ही दम लिया। तदोपरांत कांग्रेस की हरीश रावत सरकार में फिर से समाचार प्लस ने देहरादून में अपना चैनल स्थापित किया और टीआरपी के टॉप क्षेत्रीय चैनल्स में अपनी पैठ बनाई। खबरों के सौदागर कहें या फिर खबरों के स्टिंगबाज…दोनों ही रूपों में फिर उनका अवतरण तब हुआ जब हरीश रावत सरकार से डॉ हरक सिंह रावत की अगुवाई में दर्जन भर कांग्रेसी नेताओं ने सरकार से अपना समर्थन वापस लेकर सरकार को अल्पमत में ला दिया। उमेश कुमार द्वारा पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत का एक स्टिंग सामने लाकर खलबली मचा दी। बाद में परिणाम यह निकला कि कांग्रेस सरकार विधान सभा चुनाव हार गई व भाजपा की त्रिवेंद्र रावत सरकार सत्ता में आई।
फिर एक दिन खबर आती है कि उमेश कुमार को गिरफ्तार कर दिया गया है व उनके समाचार चैनल को सीज कर दिया गया है।
उन्ही के साथ कार्यरत पत्रकार आयुष गौड़ की एफआईआर के तहत उन्हें गिरफ्तार किया गया था। अखबारों में छपी खबरों के अनुसार मुख्यमंत्री का स्टिंग न कर पाने पर पत्रकार को धमकी देने के मामले में एक चैनल के सीईओ उमेश कुमार को गाजियाबाद स्थित उसके घर से गिरफ्तार कर लिया गया। उसके घर से लगभग 40 लाख रुपये नकद, 16 हजार अमेरिकी डॉलर, 11 हजार थाई करेंसी भात और दर्जनों स्टिंग की रिकॉर्डिंग बरामद की गई हैं।
बताया जा रहा है कि उसने मुख्यमंत्री के एक करीबी का स्टिंग किया था, जिसके बाद वसूली में यह रकम प्राप्त की थी। रंगदारी के इस मामले में आयुर्वेद विवि के कुलसचिव (निलंबित) मृत्युंजय मिश्रा समेत चार अन्य भी मुल्जिम हैं। बाद में पुलिस यह साबित कर नहीं पाई कि यह समस्त धनराशि उमेश कुमार ने स्टिंग करके अर्जित की थी।
यह गिरफ्तारी उमेश कुमार के लिए किसी दुःस्वप्न से कम न थी। यहां से केस खारिज हुआ तो उन पर फेरा कानून व ईडी की तलवार लटकी। उन्हें रातोंरात झारखंड ले जाया गया और वहां भी उन्हें बन्द रखा गया। इसके बाद जब कोर्ट से बरी होकर उमेश कुमार बाहर निकले तो उन्होंने एक एक करके मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र के नजदीकियों के स्टिंग ऑपरेशन सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों तक पहुंचाने शुरू कर दिए। इधर समाचार प्लस बन्द होने के बाद उन्होंने बंगाल में R9 न्यूज़ चैनल के सीईओ पद पर काम करते ही बांग्ला न्यूज़ चैनल की शुरुआत की व वहां भी चार चार मंत्रियों के भ्रष्टाचार का स्टिंग कर बम फोड़ दिया।
पत्रकारिता जगत में लग रहा था कि उमेश कुमार जेल में दी गयी प्रताड़नाओं के बाद अब कभी दुस्साहस नहीं करेगा और न ही पत्रकारिता में आएगा लेकिन उमेश कुमार ने आते ही यह बड़ा धमाका कर दिया। सूत्र बताते हैं कि बंगाल में भी उन पर कई केस दर्ज हुए। तदोरान्त उन्होंने पहाड़ टीवी वेब न्यूज़ शुरू किया व उत्तराखण्ड में अपनी दखल बरकरार रखी।
महाराष्ट्र में सिने जगत में सुशांत राजपूत की मौत के बाद पैदा हुए हालात के बाद पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी के महाराष्ट्र के राज्यपाल नियुक्त होने के बाद उमेश कुमार ने महाराष्ट्र में मराठी भारत न्यूज़ चैनल प्रारम्भ किया। कोरोना काल में सिने व क्रिकेट स्टार्स के साथ मिलकर उन्होंने देश भर में राहत सामग्री व जहाज ट्रेन बसों के माध्यम से नौकरी पेशा लोगों को उनके घरों तक पहुंचाने का कार्य प्रारम्भ किया। यह उनका दूसरा रूप था जिसे देख उत्तराखंड का आम नागरिक उनसे काफी प्रभावित हुआ।
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के इस्तीफे के बाद तीरथ सिंह रावत मुख्यमंत्री बने। उमेश कुमार ने घर वापसी करते हुए अपना न्यूज़ चैनल समाचार प्लस पुनः प्रारम्भ करने की कवायद शुरू कर दी। वे यहीं नहीं रुके व कोरोना की दूसरी लहर में पहाड़ के दूर दराज इलाकों में हैलीकॉप्टर के माध्यम से उन्होंने दवा व राहत सामग्री भेजनी प्रारम्भ कर दी। वर्तमान पुष्कर सिंह धामी सरकार में उन्होंने पुनः समाचार प्लस न्यूज़ चैनल लांच कर अपनी जीवटता व जिजीविषा का परिचय दिया।
वर्तमान परिस्थियों में भले ही उमेश कुमार से उत्तराखण्ड के मीडिया जगत के मेन स्ट्रीम मीडियाकर्मी कतराते हैं लेकिन दबी जुबान में उनके साहस व अंदरखाने से छान कर निकाली गई खबरों की प्रशंसा जरूर करते हैं। इस सब में एक तबका ऐसा भी है जो उन्हें टोटल स्टिंगबाज मानता है व उन्हें उत्तराखंड में भू माफिया मानकर राज्य विरोधी करार देता है।
अब प्रश्न यह उठता है कि अगर उमेश कुमार स्टिंगबाज व दलाल पत्रकार हैं तो कैसे उन पर कोई हाथ नहीं डालता जबकि वह विभिन्न प्लेटफॉर्म पर न सिर्फ राजनेताओं बल्कि पुलिस प्रशासन के आला अफसरों को तक लाकर बेपर्दा करने में जरा भी देरी नहीं करते।
प्रश्न यह उठता है कि क्या कोरोना काल के बाद प्रदेश के ग्रामीण व शहरी समाज में बढ़ी उमेश कुमार की लोकप्रयिता ने कहीं न कहीं मीडिया व राजनैतिक जगत में खलबली मचा रखी है? क्या साजिशें रचकर आगे बढ़ना उमेश कुमार का मुख्य किरदार है या फिर उनके किरदार को देखकर उनके विरुद्ध साजिश-दर-साजिश रची जाती हैं?
बहरहाल उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी शहीद स्थल में 01 किमी. लम्बा राष्ट्रीय ध्वज फहराने के लिए जहां उमेश कुमार ने इतिहास रचा है वहीं उन्होंने कहीं न कहीं इस कृत्य के माध्यम से उत्तराखण्ड वासियों के दिलों में पैठ जरूर बनाई है।




